नमाज के विरोध में सड़क पर एक घंटे तक पढ़ी हनुमान चालीसा

उत्तर प्रदेश के हाथरस में हिंदू संगठन के लोगों ने सड़क पर एक घंटे हनुमान चालीसा पाठ किया.

News18 Uttar Pradesh
Updated: July 18, 2019, 10:22 PM IST
नमाज के विरोध में सड़क पर एक घंटे तक पढ़ी हनुमान चालीसा
हिंदू संगठन अक्सर इस मुद्दे पर विरोध दर्ज कराते रहे हैं कि मुस्लिम समुदाय सड़कों पर नमाज अता करता है.
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Updated: July 18, 2019, 10:22 PM IST
हिंदू संगठन अक्सर इस मुद्दे पर विरोध दर्ज कराते रहे हैं कि मुस्लिम समुदाय सड़कों पर नमाज अता करता है. लेकिन गुरुवार को हिंदू संगठनों ने इसका विरोध हनुमान चालीसा का पाठ कर किया. उत्तर प्रदेश के हाथरस में हिंदू संगठन के लोगों ने सड़क पर एक घंटे हनुमान चालीसा पाठ किया. संगठन के लोगों का कहना है कि अगर मुसलमानों की सड़क पर नमाज बंद नहीं होगी तो वह हर मंगलवार को एक घंटे तक हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे.

अयोध्या के संतों ने किया समर्थन
हाथरस में मुस्लिम समाज द्वारा मस्जिदों के बाहर सड़कों पर नमाज पढ़े जाने का विरोध करते हुए हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं ने हाथरस में हनुमान मंदिर के बाहर बैठकर सड़क पर घंटे तक हनुमान चालीसा का पाठ किया. इसका अयोध्या के संत समाज के लोगों ने स्वागत किया और उनका कहना था कि अगर नमाज इस तरीके से पढ़ी जा सकती है तो फिर हनुमान चालीसा क्यों नहीं पढ़ी जा सकती?

संतों का कहना है कि इस देश में 2 तरीके का कानून क्यों होगा? तपस्वी छावनी के महंत परमहंस दास ने कहा कि धार्मिक आजादी दोनों समुदाय के लिए होनी चाहिए. प्रतिबंध हो तो दोनों समुदाय के लिए. अल्पसंख्यक समाज का पर्सनल लॉ बोल्ड अराजकता को बढ़ावा देता है. परमहंस ने कहा कि न्यायपालिका दोनों का सम्मान रखे अगर प्रतिबंध हो तो दोनों के ऊपर हो और अगर प्रतिबंध नहीं है तो फिर रोड पर हनुमान चालीसा पढ़ना भी जायज है.

कानून सबके लिए एक होना चाहिए: संत सत्येंद्र दास

वहीं अयोध्या के संत सत्येंद्र दास ने कहा कि कानून सबके लिए एक होना चाहिए. किसी को छूट और किसी के ऊपर प्रतिबंध यह 2 तरीके का कानून बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. राम जन्मभूमि आंदोलन के अगुआ रहे स्वर्गीय रामचंद्र दास परमहंस के शिष्य नारायण मिश्रा ने कहा कि हनुमान चालीसा पढ़ना अच्छी बात है लेकिन आम आदमी को कोई परेशानी ना हो या बात भी ध्यान रखना चाहिए. अगर सड़क पर रोजा इफ्तार हो सकता है तो फिर हनुमान चालीसा भी हो सकती है. एक देश और एक कानून होना चाहिए.

(फरीद शम्सी, मुरादाबाद)
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First published: July 18, 2019, 9:12 PM IST
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