सिर्द्धाथनगर में बढ़ रही मानव तस्करी, इस साल पुलिस ने 37 लोगों को तस्करों से बचाया

सिर्द्धाथनगर में मानव तस्करी के मामले बढ़ रहे हैं.
सिर्द्धाथनगर में मानव तस्करी के मामले बढ़ रहे हैं.

सिर्द्धाथनगर (Siddharthnagar) से मानव तस्करी (Human Trafficking) कर नेपाल (Nepal) के सारे खाड़ी देशों में भेजा जाता है. पुलिस (Police) और एसएसबी (SSB) ने 2020 में तस्करी कर ले जाई जा रही 37 युवतियों को तस्करों को चंगुल से छुड़ाया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 12, 2020, 7:46 PM IST
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सिद्धार्थ नगर. नेपाल (Nepal) से तस्करी कर युवतियों (Human Trafficking) को दूसरे देश भेजने का मामला काफी पुराना है. भारत नेपाल (Indo-Nepal border) की खुली सीमा इसके लिए सबसे मुफीद साबित हो रही है. सिद्धार्थनगर जिले में भारत-नेपाल के बीच 68 किलोमीटर की खुली सीमा होने के कारण मानव तस्करों (Human Traffickers) का काम यहां पर काफी आसान हो जाता है.

जिले की पुलिस और एसएसबी (SSB) आने- जाने वाले रास्तों पर नजर रखे रहती है और हमेशा अलर्ट मोड़ में रहती है. फिर भी मानव तस्करी करने वाला गिरोह अपना काम करता रहता है. साल 2020 में अभी तक पुलिस और एसएसबी ने 37 लोगों को मानव तस्करों को चंगुल से छुड़ाया है.

एसएसबी और पुलिस के अलावा नेपाल के पहाड़ियों से युवतियों को काम दिलाने का झांसा, प्यार में फंसाकर, शादी करने का झांसा देकर, बहला-फुसलाकर खाड़ी देशों में पहुंचाया जाता है. पिछले कुछ दिनों में एसएसबी एवं सिद्धार्थनगर जिले की पुलिस ने भारतीय सीमा से नेपाली युवतियों को पकड़ा और उन्हें नेपाल पुलिस को सौंप दिया है. इस घटना ने नेपाल सीमा पर मानव तस्करी रोकने की लिए किए गये तमाम प्रयासों की पोल खोल दी है. पहले भी कई नेपाली युवतियां अवैध तरीके से सीमा पार करते पकड़ी गई हैं.



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नेपाल के सुदूर पहाड़ी क्षेत्रों में मानव तस्करों ने अपना नेटवर्क तैयार कर रखा है. यहां की जीवन शैली दुरुह है. आर्थिक तंगी से लोग जूझते रहते हैं, ऐसे में मानव तस्कर गिरोह के सदस्य नेपाली किशोरियों को नौकरी, बेहतर भविष्य और अच्छी नौकरी का झांसा देकर उन्हें देश के विभिन्न कोनों में पहुंचा देते हैं. जांच में पता चला है कि मानव तस्कर इन्हें ज्यादातर दिल्ली मुंबई और चंडीगढ़ पहुंचाते हैं.

जिले के मुख्य अलीगढ़वा तथा ककरहवा बॉर्डर मानव तस्करों के लिए मुफीद जगह माने जाते हैं. सीमावर्ती क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति इस तरह से कि उन्हें सीमा पार करने में बहुत परेशानी नहीं होती. सबसे ज्यादा मामले शोहरतगढ़ थाना क्षेत्र के भारत नेपाल सीमा के खुनवां बॉर्डर पर पकड़े गए हैं. सबसे अधिक खुली सीमा होने की वजह से खेतों के बीच में और पगडंडियों के सहारे भारतीय सीमा में अवैध तरीके से प्रवेश कर जाते हैं. यहां भारतीय एजेंट उनका इंतजार करते हैं और उन्हें देश के मेट्रो सिटीज (Metro Cities) में विभिन्न रास्तों से पहुंचा देते हैं.



2020 में अभी तक 37 लोगों को बचाया
एसएसबी 43 बटालियन ने वर्ष 2019 में मानव तस्करी के कुल 27 मामले पकड़े हैं, इनमें से 15 महिलाएं और 12 नाबालिक बच्चौं को मानव तस्करों के हाथों से बचाया गया है. वर्ष 2020 में अभी तक कुल 37 लोगों को मानव तस्करों के हाथों से बचाया है, उनमें से 22 महिलाएं और 15 नाबालिक बच्चे हैं.

एसएसबी के असिस्टेंट कमांडेंट मनोज कुमार ने बताया कि एसएसबी सीमा पर पूरी तरह से मुस्ताक है. मानव तस्करी के मामलों को गंभीरता से ले रही है सभी संदिग्धों पर नजर रखी जाती है कई मामले पकड़े गए हैं ऐसे में पीड़िता से प्राथमिक स्तर पर पूछताछ की जाती है. उसके बाद परिजनों को सूचित कर अधिकृत एजेंसी के माध्यम से उन्हें घर भेजा जाता है.
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