प्रधानमंत्री सम्मान निधि योजना में किसानों को मिले रुपए हुए वापस, जाने क्या है मामला

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि

5000 से अधिक किसानों के खाते से रूपये आटोमैटिक वापस हो गए है. किसान बैंक जाकर जब अपने खाते का विवरण ले रहे है. तो उन्हें इस बात का पता चल रहा है. जिले में कोई ऐसी बैंक की शाखाएं नहीं है, जहां से कुछ न कुछ किसानों के खाते से पैसे वापस नहीं न हुए हों.

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    जौनपुर में तहसील अफसरों की लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है.  लापरवाही में गलत डाटा फीडिंग और सत्यापन के चलते किसानों को सम्मान निधि योजना के तहत मिले रुपए वापस हो गए हैं. जिसके चलते किसानों में मायूसी छा गई है. अफसरों की लापरवाही के चलते सरकार की काफी किरकिरी हो रही है. आखिर किसानों को मिले रुपए वापस कैसे हो गए, यह एक बड़ा प्रश्न है.

    गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बीते 24 फरवरी को गोरखपुर से किसान सम्मान निधि योजना का शुभारंभ किया था. जिससे पूरे प्रदेश में लगभग 75 हजार किसानों को लाभ हुआ था और उनके खाते में पहली किश्त के रूप में दो-दो हजार रुपए केंद्र सरकार ने डीबीटी के माध्यम से भेजा था.

    जांच के बाद एक लाख 35 हजार किसान ही पात्र 

    दरअसल दो हेक्टेयर जोत वाले किसानों की संख्या की गणना में लगभग 6 लाख 35 हजार 852 बताई गई थी. आधार कार्ड, खतौनी और बैंक पासबुक के आधार पर राजस्व विभाग के कर्मचारियों ने जांच के बाद तीन लाख 50 हजार किसानों की आनलाइन फीडिंग कर दिया गया, लेकिन जांच में अभी तक एक लाख 35 हजार किसान ही पात्र पाए गए हैं.

    5 हजार किसानों के रुपए वापस

    सूत्रों की मानें तो 5000 से अधिक किसानों के खाते से रुपये वापस हो गए हैं. किसान बैंक जाकर जब अपने खाते का विवरण ले रहे है, तब उन्हें इस बात का पता चल रहा है कि जिले में कोई ऐसी बैंक की शाखाएं नहीं है, जहां से कुछ न कुछ किसानों के खाते से पैसे वापस नहीं न हुए हों. वापसी के मैसेज आने के बाद लोग भागकर बैंकों में आ रहे हैं, लेकिन बैंक कर्मचारी कुछ भी बताने से इंकार कर रहे हैं.

    किसानों ने कहा रुपए जाने की वजह साफ नहीं

    वहीं किसान रामा शंकर ने कहा है कि उन्होंने जब सुना कि उनके खाते में पैसा आया है तो बहुत खुशी हुए लेकिन बाद में पता चला कि पैसा वापस चला गया है तो दुख हुआ. किसान विजय बहादुर का कहना है कि ऐसा कहा जा रहा है कि पैसा वापस आएगा ही नहीं. संयुक्त खाते में तो पैसा आ भी नहीं रहा है. उनका मानना है कि पैसा आना हो आए न आना हो तो न आए लेकिन यह चुनावी मुद्दा न बने. जबकि महिला किसान निर्माला देवी का कहना है कि पैसा आ कर पता नहीं क्यों वापस चला जा रहा है. जब इस विषय पर मैनेजर से बात किया गया तो वह इसको स्पष्ट नहीं कर पार रहे हैं.

    अधिकारियों ने कहा वापस आएंगे रुपए

    जिलाधिकारी अरविंद मलप्पा बंगारी ने कहा कि पात्रों के नाम में डिजिटल अन्तर के चलते रुपये वापस चले गये हैं. इस विषय पर मुख्यालय से जानकारी लेकर डिजिटल को सुधार कर किसानों के खातों में जल्द ही सेकेण्ड फेज मे रुपये वापस भेजे जायेंगें. जबकि उप कृषि निदेशक जय प्रकाश ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधी योजना द्वारा डाटा सत्यापन के बाद नाम मैच नहीं होने के चलते वापस चला गया. यह लापरवाही लेखपाल औऱ तहसील लेवल के अफसरों के स्तर से किये जाने की बात सामने आई है. (रिपोर्ट-मनोज सिंह पटेल)

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