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    बाराबंकी के जैदपुर में बारूद से खेल रहे मासूम, प्रशासन कर रहा हादसे का इंतजार

    तिरपाल के नीचे पटाखे बनाने का काम करते बच्चे.
    तिरपाल के नीचे पटाखे बनाने का काम करते बच्चे.

    बाराबंकी (Barabanki) के जैदपुर के कारखानों में पटाखे (Fireworks) फोड़ने की उम्र में बच्चे पटाखे बनाने का काम करते हैं. इस दौरान थोड़ी सी भी चूक इनकी मौत (Death) का कारण बन सकती है.

    • News18Hindi
    • Last Updated: November 6, 2020, 10:22 PM IST
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    बाराबंकी. दिवाली (Diwali) के मौके पर पटाखे (Fireworks) फोड़ने का शौक अधिकांश बच्चों का होता है, लेकिन पटाखे फोड़ने की उम्र में बच्चे अगर बारूद से खेलने लगें तो उनका भविष्य कितना सुरक्षित है, इस बात का कोई भी आदमी आसानी से अंदाजा लगा सकता है. बाराबंकी में जैदपुर ऐसी जगह है, जहां पर बच्चे बारूद से खेलते हैं और पटाखे बनाते हैं. पटाखे बनाने और उनको रखने में अगर जरा सी चूक हो जाए तो उनकी जान भी जा सकती है.

    दिवाली के करीब आठ दिन बचे हैं, ऐसे में दुकानदारों ने अपनी दुकानों में पटाखों का स्टाक बढ़ाना शुरू कर दिया है. बाजार में पटाखों की मांग बढ़ गई है, ऐसे में बच्चों ने पटाखे बनाने शुरू कर दिये हैं. बाराबंकी के जैदपुर में दो साल पहले रामसनेहीघाट के धरौली में पटाखा बनाते समय हुए विस्फोट के बाद सभी लाइसेंस निलंबित कर दिए गए थे, जिसके बाद जांच-पड़ताल के बाद 22 लाइसेंस का नवीनीकरण किया था.

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    इनमें 12 लोगों के पास पटाखे बनाने और बेचने दोनों, जबकि बाकी के पास सिर्फ बेचने का ही लाइसेंस है, लेकिन फिर भी जिले में जैदपुर को पटाखों का गढ़ माना जाता है. यहां पर कई स्थानों पर अभी भी आबादी के बीच चोरी-छिपे पटाखे बनाए जाते हैं. इस गोरखधंधे में छोटे-छोटे बच्चे भी शामिल हैं. ऐसे में यदि जरा सी चिंगारी लगी तो जनपद में एक और बड़ा हादसा हो सकता है. यहां एक बात आपको और बता दें कि इनमें उसी परिवार के कई बच्चे शामिल हैं जो साल 1996 में पटाखा बनाते समय हादसे का शिकार हो गए थे. फिर भी ये लोग बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ करने से बाज नहीं आ रहे हैं. ऐसे में बड़ा सवाल पुलिस और प्रशासन पर भी खड़ा होता है कि क्या एक बार फिर किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है या फिर इस काम में भी सबकी सांठगांठ है.
    जैदपुर नगर पंचायत में सबसे ज्यादा आठ लाइसेंसी पटाखे की दुकान हैं. जैदपुर के चार लोगों के पास पटाखा बनाने और बेचने दोनों जबकि चार लोगों के पास सिर्फ बेचने का लाइसेंस है. आबादी से दो-दो किलोमीटर दूर पटाखा बनाने का गोदाम है, लेकिन यहां पटाखा बनाने वाले लोग इस काम में छोटे-छोटे मासूम बच्चे को लगा रखा है. ये लोग इन मासूम बच्चों की जिंदगी से खुलेआम खिलवाड़ कर रहे हैं.



    अब सवाल यही उठता है कि पटाखों के बनाने और इस क्षेत्र में बच्चों के काम करने की जानकारी स्थानीय पुलिस और प्रशासन को है या नहीं. सीधी सी बात है कि स्थानीय प्रशासन को इस बात की जानकारी होगी, लेकिन प्रशासन तभी कोई पहल इसमें करेगा जब कोई बड़ा हादसा होगा. वक्त रहते अगर प्रशासन कार्रवाई करता है तो आगे होने वाल हादसे को रोका जा सकता है.
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