होम /न्यूज /उत्तर प्रदेश /Sadabad Assembly Seat: ...तो क्‍या रामवीर के सहारे 25 साल का सूखा खत्‍म कर पाएगी भाजपा

Sadabad Assembly Seat: ...तो क्‍या रामवीर के सहारे 25 साल का सूखा खत्‍म कर पाएगी भाजपा

UP Chunav: सादाबाद विधानसभा सीट पर बिछ चुकी है चुनावी बिसात.

UP Chunav: सादाबाद विधानसभा सीट पर बिछ चुकी है चुनावी बिसात.

Sadabad Assembly Seat Election: जाट वोटरों के दबदबे वाली सादाबाद विधानसभा सीट पर वर्तमान में बसपा से रामवीर उपाध्‍याय व ...अधिक पढ़ें

हाथरस. सादाबाद विधानसभा सीट की इन दिनों हाथरस में हर तरफ चर्चा है. वजह रामवीर उपाध्‍याय हैं. रामवीर बसपा सरकार में ताकतवर मंत्री होते थे. हाथरस के कद्दावर ब्राह्मण नेता माने जाते हैं. सादाबाद से बसपा से विधायक हैं. फिलहाल बसपा से निलंबित चल रहे हैं. वह बसपा से उस जमाने से जुड़े थे, जब वहां ‘तिलक तराजू…’ वाला नारा लगता था. रामवीर 25 साल से विधायक हैं. 15 साल लगातार हाथरस सीट से जीते, वह सुरक्षित हुई तो सिकंदराराऊ आ गए. वहां 2012 में सपा उम्‍मीदवार से किसी तरह जीते तो 2017 में सीट बदलकर सादाबाद आ गए. वर्तमान में वह यहीं से विधायक हैं. हाथरस जिले में सादाबाद अकेली सीट थी जहां 2017 में बीजेपी जीत नहीं पाई थी. भाजपा उम्‍मीदवार प्रीति चौधरी न सिर्फ हारी थीं, बल्‍कि खिसककर तीसरे नंबर पर पहुंच गई थीं.

रामवीर उपाध्‍याय की पत्‍नी और बेटे भाजपा में शामिल हो चुके हैं. अब कयास लगाए जा रहे हैं कि वह खुद भाजपा में शामिल होकर चुनाव लड़ेंगे या बेटे को बीजेपी के टिकट पर सादाबाद से चुनाव लड़वाएंगे. रामवीर लड़ें या उनके बेटे, इस बार इस सीट पर लड़ाई दिलचस्‍प होने वाली है. वजह, सादाबाद सीट जाट बहुल है. 3.50 लाख मतदाताओं वाली इस सीट पर 90 हजार जाट वोटर हैं. दलित 55 हजार, ब्राह्मण 50 हजार, मुसलमान 25 हजार, क्षत्रिय और बघेल 20-20 हजार वोटर हैं. सादाबाद में रालोद का भी दबदबा माना जाता है. अब तक पांच बार रालोद या पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के परिवार के समर्थकों की जीत हो चुकी है. 2002 और 2007 में भी रालोद के उम्‍मीदवार की ही जीत हुई थी. 2017 में रालोद प्रत्‍याशी दूसरे नंबर पर था. किसान आंदोलन के चलते जाटों की नाराजगी को देखते हुए इस बार रालोद और रामवीर के बीच कांटे की टक्‍कर देखने को मिल सकती है.

शुरुआती चुनावों में इस सीट पर सादाबाद के नवाब अशरफ अली खान का प्रभाव होता था. कांग्रेस के टिकट पर वह चार बार और उनके बेटे कुंवर जावेद अली एक बार 1980 में विधायक रह चुके हैं. तब से इस सीट पर कांग्रेस को जीत नसीब नहीं हुई है. यहां से भाजपा सिर्फ दो बार जीत सकी है, 1991 और आखिरी बार 1996 में. समाजवादी पार्टी सिर्फ एक बार 2012 में जीती थी.

Tags: Hathras news, UP Election 2022, UP news

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें