हाथरस कांड में बड़ा खुलासा, विदेशी फंडिंग में PFI संग मिले भीम आर्मी के लिंक!

 हाथरस पीड़िता के परिवार से मिले चंद्रशेखर आजाद.
हाथरस पीड़िता के परिवार से मिले चंद्रशेखर आजाद.

Hathras Case: सफदरजंग अस्पताल (Safdarjang Hospital) से लेकर पीड़िता के गांव तक भीम आर्मी (Bhim Army) के कार्यकर्ता मौजूद थे. ऐसे में अब जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 9, 2020, 1:28 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. हाथरस केस (Hathras Case) के आरोप में पुलिस और एसआईटी (SIT) को कुछ अहम जानकारी मिली है. यह जानकारी हाथरस केस में विदेशी फंडिंग से जुड़ी है. पुलिस और एसआईटी को फंडिंग मामले में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और भीम आर्मी के लिंक मिले हैं. यह जानकारी के बाद पुलिस और एसआईटी ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है.

पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि सफदरजंग अस्पताल (Safdarjung Hospital) से लेकर पीड़िता के गांव तक भीम आर्मी (Bhim Army) के कार्यकर्ता मौजूद थे. ये कार्यकर्ता अपने को भीम आर्मी का न बताकर आम आदमी बता रहे थे. ऐसी सूचना है कि अब ईडी (ED) इस मामले में भीम आर्मी के नेताओं और कार्यकर्ताओं से पूछताछ कर सकती है.





ये भी पढ़ें- क्या एक जैसी है UP और Delhi Police की एनकाउंटर थ्योरी, दो दिन में 6 बदमाशों के पैर में मारी गोली
हाथरस केस में पुलिस ने 4 लोगों को गिरफ्तार किया है, जो पीएफआई के सदस्य बताए जा रहे हैं. गिरफ्तार सदस्यों में एक शख्स बहराइच के जरवल का रहने वाला है. इसके बाद से यूपी पुलिस सक्रिय हो गई है. बहराइच पुलिस का कहना है कि ये इलाका इंडो-नेपाल सीमा से सटा हुआ है और पिछले कुछ समय में पीएफआई से जुड़े कुछ अन्य लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. ऐसे में पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि यूपी और देश के भीतर जातीय और सांप्रदायिक दंगे फैलाने के लिए भारत नेपाल सीमा पर पीएफआई की गतिविधियां क्या चल रही हैं?

ये भी पढ़ें-जानिए भारत में बिकने वाले सबसे महंगे अंडे के बारे में, इसे खरीदने के लिए करानी होती है बुकिंग

इस्लामिक देशों से फंडिंग के भी आरोप!
जांच एजेंसियों के मुताबिक, वेबसाइट के जरिए विरोध प्रदर्शन की जानकारी दी जा रही थी. इतना ही नहीं इस वेबसाइट के तार एमनेस्टी इंटरनेशनल से जुड़े होने के भी संकेत मिले हैं. इस्लामिक देशों से फंडिंग की भी जानकारी सुरक्षा एजेंसियों को मिली है. वेबसाइट में फर्ज़ी आईडी से सैकड़ों लोगों को जोड़ा गया और मदद के बहाने फंडिंग भी जुटाई गई. इतना ही नहीं कुछ नामचीन लोगों के सोशल मीडिया एकाउंट का भी इस्तेमाल किया गया. वेबसाइट बनाने में पीएफआई और एसडीपीआई की भूमिका भी सामने आ रही है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज