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यूपी की नई BJP सरकार में ओबीसी और एससी मंत्रियों का रहेगा दबदबा, राजनीतिक समीकरण दे रहे संकेत

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार दूसरी बार प्रदेश की सत्ता पर काबिज होंगे. (फाइल फोटो)

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार दूसरी बार प्रदेश की सत्ता पर काबिज होंगे. (फाइल फोटो)

निवर्तमान योगी सरकार के 22 कैबिनेट मंत्रियों की लिस्ट में एक दलित और पांच ओबीसी मंत्री थे. स्वतंत्र प्रभार के 8 राज्यमंत्रियों में से 1 दलित और 2 पिछड़ी जाति थे. राज्यमंत्रियों की सूची थोड़ी अलग थी. 27 राज्यमंत्रियों में से 7 दलित और 13 पिछड़ी जाति से थे. अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार के मंत्रिमंडल की सूरत बदली होगी, यानी पहले से ज्यादा ओबीसी और दलित मंत्री बनाए जा सकते हैं.

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश में बनने जा रही बीजेपी की नई सरकार (BJP Government in UP) में पिछड़े और दलित मंत्रियों की संख्या पहले से ज्यादा रहने की संभावना है. पिछली सरकार में तो कैबिनेट मंत्रियों (Yogi Cabinet) की फेहरिस्त में सिर्फ एक ही मंत्री दलित कोटे से थे, लेकिन इस बार अनुमान लगाया जा रहा है कि किसी दलित को डिप्टी सीएम तक बनाया जा सकता है. इसके अलावा भरपूर संख्या में दलित कोटे से मंत्री भी बनेंगे.

कयास ये भी लगाए जा रहे हैं कि पिछड़ी जाति के मंत्रियों की संख्या पिछले मंत्रिमंडल से ज्यादा रहेगी. ऐसा करके बीजेपी दो साल बाद होने वाले लोकसभा चुनाव के समीकरण को साधने की कोशिश करेगी. अब सवाल उठता है कि लोकसभा के चुनाव से इसका क्या ताल्लुक है. चुनाव से ऐन पहले ये थ्योरी चलायी गई थी कि बीजेपी ने 2017 के चुनाव में वोट तो पिछड़ी जाति के नाम पर लिया, लेकिन मुख्यमंत्री की कुर्सी सामान्य वर्ग को दे दी. यहां तक कि मंत्रिमंडल में भागीदारी को लेकर भी विपक्षी पिछड़ी जाति के नेताओं द्वारा सवाल खड़े किए जाते रहे हैं.

नई बीजेपी सरकार में इस बार पिछड़ी और दलित जातियों से ज्यादा मंत्री क्यों बनाए जा सकते हैं? इस सवाल का जवाब जानेंगे लेकिन आइये सबसे पहले जानते हैं कि इन समुदायों की पिछली योगी मंत्रिमंडल में कितनी संख्या थी.

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निवर्तमान योगी सरकार के 22 कैबिनेट मंत्रियों की लिस्ट में एक दलित और पांच ओबीसी मंत्री थे. स्वतंत्र प्रभार के 8 राज्यमंत्रियों में से 1 दलित और 2 पिछड़ी जाति थे. राज्यमंत्रियों की सूची थोड़ी अलग थी. 27 राज्यमंत्रियों में से 7 दलित और 13 पिछड़ी जाति से थे. अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार के मंत्रिमंडल की सूरत बदली होगी, यानी पहले से ज्यादा ओबीसी और दलित मंत्री बनाए जा सकते हैं.

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इसके कई कारण गिनाए जा सकते हैं. पहला तो यही कि बसपा के टूटते वोटबैंक को समेटने के लिए दलित मंत्रियों की फौज खड़ी करनी होगी. दलितों की संख्या 21 फीसदी के करीब है. मायावती को 13 फीसदी वोट मिले हैं. यानी 8 फीसदी अब तक टूट चुका है. बसपा के वोटबैंक में अभी और टूट होगी. ऐसे में उसे अपने पाले में करने के लिए दलित योद्धाओं को उतारना पड़ेगा.

प्रदेश में पिछड़ी जाति की संख्या 40 फीसदी के करीब मानी जाती है. इतनी बड़ी संख्या को समेटने के लिए खेल चलता रहता है. पिछड़ी जाति को लुभाने के लिए ही सूबे की सभी बड़ी पार्टियों ने अपना प्रदेश अध्यक्ष एक पिछड़े को ही बना रखा है. यहां तक की मायावती ने भी. जाहिर है इनके वोटबैंक की गोलबंदी के लिए इन्हें सत्ता में हिस्सेदारी देनी होगी. इस चुनाव में तो कई बड़े पिछड़े नेता बीजेपी से दूर हुए हैं. ऐसे में पार्टी के सामने और भी बड़ी चुनौती खड़ी है.

Tags: UP BJP, Up election 2022 result, Yogi adityanath

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