Hathras Case: आखिर क्या है सच? देखिए शुरू से अब तक की पूरी कहानी

हाथरस कांड को लेकर सड़क से सोशल मीडिया तक मचा है घमासान (AP Photo/Rajanish Kakade)
हाथरस कांड को लेकर सड़क से सोशल मीडिया तक मचा है घमासान (AP Photo/Rajanish Kakade)

Hathras Case: अब तक इस मुद्दे को लेकर मीडिया और सोशल मीडिया पर बहुत सारी बातें हो चुकी हैं. विपक्षी पार्टियां भी हमलावर हैं. हाथरस के बुलगढ़ी गांव की 19 वर्षीया बेटी के साथ क्या हुआ यह अब जगजाहिर है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 6, 2020, 12:50 PM IST
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हाथरस. हाथरस कांड (Hathras Case) को अब तक 21 दिन बीत चुके हैं. चारों आरोपी सलाखों के पीछे हैं. मामले में योगी सरकार (Yogi Government) ने एसआईटी (SIT) जांच के साथ ही सीबीआई (CBI) जांच की सिफ़ारिश भी कर दी है. लेकिन, बवाल है कि थमने का नाम ही नहीं ले रहा है. सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक आक्रोश दिखाई दे रहा है. इस मुद्दे को लेकर जमकर सियासत भी हो रही है. साथ ही हाथरस कांड को दिल्ली के निर्भया कांड से जोड़कर भी देखा जा रहा है. इतना ही नहीं हाथरस केस में अधिवक्ता एस दुबे की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई भी हुई. इस केस में यह अहम मांग की गई है कि यूपी से इस केस को दिल्ली ट्रांसफर किया जाए. लेकिन क्या है हाथरस कांड का सच और अबतक क्या क्या कार्रवाई हुई?

मीडिया ट्रायल जारी
अब तक इस मुद्दे को लेकर मीडिया और सोशल मीडिया पर बहुत सारी बातें हो चुकी हैं. विपक्षी पार्टियां भी हमलावर हैं. हाथरस के बुलगढ़ी गांव की 19 वर्षीया बेटी के साथ क्या हुआ यह जगजाहिर है. पुलिस के रिकॉर्ड हो या फिर मीडिया या सोशल मीडिया का ट्रायल. हर जगह यही बात कही जा रही है कि अपर कास्ट के लोगों ने दलित बिटिया के साथ गैंगरेप किया और फिर गला दबाकर उसे मारने की कोशिश की गई. हाथरस की इस दिल दहला देने वाली घटना ने सभी को झकझोर दिया. एक तबके से यह भी मांग उठी की जब निर्भय कांड के दोषियों को फांसी दी गई तो हाथरस मामले में रहम क्यों बरती जा रही है. सोशल मीडिया में तो यह भी मांग की जा रही है कि हाथरस मामले में भी हैदराबाद पार्ट-2 को दोहराया जाए, क्योंकि आरोपियों को जीने का हक़ नहीं है.

देखिए हाथरस कांड की शुरू से अबतक की कहानी




अब तक तीन पक्ष निकलकर आए सामने
इस पूरे मामले में अब तक तीन पक्ष निकलकर सामने आए हैं. पहला पीड़ित परिवार, दूसरा आरोपी पक्ष और तीसरा राजनीतिक पक्ष. शुरू से बात करें तो 14 सितंबर की घटना है. सब कुछ सामान्य था. मृतका भी अपने मां और भाई के साथ घास काट रही थी. आरोप है कि मृतका ने जब एक गट्ठर घास काट ली तो उसका भाई उसे लेकर चला गया. इस समय भी मां और बेटी दूर- दूर बैठकर घास कट रही थीं. आरोप है कि उसी वक्‍त चार आरोपियों ने उस पर हमला कर दिया. इस मामले में मृतका का पहला बयान तब आया जब वह थाने में बेसुध थी. उसने बताया था कि कुछ लड़कों ने उसके साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की और मना करने पर दुपट्टे से गला दबा दिया. मां का भी बयान वही था जो मृतका ने कहा था. दोनों ने एक ही शख्स का नाम लिया था. वह था संदीप. लेकिन, अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज में जब पीड़िता ने बयान दिया तो उसने कहा कि उसके साथ गलत काम किया गया.

पीड़ित के भाई का आरोप
पीड़िता के बयान के बाद भाई का बयान सामेन आया. उनका कहना था कि बहन के साथ दुष्कर्म किया गया और मारने की कोशिश की गई. आरोप लगा कि पुलिस ने एफआईआर लिखने में 8 दिन की देरी की. इस बीच, पीड़िता की हालत दिन प्रतिदिन बिगड़ रही थी. उसे अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज में एडमिट कराया गया. एक हफ्ते के इलाज के बाद उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में एडमिट कराया गया, जहां उसकी मौत हो गई. यह मामला तब और बड़ा हो गया जब पुलिस ने परिवार को शव नहीं सौंपा और उसका अंतिम संस्कार कर दिया.
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