हाथरस कांड: पीड़िता के भाई का बड़ा खुलासा, सीबीआई ने पूछा- तुमने ही अपनी बहन को मारा?

(फाइल फोटो)
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हाथरस कांड (Hathras Case): पीड़िता के भाई ने बताया कि सीबीआई टीम ने उससे पूछा कि तुमने ही अपनी बहन को मारा है? इस पर उन्‍होंने जवाब दिया कि मैं अपनी बहन को मारता तो उसे लेकर थाने क्यों जाता?

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 5, 2020, 2:49 PM IST
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हाथरस. उत्तर प्रदेश के हाथरस कांड (Hathras Case) की जांच सीबीआई (CBI) कर रही है. पता चला है कि जांच एजेंसी ने एक बार फिर से पीड़िता के परिवार से पूछताछ की है. इस बार की पूछताछ को लेकर पीड़िता के भाई ने बड़ा खुलासा किया है. बुधवार को मानवाधिकार संगठन पीपुल्स यूनियन फ़ॉर सिविल लिबर्टी के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत में पीड़िता के भाई ने ये खुलासा किया. पीड़िता के भाई ने बताया कि सीबीआई की टीम ने उससे पूछा कि तुमने ही अपनी बहन को मारा है? इस पर भाई ने जवाब दिया कि मैं अपनी बहन को मारता तो उसे लेकर थाने क्यों जाता? पीड़िता के भाई ने बताया अगर हमें उसे मारना होता तो घर पर ही मार देते.

बता दें कि हाथरस कांड को लेकर एक माह बाद भी पीड़िता के परिजनों को सांत्वना देने के लिए लोगों का तांता लगा हुआ है. पीड़िता के परिजनों से मिलने के लिए मानवाधिकार संगठन का प्रतिनिधिमंडल पहुंचा था. ठीक उससे पहले सीबीआई की टीम पीड़िता के परिजनों से पूछताछ करके गई थी. जब मानवाधिकार के लोगों ने परिजनों से इस मामले में बातचीत की तो परिजनों ने सीबीआई द्वारा पूछे गए सवालों को बताया.

पीड़िता के भाई का कहना है कि मैं अगर अपनी बहन को मारता तो उसे घर में ही मार सकता था. उसको लेकर थाने क्यों जाता? मानवाधिकार संगठन के लोगों ने सीबीआई की पूछताछ को लेकर परिवार के बातचीत की. परिवार के लोगों ने सीबीआई द्वारा पूछे गए सवालों को लेकर विरोध जाहिर किया है.




सीबीआई को हाईकोर्ट दाखिल करनी है स्टेटस रिपोर्ट
इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने हाथरस मामले में अपना आदेश सुरक्षत रख लिया था. कोर्ट ने जांच की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए जिलाधिकारी (डीएम) प्रवीण कुमार लक्षकार के खिलाफ सरकार की होर से कोई कार्रवाई न होने पर चिंता जाहिर की. अदालत ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 25 नवंबर मुकर्रर करते हुए उसी दिन सीबीआई से इस मामले में जांच की स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को भी कहा है.

हाथरस मामले कि पीड़िता का कथित रूप से जबरन अंतिम संस्कार करने के मुद्दे का स्वत: संज्ञान लेने वाली जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस राजन रॉय की पीठ ने इस मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अपना फैसला सुरक्षित रख लिया.
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