हाथरस: क्या बीजेपी के गढ़ में साइकिल चला पाएंगे सपा प्रत्याशी रामजीलाल सुमन?

पिछले करीब दो दशक से हाथरस सीट पर भारतीय जनता पार्टी का वर्चस्व रहा है. हाथरस सीट पर मुस्लिम-जाट का समीकरण हावी रहता है.

News18 Uttar Pradesh
Updated: March 13, 2019, 12:35 PM IST
हाथरस: क्या बीजेपी के गढ़ में साइकिल चला पाएंगे सपा प्रत्याशी रामजीलाल सुमन?
हाथरस से सपा प्रत्याशी रामजीलाल सुमन
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Updated: March 13, 2019, 12:35 PM IST
पश्चिम यूपी की लोकसभा सीट हाथरस में इस बार गठबंधन की तरफ से सपा प्रत्याशी रामजीलाल सुमन मैदान में हैं. रामजीलाल सपा के अनुभवी नेताओं में से एक हैं. वे पूर्व केंद्रीय मंत्री और चार बार के सांसद हैं. पिछली बार भी उन्होंने चुनाव में किस्मत आजमाई थी और उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. लेकिन इस बार उन्हें उम्मीद है कि बीजेपी के इस मजबूत किले में वे साइकिल दौड़ाने में कामयाब रहेंगे.

कौन हैं रामजीलाल सुमन?

मूल रूप से सादाबाद के गांव बहरदोई निवासी रामजीलाल सुमन की शिक्षा-दीक्षा हाथरस में हुई. डीआरबी और सरस्वती इंटर कॉलेज में शिक्षा लेने के बाद वह उच्च शिक्षा के लिए आगरा चले गए. वहां वह आगरा कॉलेज आगरा में पढ़े. विद्यार्थी जीवन से ही सुमन राजनीति में सक्रिय हो गए. शुरू में उनकी राजनीतिक कर्मभूमि आगरा व फिरोजाबाद रही. वे हमेशा समाजवादी विचारधारा के साथ रहे. सुमन की मानें तो देश में जब इमरजेंसी लगी तो सबसे पहले आगरा में उन्हीं की गिरफ्तारी हुई. वह एक साल से ज्यादा जेल में भी रहे. 1977 में वह मात्र 26 वर्ष की आयु में फिरोजाबाद से जनता पार्टी से सांसद निर्वाचित हुए.

उसके बाद वह 1989 में जनता दल से जीतकर संसद में पहुंचे. उसके बाद फिरोजाबाद से ही सपा से 1999 और वर्ष 2004 में सांसद चुने गए. वह चंद्रशेखर की सरकार में श्रम और कल्याण मंत्री भी रहे.

क्या है हाथरस लोकसभा सीट का समीकरण?

पिछले करीब दो दशक से हाथरस सीट पर भारतीय जनता पार्टी का वर्चस्व रहा है. हाथरस सीट पर मुस्लिम-जाट का समीकरण हावी रहता है, यही कारण है कि मायावती की बहुजन समाज पार्टी भी इस सीट पर प्रबल दावेदार रहती है. हाथरस लोकसभा सीट आरक्षित सीटों में आती है. इस बार सपा यहां गठबंधन के साथ मैदान में है. लिहाजा बीजेपी को कड़ी टक्कर मिलती दिख रही है.

इस सीट पर बीजेपी-आरएलडी को यहां लगातार जीत मिलती रही. पिछले चुनावी आंकड़ों के अनुसार, यहां पर करीब 17 लाख से अधिक मतदाता हैं, इनमें से करीब 9.6 लाख पुरुष वोटर और 7.8 लाख महिला मतदाता हैं.
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बीते कई चुनावों में बसपा को यहां पर लगातार लाखों वोट मिले हैं, इसलिए बसपा को इस सीट पर कमतर नहीं आंका जा सकता है. हाथरस लोकसभा सीट के अंतर्गत 5 विधानसभा सीटें आती हैं. इनमें छर्रा, इगलास, हाथरस, सादाबाद और सिकंदरा राऊ सीटें शामिल हैं. 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में यहां सिर्फ सादाबाद में बसपा ने जीत दर्ज की थी, जबकि बाकी अन्य सीटों पर बीजेपी ने झंडा गाढ़ा था.

2014 के मोदी लहर का असर साफ देखने को मिला था, भारतीय जनता पार्टी के राजेश कुमार दिवाकर को 2014 में यहां कुल 51 फीसदी वोट मिले थे. उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार को करीब 3 लाख वोटों से हराया था.

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First published: March 13, 2019, 12:35 PM IST
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