ज़ीरो डिग्री से भी कम तापमान में 19 घंटे तक इसलिए दौड़े IIT के छात्र

नासिर हुसैन | News18Hindi
Updated: September 2, 2019, 2:51 PM IST
ज़ीरो डिग्री से भी कम तापमान में 19 घंटे तक इसलिए दौड़े IIT के छात्र
फोटो- अल्ट्रा मैराथन को पूरा करने के लिए पहाड़ी एरिया में दौड़ता अरुण तोमर.

तेज कदमों से लेह के माइनस डिग्री तापमान में भी 100 किमी से ज्यादा की दूरी को समय रहते नाप लिया. 19 लोगों की भीड़ में 10 कामयाब हुए लोगों के बीच जगह बनाई.

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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) (IIT) . यह नाम सामने आते ही एक तस्वीर बनती है पढ़ाकू लड़के की. वो लड़का जो गणित (Math) और फिजिक्स के फॉर्मूलों में ही उलझा रहता है. जब भी बात करता है तो सिर्फ पढ़ाई की ही. मानों खेलकूद (Sports) और दूसरी चीजों से उसे कोई मतलब ही न हो. लेकिन आईआईटी, कानपुर (Kanpur) के दो छात्रों ने साबित किया है कि जब बात पढ़ाई की हो तो वो सबसे बेहतर हैं और जब मौका मिला तो अपने तेज कदमों से लेह के माइनस डिग्री तापमान में भी 100 किमी से ज्यादा की दूरी को समय रहते नाप लिया. 19 लोगों की भीड़ में 10 कामयाब हुए लोगों के बीच जगह बनाई.

111 किमी तक लेह में इसलिए दौड़े आईआईटी के यह दो छात्र

राहुल भारद्वाज पीएचडी के छात्र हैं और अरुण तोमर एमटेक के. राहुल ने न्यूज18 हिन्दी को बताया कि हर साल लेह-लद्दाख में ला अल्ट्रा द हाई अल्ट्रा मैराथन का आयोजन अगस्त में किया जाता है. यह मैराथन दो भाग 111 किमी और 55 किमी में होती है. जब इसका किया गया था तो उस वक्त वहां तापमान -12 डिग्री सेल्सियस था. इसे देश की सबसे खतरनाक मैराथन कहा जाता है. पूरे देश से 19 प्रतिभाग हिस्सा लेने आए थे. लेकिन जब दौड़े तो 9 लोग बाहर हो गए. आईआईटी के साथ इस मैराथन में भी नाम कमाना था इसलिए इसमे हिस्सा लिया. एक खास बात यह कि इस दौरान पहाड़ों पर ऑक्सीजन का लेवल सामान्य से 50-60 प्रतिशत कम ही होता है.

इस खतरनाक रास्ते पर पूरी होती है अल्ट्रा मैराथन

राहुल भारद्वाज और अरुण तोमर ने बताया कि अल्ट्रा मैराथन का आयोजन लेह-लद्दाख की कंपनी आई रन स्पोर्टस की ओर से किया जाता है. जिस वक्त 111 और 55 किमी की मैराथ्न हो रही थी तो उस वक्त पहाड़ों पर बारिश और बर्फबारी हो रही थी. 55 किमी की मैराथन 3700 फीट की ऊंचाई पर स्थित शक्ति गांव से शुरु हुई थी और 5400 मीटर की ऊंचाई पर वारीला पास तक जाकर वापस शक्ति गांव आना था.

इसी तरह से 111 किमी की मैराथन को पूरा करने के लिए 10300 फीट की ऊंचाई पर नुब्रा वैली के सुमर से शुरुआत करनी थी. यह मैराथन 17700 फीट की ऊंचाई पर खारदूंग्ला पास से होकर लेह के शांति स्तूप पर जाकर समाप्त हुई. पथरीली पहाड़ियों पर बारिश और बर्फबारी सबसे ज्यादा परेशानी पैदा करती है.

फोटो- अल्ट्रा मैराथन को पूरा करने के लिए आईआईटी, कानपुर का यह छात्र राहुल लेह एरिया में दौड़ा.

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19.55 घंटे लगातार दौड़ा अरुण तोमर

राहुल ने बताया कि 111 किमी की मैराथन में अरुण तोमर ने हिस्सा लिया. अरुण ने इस मैराथन को पूरा करने के लिए 19 घंटे और 55 मिनट का वक्त लिया. वहीं 55 किमी की मैराथन को पूरा करने के लिए खुद राहुल ने 10 घंटे और 48 मिनट लिए. राहुल और अरुण के अलावा देशभर से आए 8 अन्य प्रतिभागी ही इस मैराथन को पूरा कर सके थे.

कौन हैं अल्ट्रा मैराथन जीतने वाले राहुल और अरुण

राहुल भारद्वाज फिजिक्स विषय में आईआईटी कर रहा है. वहीं अरुण तोमर एमटेक कर रहा है. राहुल जहां आगरा के एक गांव का रहने वाला है तो अरुण मेरठ का. पढ़ाई कर आईआईटी का मुकाम तो दोनों ने पा ही लिया था. लेकिन आईआईटी से बाहर भी वो कुछ कर दिखाना चाहते थे. स्कूल के समय से दोनों लोग खेलकूद में भी हिस्सा लेते रहे हैं. खासतौर से दौड़ में हिस्सा लेते थे. यह ही वजह थी कि अपने इस शौक को राहल और अरुण ने आगे भी जारी रखा और आज अल्ट्रा मैराथन जीतकर देशभर में अपना नाम रोशन किया है.

फाइल फोटो- दिखने में कुछ ऐसा है लेह का वो एरिया जहां मैराथन होती है.


अब यूरोप में 171 किमी की मैराथन का रखा लक्ष्य

राहुल और अरुण ने अब यूरोप में होने वाली आयरनमैन मैराथन की तैयारी शुरु कर दी है. अरुण ने बताया कि यूरोप में यूटीएमबी के नाम से अल्ट्रा मैराथन होती है. इस मैराथन में लगातार 171 किमी तक दौड़ना होता है. वहीं अरुण और राहुल गोवा में होने वाली हॉफ आयरनमैन ट्राईथालॉन में भी दौड़ेगें. इस मैराथन की खास बात यह है कि इसकी शुरुआत 4 किमी की स्वीमिंग से होती है. स्वीमिंग के बाद 180 किमी की साइकिलिंग करनी होगी. और साइकिलिंग करने के तुरंत बाद ही 42 किमी की दौड़ पूरी करनी होगी.

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First published: September 2, 2019, 12:41 PM IST
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