मुन्ना बजरंगी हत्याकांड: साले का आरोप- सरकार में मौजूद सफेदपोश नेताओं के इशारे पर कराई गई हत्या

सत्यजीत सिंह ने बताया कि मुन्ना बजरंगी ने हत्या के दो दिन पहले ही अपने करीबी को जान का खतरा बताया था. उन्होंने कहा कि मुन्ना बजरंगी की हत्या कराने में केन्द्र व राज्य सरकार के बड़े नेताओ का हाथ है.

Manoj Kumar | News18 Uttar Pradesh
Updated: July 11, 2018, 4:34 PM IST
Manoj Kumar
Manoj Kumar | News18 Uttar Pradesh
Updated: July 11, 2018, 4:34 PM IST
मुन्ना बजरंगी की बागपत जेल में हत्या के मामले में उनके साले सत्यजीत सिंह ने आरोप लगाया है कि सफेदपोश नेताओं के इशारे पर शासन व प्रशासन की साजिश की तहत हत्या कराई गई है. उनका कहना है कि अगर सरकार सचेत होती तो आज माफिया डॉन जिंदा होता. उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की जांच पर भरोसा नहीं है. उन्होंने बजरंगी हत्याकांड की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है.

सत्यजीत सिंह ने बताया कि मुन्ना बजरंगी ने हत्या के दो दिन पहले ही अपने करीबी को जान का खतरा बताया था. उन्होंने कहा कि मुन्ना बजरंगी की हत्या कराने में केन्द्र व राज्य सरकार के बड़े नेताओ का हाथ है. सफेदपोश नेताओं के इशारे पर मुन्ना बजरंगी की जेल मे हत्या कराई गई. मुन्ना बजरंगी की पत्नी सीमा सिंह के भाई सत्यजीत सिंह ने माफिया डॉन के दाह-संस्कार के बाद जौनपुर में यह बयान दिया. उन्होंने कहा कि शासन-प्रशासन की मिलीभगत से एक साजिश की तहत झांसी से बागपत जेल लाया गया और उसकी हत्या कर दी गई.

उन्होंने कहा कि इस हत्याकांड के लिए पश्चिमी यूपी से पूर्वांचल तक एक सिंडिकेट बनाया गया. इस सिंडिकेट में बड़े सफेदपोश नेता शामिल थे. इन्हीं सफेदपोश नेताओं के इशारे पर शासन व प्रशासन ने हत्याकांड को अंजाम दिया. मेरा अपना मानना है कि इस की साजिश की धुरी प्रदीप सिंह हैं. प्रदीप सिंह के साथ वाराणसी से बीजेपी विधायक सुनील सिंह और जौनपुर से पूर्व सांसद धनंजय सिंह शामिल थे. इन्हीं की साजिश पर झांसी से बागपत जेल शिफ्ट किया गया. जबकि अगर कोई एक दिन की पेशी पर लाया जाता है तो, उसे पुलिस लाइन में ही रखा जाना चाहिए था. लेकिन ऐसा नहीं किया गया. मुन्ना बजरंगी जेल नहीं जाना चाहते थे. लेकिन उन्हें जबरन भेजा गया.

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गौरतलब है कि बागपत जिला जेल में 9 जुलाई की सुबह पूर्वांचल के माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की हत्या की जांच सीबीआई से करवाने वाली याचिका की सुनवाई बुधवार को हुई. हालांकि, इलाहाबाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने मुन्ना बजरंगी की वकील स्वाति सिंह की उस याचिका को तकनीकी आधार पर खारिज कर दिया है. कोर्ट ने नए सिरे से याचिका दाखिल करने की छूट दी है. जिसके बाद वकील स्वाति सिंह ने कहा है कि परिजन जल्द ही नई याचिका दाखिल करेंगे.

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दरअसल, 16 मई को मुन्ना बजरंगी की ओर से सुरक्षा की मांग को लेकर हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई थी. जिसकी सुनवाई 9 जुलाई को होनी थी. लेकिन उसी दिन सुबह जेल में उसकी हत्या कर दी गई. जिसके बाद मुन्ना बजरंगी वकील स्वाति अग्रवाल ने हाईकोर्ट में मेंशन कर अदालत को इसकी जानकारी दी. एडवोकेट स्वाति अग्रवाल ने कोर्ट से हत्या की इस घटना पर स्वतः संज्ञान लेने की मांग की. उन्होंने कहा कि जेल परिसर में असलहा कैसे पहुंचा, इसकी भी जांच जरूरी है. साथ ही कोर्ट से मुन्ना बजरंगी के परिजनों को क्षतिपूर्ति दिलाए जाने की भी मांग कोर्ट से की. अधिवक्ता स्वाति अग्रवाल ने मुन्ना बजरंगी की हत्या के मामले की सीबीआई जांच कराए जाने की भी कोर्ट से मांग की. जिसके बाद जस्टिस एसडी सिंह की एकलपीठ ने 11 जुलाई को सुनवाई की तारीख दी थी.
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