कारगिल विजय दिवस: जिला प्रशासन की अनदेखी से शर्मिदगी महसूस करा रहा हाथरस के शहीद का परिवार

कारगिल युद्ध में शहीद हुए हाथरस के क़स्बा सादाबाद क्षेत्र के नगला चौधरी के रहने वाले शहीद चौधरी गजपाल सिंह का पूरा परिवार कारगिल दिवस के इस मौके पर फक्र नहीं बल्कि शर्मिंदगी महसूस कर रहा है

News18 Uttar Pradesh
Updated: July 26, 2019, 12:40 PM IST
कारगिल विजय दिवस: जिला प्रशासन की अनदेखी से शर्मिदगी महसूस करा रहा हाथरस के शहीद का परिवार
शहीद चौधरी गजपाल
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Updated: July 26, 2019, 12:40 PM IST
26 जुलाई को पूरा देश कारगिल विजय दिवस पर वीर सपूतों की शहादत को नमन करते हुए उन्हें याद कर रहा है और अपनी श्रद्धांजलि दे रहा है. देश पर मर मिटने वाले वीर सपूतों की वीर गाथाओं को याद करते हुए नमन कर रहा है. जहां एक ओर कारगिल दिवस के इस मौके पर शहीद जवानों के परिवार अपने आप में फक्र महसूस कर रहे है, वहीं हाथरस में कारगिल युद्ध में शहीद हुएचौधरी गजपाल सिंह का परिवार शर्मिदगी महसूस कर रहा है और इसकी वजह है जिला प्रशासन.

कारगिल युद्ध में शहीद हुए हाथरस के क़स्बा सादाबाद क्षेत्र के नगला चौधरी के रहने वाले शहीद चौधरी गजपाल सिंह का पूरा परिवार कारगिल दिवस के इस मौके पर फक्र नहीं बल्कि शर्मिंदगी महसूस कर रहा है और इसकी बजह है हाथरस का जिला प्रशासन. बता दें वर्ष 1999 में 8 मई से 26 जुलाई तक चले कारगिल युद्ध के दौरान देश के 527 जवान शहीद हुए थे. इनमे हाथरस जिले के क़स्बा सादाबाद क्षेत्र की ग्राम पंचायत नौगांव के मजरा नगला चौधरी निवासी रामकिशन सूबेदार का पुत्र चौधरी गजपाल सिंह भी वीरता का परिचय देते हुए शाहेद हुए थे. उस समय अचानक प्राकृतिक रूप से बर्फीले तूफान में जवान चौधरी गजपाल सिंह सहित आधा दर्जन सैनिक फंस गए थे. करीब 45 दिनों बाद चौधरी गजपाल सिंह का पार्थिव शरीर गांव नगला चौधरी पंहुचा और जिला प्रशासन और सेना के जवानों की मौजूदगी में राजकीय समन्न के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया.

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शहीद चौधरी गजपाल


उस वक्त शहीद चौधरी गजपाल सिंह के परिवार से जिला प्रशासन और तत्कालीन सरकार ने जो भी वादे किए थे, वह आज तक पूरे नहीं हुए हैं. शहीद गजपाल के पिता रामकिशन भी सेना से साल 1997 में सूबेदार के पद से सेवानिवृत्त हुए थे. रामकिशन ने विजय दिवस की पूर्व संध्या पर बताया कि सरकारी मशीनरी का यह हाल है कि थाने तहसील या अन्य सरकारी दफ्तरों में किसी भी कार्य के लिए जाएं तो कोई सुनवाई नहीं होती. वह खुद भी करीब एक साल से बीमार हैं और निजी अस्पताल में इलाज करा रहे हैं. सरकारी अस्पतालों और जनप्रतिनिधियों से उन्हें कोई उम्मीद नहीं है.

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शहीद के घर के सामने गंदगी और जलभराव


बीमार अवस्था में चारपाई पर पड़े रामकिशन की आंखों में आंसू है और और कहते हैं इस देश के प्रशासन का तो ईश्वर ही रखवाला है. आलम यह है की शहीद चौधरी गजपाल के घर और उनकी समाधी के सामने गंदगी और जल भराव रहता है. इतना ही नहीं घर के सामने सड़क गड्ढे में तब्दील हो चुकी है. इसकी शिकायत शहीद गजपाल के पिता सूबेदार रामकिशन द्वारा लिखित में एक साल से की जा रही है, लेकिन आज तक उसका कोई निस्तारण नहीं हुआ. गंदगी और जलभराव को लेकर शहीद के पिता और परिवार को गांव वालों के ताने और गालियां सुननी पड़ती है. यही बजह है कि शहीद चौधरी गजपाल सिंह का परिवार हर उस मौके पर फक्र की जगह शर्मिंदगी महसूस करता है जब देश वीर सपूतो की वीर गाथाओं को याद करते हुए उन्हें नमन करता है.

(रिपोर्ट: रणजीत सिंह)
First published: July 26, 2019, 12:40 PM IST
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