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Lockdown में बुंदेलखंड के किसानों से बैंकों ने कर्ज लौटाने को कहा, अन्यथा होगी कार्रवाई

बुंदेलखंड के किसानों को बैंकों ने कर्ज लौटाने को कहा है.

बुंदेलखंड के किसानों को बैंकों ने कर्ज लौटाने को कहा है.

देश मे बुंदेलखंड की स्थिति किसी से छिपी नहीं है. कुछ वर्षों पूर्व पड़े भयावह सूखे से अभी यह क्षेत्र ठीक से उबर ही नहीं पाया था कि एक बार फिर से बैंक संस्थाओं ने किसानों को आंसू बहाने के लिए मजबूर कर दिया है.

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ललितपुर. कोरोना वायरस (Coronavirus) के खतरे को देखते हुए पूरे देश मे लॉकडाउन (Lockdown) घोषित कर दिया गया है. स्कूल, कॉलेज, सरकारी, गैर सरकारी कार्यालयों को बंद कर दिया गया है. जनता से लगातार अपने घरों में रहने की अपील की जा रही है. सरकार किसान, गरीब और मजदूर वर्ग की हरसंभव मदद कर रही है. हालांकि इन विपरीत हालातों में बुंदेलखंड में बैंक संस्थाएं कर्ज वसूली के लिए किसानों पर दबाव बना रही हैं. यही नहीं ललितपुर जिले के कई गांवों में वाकायदा किसानों को नोटिस भेजकर चेतावनी दी गई है कि यदि वह जल्द ही बैंक से लिये कर्ज की अदायगी नहीं करते है, तो उनके खिलाफ कठोर कार्यवाही अमल में लाई जाएगी. अफसोस की बात यह है कि यह सब लॉकडाउन की दौरान किया जा रहा है. जाहिर सी बात है कि इसके चलते किसान और उनके परिवार बेहद परेशान हो रहे हैं.

बैंक नोटिस के बाद किसानों की चिंता बढ़ी

देश मे बुंदेलखंड की स्थिति किसी से छिपी नहीं है. कुछ वर्षों पूर्व पड़े भयावह सूखे से अभी यह क्षेत्र ठीक से उबर ही नहीं पाया था कि एक बार फिर से बैंक संस्थाओं ने किसानों को आंसू बहाने के लिए मजबूर कर दिया है. सारा देश जब कोरोना वायरस से जंग लड़ रहा है, तब बैंक से मिले नोटिस उनकी चिंता बढ़ा रहे हैं.

यह जानकारी मिली है कि जिले के मैलवारा कलां और मैलवारा खुर्द समेत कई गांवों में प्रथमा सर्व यूपी बैंक ने किसानों को नोटिस जारी किए गए हैं कि वह जल्द से जल्द अपने केसीसी (किसान कृषि कार्ड) पर लिए गए लोन की अदायगी करें. अन्यथा, कर्ज नहीं लौटाने की स्थिति में उनके खिलाफ कठोर कार्यवाही की जाएगी.

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जिले के मैलवारा कलां और मैलवारा खुर्द समेत कई गांवों में प्रथमा सर्व यूपी बैंक ने किसानों को नोटिस जारी किए गए हैं.


न फसल की कटाई हुई, ना फसल की बिक्री हो पाएगी

नोटिस मिलने के बाद से किसानों की हालत खराब हो रही है. एक तरफ तो अभी चना, मटर, मसूर और गेहूं की फसल की न तो कटाई ही हुई है, और न ही लॉकडाउन के कारण वह अपनी फसल की उपज बेच सकते हैं. अब वह इस स्थिति में बैंक से लिये कर्ज की भरपाई कैसे करेंगे, किसानों को यही चिंता खाये जा रही है.

पिछले साल अतिवृष्टि से खराब हो गई थी फसल

कुछ किसानों का कहना है कि पिछले वर्ष अति वर्षा की वजह से फसलें बर्बाद हो गई थीं. इस साल फसल अच्छी हुई, लेकिन लॉकडाउन के कारण न तो वह उसकी कटाई कर पा रहे है और न ही बेच पा रहे हैं. इस स्थिति में बैंक की कर्ज अदायगी हो पाना काफी मुश्किल है. वहीं कुछ किसानों का कहना यह भी है कि एक तरफ तो सरकार लॉकडाउन को देखते हुए किसानों के हित में तमाम घोषणाएं कर रही है, तो वहीं बुंदेलखंड का किसान दोहरी मार झेलने को मजबूर है.

कई वर्षों से प्राकृतिक आपदा का शिकार हो रहा है बुंदेलखंड

गौरतलब हो कि विगत कई वर्षों से दैवीय आपदाओं का शिकार बुन्देलखण्ड के किसान बैंक, सेठ, साहूकारों से कर्ज लेकर खेती, बाड़ी करने को मजबूर है। इस मामले को लेकर हमने अधिकारियों से भी बात करने की कोशिश की, लेकिन वह कुछ कहने से बचते नजर आए.

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