जौनपुर: सपने में पिता की मृत्यु देखकर बेटे को 30 साल बाद आई घर की याद, जानिए क्या है पूरा मामला

जौनपुर: 30 साल बाद घर लौटा कृष्ण चंद तिवारी अपने माता-पिता के साथ

जौनपुर: 30 साल बाद घर लौटा कृष्ण चंद तिवारी अपने माता-पिता के साथ

Jaunpur News: एक रात कृष्ण चन्द सपने में अपने पिता की मृत्यु देखता है और बेचैन हो उठता है. दिल्ली में पड़ोस के मित्र रवि सिंह से सारी बात बताने के बाद कृष्ण चन्द पिता की सुध लेने के लिए उससे कहता है तो...

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मनोज सिंह पटेल

जौनपुर. 30 वर्षों के लम्बे अन्तराल के बाद जब मां-बाप से बिछड़ा उसका आंखो का तारा बेटा मिला तो दोनों को जैसे खुद पर ही यकीन नहीं हो रहा था. उत्तर प्रदेश में जौनपुर (Jaunpur) के विकास खण्ड खुटहन स्थित पट्टीनरेन्द्रपुर गांव की ये घटना है. दरअसल मामला 11 नवम्बर, 1991 का है, जब गांव के मोहन प्रसाद तिवारी (जर्मनी) का 16 वर्षीय पुत्र कृष्ण चन्द तिवारी (गुड्डू) किसी बात को लेकर घर से नाराज होकर कहीं चला गया था.

इकलौते पुत्र के घर से नाराज होकर कहीं चले जाने से माता पिता परेशान हो गए थे. उस समय जर्मनी तिवारी की पट्टीनरेन्द्रपुर बाजार में रेडियो-टेप रिकार्डर मरम्मत करने की दुकान थी, बचपन से ही विनम्र स्वभाव का गुड्डू भी पढाई करने के साथ ही पिता के काम में हाथ बटाता था. पुत्र के घर छोड़कर चले जाने से माता-पिता पूरी तरह से टूट गये. कई वर्षों तक बेटे की तलाश करते रहे. मन्दिरों पर मत्था टेका, साधू-सन्त के अलावा पण्डितों और तान्त्रिकों के यहां भी फरियाद लेकर गये. लेकिन चारों तरफ निराशा ही हाथ आयी. समय बीतने के साथ हीं माता-पिता की आस भी टूट गयी.

दिल्ली में बनाया आाशियाना, बसाया घर
इधर कृष्ण चन्द घर से निकलकर किसी तरह दिल्ली शहर पहुंच गया और मेहनत मजदूरी करके अपना पेट पालने लगा. दिल्ली में ही आशियाना बनाने का ख्वाब लिए वह जीवन से संघर्ष करते हुए कामयाबी हासिल कर ली. अपना निजी मकान तथा खुद का व्यापार चल पड़ा. शादी भी वहीं कर ली. तीन बच्चों का पिता भी बन गया.

सपने में पिता की मृत्यु देख हुआ बेचैन

लेकिन भाग्य को कौन टाल सकता है. एक रात कृष्ण चन्द स्वप्न में पिता की मृत्यु देखता है और बेचैन हो उठता है. दिल्ली स्थित पड़ोस के मित्र रवि सिंह से सारी बात बताने के बाद कृष्ण चन्द पिता की सुध लेने के लिए उससे कहता है तो उसका मित्र वीर सिंह खुटहन निवासी अपने रिश्तेदार सन्टू सिंह को पट्टीनरेन्द्रपुर भेजकर परिजनों को सारी जानकारी देता है. बेटे की खबर मिलते ही बूढे माता-पिता खुशी से झूम उठते हैं. दूसरे दिन पड़ोस के लोग कार से दिल्ली गये और कृष्ण चन्द तिवारी को घर ले आए. तीस वर्षों से बिछड़े बेटे को देखते हीं मां कृष्णावती और पिता जर्मनी की आंखो से खुशी के आंसू छलक पड़े. भारी संख्या में मौजूद स्थानीय लोगों की आंखें सजल हो उठीं.



माता-पिता अपने पुत्र को कलेजे से लगाकर मानों तीस वर्षों के प्रेम को समेट रहे हों. इस दौरान राम लवट तिवारी, डा.गया प्रसाद अग्रहरि, पवन तिवारी, राणा शिवेन्द्र सिंह, जब्बार हाशमी, कृष्णा तिवारी, सन्तोष अग्रहरि आदि मौजूद रहे.
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