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जौनपुर लोकसभा क्षेत्रः दीन दयाल उपाध्याय नहीं जीत पाए थे ये सीट, मोदी काल में BJP कायम रखना चाहेगी दबदबा

सीट पर बीएसपी को 2009 के आम चुनाव में जीत दिलाने वाले बाहुबली नेता धनंजय सिंह ने 2014 का चुनाव निर्दलीय लड़ा था.
सीट पर बीएसपी को 2009 के आम चुनाव में जीत दिलाने वाले बाहुबली नेता धनंजय सिंह ने 2014 का चुनाव निर्दलीय लड़ा था.

सीट पर बीएसपी को 2009 के आम चुनाव में जीत दिलाने वाले बाहुबली नेता धनंजय सिंह ने 2014 का चुनाव निर्दलीय लड़ा था.

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भारतीय जनता पार्टी (BJP) उत्तर प्रदेश की जौनपुर सीट अब गंवाना नहीं चाहेगी. यहां से जनसंघ के संस्‍थापक पंडित दीन दयाल उपाध्याय भी चुनाव लड़ चुके हैं. लेकिन तब वे कांग्रेस की क्षेत्रीय नेता राजदेव सिंह से चुनाव हार गए थे. इसके बाद कई बार बीजेपी ने इस सीट को जीतकर यहां अपना परचम लहराया. लेकिन अपने पूज्य नेता को सच्ची श्रद्धांजलि देने के ‌लिए बीजेपी कभी भी इस सीट पर एक बार के बाद दोबारा सीट पर जीत दर्ज नहीं कर पाई.

1989 आम चुनाव में पहली बार बीजेपी इस सीट पर जीती. राजा यादवेंद्र दत्त ने यहां पहली बार कमल खिलाया. लेकिन अगले ही लोकसभा चुनाव में जनता दल के अर्जुन यादव ने उन्हें हरा दिया. इसी तरह 1996 में राज केसर ने फिर से इस सीट पर बीजेपी की वापसी कराई पर अगली बार सपा के पारस नाथ यादव ने हरा दिया. इसी तरह 1999 आम चुनाव में चिन्मयानंद एक बार फिर से इस सीट पर बीजेपी को वापस लेकर लेकिन 2004 में फिर से सपा के पारथनाथ यादव ने सीट कब्जा ली.

भाजपा प्रत्याशी कृष्‍ण प्रताप सिंह




इसके बाद बीएसपी के बाहुबली नेता धनंजय सिंह ने 2009 में यह सीट सपा से छीनी तो 2014 आम चुनाव में मोदी लहर के चलते कृष्‍ण प्रताप सिंह ने बीएसपी से ये सीट छीन ली. अब बीजेपी के सामने चुनौती इस इतिहास को बदलने की है कि वह दोबारा इस सीट को नहीं जीत सकती. बीजेपी इस सीट को लेकर इसलिए भी अधिक संवेदनशील है कि यहां से जनसंघ संस्‍थापक चुनाव लड़ चुके हैं.
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जौनपुर लोकसभा चुनाव 2019 के प्रत्याशी
बीजेपी ने इस सीट पर पूर्व की भांति एक बार फिर से अपने पिछले बार चुनाव जीत चुके उम्मीदवार कृष्ण प्रताप सिंह को लेकर ही मैदान में उतरी है. जबकि पिछले बार अपने-अपने प्रत्याशी लेकर उतरने वाली सपा-बसपा इस बार गठबंधन में अपने दोनों ही पिछले उम्मीदवारों से तौबा कर ली है और यहां नए प्रत्याशी के तौर पर श्याम सिंह यादव को अपना उम्मीदवार बनाया है. कांग्रेस भी इस सीट पर किस्मत आजमा रही है. यहां देवव्रत मिश्र उसके उम्मीदवा हैं. मुख्य लड़ाई इन्हीं तीनों में बताई जा रही है. जौनपुर में छठे चरण में आगामी 12 मई को मतदान होगा.

सपा उम्मीदवार श्याम सिंह यादव


जौनपुर लोकसभा चुनाव 2014 परिणाम
इतिहास में पहली बार यूपी की इस सीट पर बीएसपी को 2009 के आम चुनाव में जीत दिलाने वाले बाहुबली नेता धनंजय सिंह ने 2014 का चुनाव निर्दलीय लड़ा था. उन्हें कुल 64137 वोट मिले थे. दूसरे नंबर पर बहुजन समाज पार्टी के सुभाष पांडेय को 220839 वोट मिले थे. इस मतलब साफ है पिछले चुनाव में बीएसपी के वोट बंट गए थे. जबकि समाजवादी पार्टी के इस सीट को दो बार पहले ही जीत चुके उम्मीदवार पारसनाथ यादव को 180003 वोट मिले थे. वे तीसरे स्‍थान पर रहे थे. इस बार धनंजय सिंह मैदान में नहीं हैं और समाजवादी पार्टी व बहुजन समाज पार्टी एक साथ हैं, जिससे दोनों के वोट मिला देने पर एक नंबर आए कृष्‍ण प्रताप सिंह के 367149 वोटों से ज्यादा हो जाती है.

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हालांकि इस बार धनंजय सिंह निषाद पार्टी के साथ हैं. जबकि निषाद पार्टी इस बार एनडीए का हिस्सा है. इसका सीधा मतलब ये है कि धनंजय सिंह बीजेपी उम्मीदवार को फायदा पहुंचाएंगे.

कांग्रेस उम्मीदवार देवव्रत मिश्रा


जौनपुर लोकसभा का समीकरण
पिछले आम चुनाव के आंकडों के अनुसार जौनपुर लोकसभा क्षेत्र में ब्राह्मण वोटर दो लाख 43 हजार 810 हैं. जबकि क्षत्रिय एक लाख 91 हजार 184 वोटर हैं. क्षेत्र में मुस्लिम वोटर दो लाख 21 हजार 254 हैं. वहीं यादव वोटों की संख्या दो लाख 25 हजार 110 है. इसी तरह क्षेत्र में प्रमुख वोटर अनुसूचित जाति की संख्या भी दो लाख 31 हजार 970 है.

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