निषाद पार्टी: इसकी नजर में चुनाव है नौटंकी, चाहिए 'वोट के बदले नोट का अधिकार'!

बीजेपी से हाथ मिलाने जा रही निषाद पार्टी ने चुनाव को नौटंकी और रोजगार गारंटी योजना धोखाधड़ी बताया है!

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: April 10, 2019, 10:53 AM IST
निषाद पार्टी: इसकी नजर में चुनाव है नौटंकी, चाहिए 'वोट के बदले नोट का अधिकार'!
निषाद पार्टी के समर्थक (file photo)
ओम प्रकाश
ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: April 10, 2019, 10:53 AM IST
समाजवादी कुनबे से अलग होकर योगी आदित्यनाथ के भगवा ब्रिगेड के साथ खड़ी होने वाली निषाद पार्टी का विजन आम राजनीतिक दलों से काफी अलग है. 2018 के लोकसभा उपचुनाव में योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखपुर लोकसभा सीट को अखिलेश की झोली में डलवाने वाली ये पार्टी 'वोट के बदले नोट लेने का मतदाता का अधिकार (वोटरशिप)' चाहती है. पार्टी का मानना है कि प्राकृतिक सम्पदाएं जैसे नदियों, पहाड़, पठार, रेगिस्तान, जंगल, कोयला, बालू, मोरंग, सोना-चांदी, लोहा, हीरा-मोती, अभ्रक, यूरेनियम आदि से प्राप्त राष्ट्रीय आय में  प्रत्येक मतदाता की आर्थिक हिस्सेदारी होनी चाहिए.

इसके विजन में लिखा गया है कि जब मात्र 2 ट्रान्जेक्शन 'कर' (टैक्स) लगाकर देश के विकास के लिए 18 लाख 20 हजार करोड़ रुपये जुटाए जा सकते हैं तो फिर 64 प्रकार के गैरजरूरी कर (टैक्स) लगाकर देश के हमारे लोगों की मेहनत की कमाई का लगभग 50 फीसदी हिस्सा लूटने का षड्यंत्र क्यों? (ये भी पढ़ें:  NDA में शामिल हो सकती हैं 'निषाद पार्टी')

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चुनाव नहीं नौटंकी है!

पार्टी विजन के मुताबिक "चुनाव आयोग ने यह कबूल किया कि हमने राजनीति से होने वाले अपराधीकरण पर रोक लगाई थी, मगर हम चुनाव में होने वाली वोटों की बिक्री पर रोक नहीं लगा सके. एक सर्वेक्षण के अनुसार पार्टियों को मिलने वाले कुल वोटों में से 22%वोट पैसा देकर खरीदे जाते है. गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लगभग 37% वोटर पैसा लेकर वोट देते हैं. इससे साबित होता है कि पूंजीपतियों ने चुनाव को नौटंकी और तमाशा बनाकर रखा है. भारत में चुनाव नहीं, चुनाव के नाम पर नौटंकी होती है. चुनाव पारदर्शी होना चाहिए.

रोजगार गारन्टी योजना एक धोखाधड़ी!
खेती योग्य जमीन मुट्ठीभर उद्योगपतियों के झोली में डाल रही है. उन्हें आत्महत्या करने पर मजबूर किया जा रहा है देश द्रोही, किसान द्रोही नीति बन्द हो. पार्टी के मुताबिक रोजगार गारन्टी योजना एक धोखाधड़ी है. सबको बिना मांगे काम मिलना चाहिए.
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आरएसएस और बामसेफ की तर्ज पर काम
निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल तो राजनीतिक संगठन हो गया. इसके साथ ही आरएसएस और बामसेफ की तरह पार्टी के लिए जमीनी स्तर पर काम करने वाला संगठन भी संजय निषाद ने खड़ा किया. इसका नाम है राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद (RNEP).

पार्टी की वेबसाइट पर संजय निषाद की ओर से लिखा गया है, 'भारतीय राजनीति में सपा, बसपा, भाजपा तथा कांग्रेस सहित सभी पार्टियां वंचित समाज के विकास की बातकर, समाज के नेताओं का चेहरा दिखाकर वोट लेती हैं. सरकार बनाती हैं और सरकार बनते ही सभी वंचित, अति पिछड़े एवं विशेषकर मछुआ समाज का हक हिस्सा अधिकार देने के मुद्दे को ठंडे बस्ते में डाल देती हैं.'

निषाद मतलब 'निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल'
निषाद पार्टी का पूरा नाम है 'निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल'. यह अंग्रेजी में बनता है NISHAD.यानी एक साथ दो निशाने साधे गए हैं. निषादों में 15-16 उपजातियां शामिल हैं. जिसमें केवट, मल्लाह, बिन्द, कश्यप, धीमर, मांझी, कहार, राजभर, भर, प्रजापति, कुम्हार, मछुआ, तुरैहा, गौड़, बाथम, मझवार, किसान, लोध, महार, खरवार, गोडीया, रैकवार, सोरहीया, खुलवट, चाई, कोली, भोई, कीर, तोमर, भील, जलक्षत्री, धुरीया शामिल हैं.

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वो अखिलेश यादव का शासन था जब अखिलेश निषाद मारा गया...!

निषादों को आरक्षण की मांग को लेकर 2015 से ही इस पार्टी के नेतृत्व में कई आंदोलन हुए हैं. सात जून 2015 को समाजवादी पार्टी के शासन में आरक्षण की मांग को लेकर निषाद समाज ने गोरखपुर में बड़ा आंदोलन किया था. रेलवे ट्रैक जाम कर दिया था. हजारों की संख्या में आए निषाद समाज की महिलाएं व पुरुष अलग-अगल जत्थों में ट्रैक पर एकत्रित होने लगे थे. पुलिस जाम हटाने के लिए हल्का बल का प्रयास किया तो इतने में मामला बिगड़ गया और पथराव, आगजनी शुरू हो गई.

तत्कालीन एसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज समेत पुलिस कर्मी जख्मी हो गए थे. पुलिस फायरिंग में अखिलेश निषाद नामक आंदोलनकारी की मौत हो गई थी. वो उसी इटावा का रहने वाला था जहां के मूल निवासी तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव हैं. बाद में इसी निषाद पार्टी ने अपना हित साधने के लिए समाजवादी पार्टी से ही हाथ मिला लिया था.

राजनीतिक इतिहास

इसकी स्थापना 2016 में की गई और 2017 में इसने यूपी के 72 विधानसभा क्षेत्रों में अपने प्रत्याशी उतार दिए. पहले ही चुनाव में पार्टी ने एक विधायक के साथ खाता खोल दिया. इस समय पार्टी के अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद के बेटे प्रवीण निषाद गोरखपुर से सांसद हैं. उन्होंने समाजवादी पार्टी, बसपा और पीस पार्टी के सहयोग से यह चुनाव जीता था. लेकिन अब वो उसी खेमे में चले गए हैं जिसे चुनाव में हराया था.

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राजनीति ही हर ताले की चाबी है

गोरखपुर जिले के ग्राम जंगल बब्बन, तहसील कैम्पियरगंज में 7 जून 1965 को जन्मे डॉ. संजय कुमार के पिता विजय कुमार निषाद सुबेदार मेजर थे. संजय ने सन् 1988 में कानपुर विश्वविद्यालय से बीएमईएच की उपाधि प्राप्त कर चिकित्सा प्रैक्टिस शुरू की. लेकिन उनका मन सियासत में लगा. संजय अपने पिछड़े हुए समाज में यह बता रहे हैं राजनीति ही हर ताले की चाबी है.

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First published: April 1, 2019, 12:41 PM IST
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