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लखनऊ चिड़ियाघर के असली हीरो हुक्कू बंदर कालू की मौत

News18Hindi
Updated: October 19, 2019, 1:05 PM IST
लखनऊ चिड़ियाघर के असली हीरो हुक्कू बंदर कालू की मौत
अरुणाचल में हुक्कू बंदरो की संख्या बढ़ाने की कवायद चल रही है.

लाख कोशिशों के बावजूद हुक्कू बंदर (Monkey) कालू (Kalu) की मौत हो गई. और इसी के साथ हू..कू..हू..कू.. की आवाज़ हमेशा के लिए शांत हो गई.

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  • Last Updated: October 19, 2019, 1:05 PM IST
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लखनऊ. शुक्रवार (Friday) को लखनऊ प्राणी उद्यान (Lucknow Zoo) का सबसे लोकप्रिय जीव हुक्कू बंदर कालू (Kalu Monkey) हमेशा के लिए खामोश हो गया. हुक्कू बंदर कालू उर्फ श्याम को सुबह सांस लेने में तकलीफ हो रही थी. जिसके चलते कालू अचेत होकर अपने बाड़े में पड़ा हुआ था. कालू को इस हाल में देखकर बाड़े के कीपर ने इसकी जानकारी तुरंत पशु चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर उत्कर्ष शुक्ला को दी. तुरंत ही हुक्कू बंदर कालू को वन्यजीव चिकित्सालय ले जाकर उसका इलाज़ शुरू कर दिया गया. अस्पताल (Hospital) में हुक्कू को फ्लूड और दवाईयां दी गईं.

हुक्कू बंदर कालू की मौत से दौड़ी शोक की लहर

हुक्कू बंदर कालू की मौत की खबर से हर तरफ शोक की लहर दौड़ गई. एक तरफ अपने इकलौते हुक्कू बंदर की मौत से प्राणी उद्यान के अधिकारी और कर्मचारी खासा दुखी नजर आए, तो दूसरी ओर अपने प्रिय कालू की मौत की खबर सुनते ही दर्शको ने भी उससे जुड़ी यादें सोशल मीडिया पर शेयर कर दुःख जताना शुरू कर दिया.

इस दौरान कालू की मौत से दुखी सुमित कुमार अपनी फेसबुक वॉल पर कालू की फ़ोटो शेयर करते हुए लिखते है कि 'दोस्त तुम बहुत याद आओगे, कभी भी चिड़ियाघर जाओ तो सबसे ज्यादा भीड़ तुम्हारे ही बाड़े के सामने रहती थी. जो भी आता तुम्हारी कूद फाँद देखकर हँसने लगता था. सारी जिंदगी सबको हँसाते रहे, लेकिन आज रुलाकर चले गए.. नमन..'

रानी के साथ उत्तराखण्ड से आया था कालू

ये सच था कि यूँ तो आपने कभी किसी इंसान को बंदर बनते नही देखा होगा, लेकिन लखनऊ प्राणी उद्यान में हुक्कू बंदर कालू के बाड़े के सामने आते ही कालू को बुलाने के लिए अच्छा खासा इंसान हुक्कू-हुक्कू कर हुक्कू बंदर की ही तरह नजर आता था. उम्र के अंतिम पड़ाव में भी कालू की उछल-कूद को देखकर उसकी उम्र का अंदाज़ा नही लगाया जा सकता था.

कालू लखनऊ प्राणी उद्यान का इकलौता हुक्कू बंदर था. साल 2002 में उत्तराखंड से ही रानी नाम की मादा हुक्कू बंदर लाई गई थी, लेकिन पांच साल बाद उसकी मौत हो गई, जिसके बाद से कालू खुद को काफी अकेला महसूस करता था. लखनऊ प्राणी उद्यान के निदेशक डॉ आर. के. सिंह के मुताबिक 'कालू हुक्कू बंदर को 27 नवंबर 1988 को लखनऊ प्राणी उद्यान लाया गया था. उस वक्त कालू की उम्र 7 से 8 वर्ष के बीच बताई गई थी. जिसके आधार पर कालू करीब 39 वर्ष का था'.
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खत्म होने की कगार पर हैं हुक्कू जैसे बंदर

हुक्कू बंदर सिर्फ असम, अरुणाचल, मेघालय, त्रिपुरा और मिज़ोरम जैसे देश के पूर्वोत्तर राज्यो के साथ बांग्लादेश के सदाबहार वनों में पाए जाते हैं. नर हुक्कू काले और मादा हुक्कू बंदर भूरे रंग की होती है. या अपने दल से बात करने या उनका ध्यान आकर्षित करने के लिए हुक्कू हुक्कू की आवाज निकालते हैं, और सांकेतिक भाषा मे बात करते है इसीलिए इनका नाम हुक्कू बंदर रखा गया. हुक्कू बंदर अब पूर्वोत्तर राज्यो में भी विलुप्त होने की कगार पर पहुच गए हैं. केंद्रीय चिड़ियाघर ने इन लुप्त हो रहे हुक्कू बंदर के संरक्षण के लिए अरुणाचल प्रदेश चिड़ियाघर में ब्रीडिंग सेंटर खुलवाया है. अरुणाचल में हुक्कू बंदरो की संख्या बढ़ाने की कवायद चल रही है.

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First published: October 19, 2019, 8:09 AM IST
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