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योगी सरकार का बड़ा एक्शन, हाथरस में दंगों की साजिश रचने पर पुलिस ने दर्ज की FIR

लखनऊ. योगी आदित्यनाथ जब मार्च 2017 में सूबे के मुख्यमंत्री बने थे तभी उन्होंने अपने शासन की सबसे उच्च प्राथमिकता कानून-व्यवस्था को ठीक करना बताई थी. उन्होंने चेताते हुए कहा था कि अपराधी यूपी छोड़कर भाग जायें नहीं तो उन्हें उनकी सही जगह पहुंचा दिया जायेगा. इसके बाद
लखनऊ. योगी आदित्यनाथ जब मार्च 2017 में सूबे के मुख्यमंत्री बने थे तभी उन्होंने अपने शासन की सबसे उच्च प्राथमिकता कानून-व्यवस्था को ठीक करना बताई थी. उन्होंने चेताते हुए कहा था कि अपराधी यूपी छोड़कर भाग जायें नहीं तो उन्हें उनकी सही जगह पहुंचा दिया जायेगा. इसके बाद "ठोक दो" का डायलॉग भी खूब फेमस हुआ था लेकिन, साढ़े तीन साल बीतते बीतते अब ऐसा लगने लगा है कि कानून व्यवस्था सरकार के लिए अभी भी सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है. ताजा मामला हाथरस का तो है ही लेकिन आईये जानते हैं कि योगी सरकार में कौन 5 बड़ी आपराधिक घटनायें हुईं जिनसे सरकार की बहुत किरकिरी हुई.

Hathras Case: जांच एजेंसियों के मुताबिक, वेबसाइट के जरिए विरोध प्रदर्शन की जानकारी दी जा रही थी. इतना ही नहीं इस वेबसाइट (Website) के तार एमनेस्टी इंटरनेशनल से जुड़े होने के भी संकेत मिले हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 6, 2020, 12:15 AM IST
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लखनऊ. हाथरस कांड (Hathras Case) मामले में योगी सरकार (Yogi Government) को भेजी गई खुफिया जांच रिपोर्ट में प्रदेश में सांप्रदायिक दंगे भड़काने की साजिश भी रची गई थी. इसी कड़ी में योगी सरकार ने सोमवार को बड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए है. हाथरस के बहाने यूपी में दंगों की अंतरराष्ट्रीय साजिश के खुलासे के बाद यूपी पुलिस ने हाथरस के थाना चन्दपा में बेहद गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है. इन तमाम सारे प्रयासों से वर्ग संघर्ष पैदा कर यूपी की लोक व्यवस्था छिन्न-भिन्न करने का भी एक मामला दर्ज हुआ है.

इस्लामिक देशों से फंडिंग!
जांच एजेंसियों के मुताबिक, वेबसाइट के जरिए विरोध प्रदर्शन की जानकारी दी जा रही थी. इतना ही नहीं इस वेबसाइट के तार एमनेस्टी इंटरनेशनल से जुड़े होने के भी संकेत मिले हैं. इस्लामिक देशों से फंडिंग की भी जानकारी सुरक्षा एजेंसियों को मिली है. वेबसाइट में फर्ज़ी आईडी से सैकड़ों लोगों को जोड़ा गया और मदद के बहाने फंडिंग भी जुटाई गई. इतना ही नहीं कुछ नामचीन लोगों के सोशल मीडिया एकाउंट का भी इस्तेमाल किया गया. वेबसाइट बनाने में पीएफआई और एसडीपीआई की भूमिका भी सामने आ रही है.

बेहद गंभीर धाराओं में केस दर्ज
बेहद गंभीर धाराओं में केस दर्ज

बताया जा रहा है कि पीड़ित लड़की की जीभ काटे जाने, अंग भंग करने और गैंगरेप से जुड़ी तमाम अफवाहें उड़ा कर नफरत की आग भड़काने की कोशिश की गई. वहीं अफवाह फैलाने के लिए ढेरों वेरिफाइड सोशल मीडिया अकाउंट का भी इस्तेमाल किया गया. जांच एजेसियां वेरिफाइड अकाउंट्स का ब्योरा तैयार करने में जुटी हैं.





पीएफआई और एसडीपीआई के तार भी जुड़े
वेबसाइट पर बेहद आपत्तिजनक कंटेंट मिले हैं. इस बेवसाइट ने वॉलेंटियर्स की मदद से हेट स्पीच और भड़काऊ सियासत की भी स्क्रिप्ट तैयार की थी. जांच में सामने आया है कि पीएफआई और एसडीपीआई ने इस वेबसाइट को तैयार करने में मदद की है. रविवार की देर रात जैसे ही छापेमारी शुरू हुई थी. रात को ही यह वेबसाइट बंद हो गई. मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए फेक न्यूज, फोटो शॉप तस्वीरों, अफवाहों, एडिटेड विजुअल्स का दंगे भड़काने के लिए इस्तेमाल किया गया था.

50 लाख रुपए से लेकर एक करोड़ तक का लालच
उधर, हाथरस के पीड़ित परिवार को सरकार के खिलाफ भड़काने की साजिश का भी पर्दाफाश हुआ है, जिसके सबूत के तौर पर कई ऑडियो टेप पुलिस के हाथ लगे है. जांच एजेंसियों ने ऑडियो टेप का संज्ञान लेकर जांच शुरू कर दी है.
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