झांसी में सामने आया खून के नाम पर भ्रष्टाचार, गरीबों के नाम पर गोरखधंधा
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झांसी में सामने आया खून के नाम पर भ्रष्टाचार, गरीबों के नाम पर गोरखधंधा
कोरोना वायरस के संक्रमण के डर से लोग ब्लड डोनेट करने से कतरा रहे हैं.

इस पूरे मामले मेडिकल कॉलेज के एनएसएस इंचार्ज डॉ प्रभाकर का कहना है कि एनएसएस द्वारा एकत्रित किया गया रक्त सिर्फ सरकारी अस्पताल में ही दिया जा सकता है. किसी निजी अस्पताल में या ब्लड बैंक में नहीं.

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झांसी. बुंदेलखंड में भ्रष्टाचार को लेकर कई बड़े मामले सामने आ चुके है. जिसको लेकर सड़क से लेकर संसद तक में आवाज उठी. लेकिन ताजा मामला झांसी में सामने आया है, जहां गरीबों के खून (Blood) के नाम पर जमकर भ्रष्टाचार हुआ. दरअसल 28 फरवरी को शासन स्तर से युवा और श्रम मंत्रालय के तत्वाधान में राष्ट्रीय सेवा योजना के तहत रक्त दान शिविर लगाया गया था. इस रक्त दान शिविर में 60 यूनिट ब्लड इकट्ठा किया गया था. रक्तदान शिविर के नाम पर लिया गया रक्त भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया.

नेशनल सेवा योजना के तहत इकट्ठा किये गए 60 यूनिट खून को मेडिकल कालेज या फिर जिला अस्पताल में रखा जाना था. जिसको एनएसएस के कोआर्डिनेटर ने सरकारी अस्पतालों में न रखवा कर खून को प्राइवेट ब्लड बैंक सेंटर में भेज दिया. जिस खून को गरीब जनता की सहुलियत के लिए शासन इकट्ठा करवाता है. उसी खून को प्राइवेट संस्थान के हवाले कर दिया गया.

रक्त दान शिविर
रक्त दान शिविर




इस पूरे मामले मेडिकल कॉलेज के एनएसएस इंचार्ज डॉ प्रभाकर का कहना है कि एनएसएस द्वारा एकत्रित किया गया रक्त सिर्फ सरकारी अस्पताल में ही दिया जा सकता है. किसी निजी अस्पताल में या ब्लड बैंक में नहीं. आपको बता दे कि एनएसएस यानी राष्ट्रीय सेवा योजना जो कि युवा मंत्रालय और श्रम मंत्रालय द्वारा संचालित होता है. जिसके द्वारा बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में रक्तदान शिविर लगाया गया था.



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First published: March 1, 2020, 9:44 AM IST
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