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COVID19 : महज दस दिन में बुंदेलखंड में कोरोना वायरस से संक्रमितों की संख्या 50 पार

नए मामलों में से 20 गढ़वा से हैं और एक-एक मामला कोडरमा और रांची से है. (सांकेतिक तस्वीर)

नए मामलों में से 20 गढ़वा से हैं और एक-एक मामला कोडरमा और रांची से है. (सांकेतिक तस्वीर)

झांसी, जालौन, बांदा, महोबा, चित्रकूट, हमीरपुर और ललितपुर जिले से निकलने वाले मजदूरों को स्थानीय लोगों ने खाना खिलाया, पानी दिया, फल बाटें. इसी वजह से बुंदेलखंड के लोग कोरोना संक्रमण की चपेट में आ गए.

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झांसी. कोरोना वायरस (Coronavirus) के कारण हुए लॉकडाउन (Lockdown) के 32 दिन तक पूरे बुंदेलखंड (Bundelkhand) में कोरोना दस्तक नहीं दे पाया. इसके बाद जालौन जनपद में पहला मामला कोरोना पॉजिटिव का आया. जिसमें एक डॉक्टर के कोरोना संक्रमित होने से बुंदेलखंड में कोरोना ने दस्तक दी. महज 10 दिन के अंतराल में अंतराल में कोरोना संक्रमित केसों की संख्या 50 के पार कर गई. बुंदेलखंड के चार जनपदो में कोरोना वायरस के देखते ही देखते 51 मामलों ने स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा दिया. कोविड 19 के झांसी (Jhansi) में 18, बांदा (Banda) में 21, जालौन (Jalaun) में 10 और महोबा (mahoba) में सामने आए 2 मामलों ने बुंदेलखंड में सनसनी फैला दी. महज दस दिनों से भी कम समय में बुंदेलखंड में कोरोना वायरस के 51 मामलों के पीछे कई वजहें सामने आईं. कोरोना संकट के मद्देनजर देशव्यापी लॉकडाउन के बीच महाराष्ट्र, पंजाब, दक्षिण भारत में फंसे यूपी के लाखों प्रवासी मजदूरों में कोरोना वायरस का ऐसा खौफ बैठ गया, जिसने प्रवासी मजदूरों, कामगारों, छात्रों और अन्य वर्ग के लाखों लोगों को यूपी जाने के लिए मजबूर कर दिया. मजदूर वाहनों में छिपकर अपने घर लौट रहे हैं. ये मजदूर कई स्टेट पार करके झांसी तक पहुंच रहे हैं. वे रास्ते में कई बार पुलिस चेकिंग का सामना करते हुए यूपी-एमपी बॉर्डर तक पहुंच गए. इतना लंबा सफर तय करने के बाद जब वे यूपी बॉर्डर पर पहुंचे तो जनपद पुलिस ने उन्हें लौटा दिया गया.

रात के अंधेरे में घुस रहे हैं यूपी की सीमा में

यूपी का झांसी ऐसा जनपद है जिसकी 3 सीमाएं मध्य प्रदेश से मिलती हैं. यहां हर रोज दूसरे राज्यों से पलायन करके हजारों मजदूर वाहनों में छिपकर पहुंच रहे हैं. इन प्रवासी मजदूरों का पलायन पुलिस प्रशासन के लिए परेशानी का सबब बनता जा रहा है. पुलिस लगातार इनके वाहनों को बॉर्डर से वापस कर रही है. वापस होने के बाद मजदूर खेतों में छिपकर बैठ जाते हैं और रात होने का इंतजार करते हैं. जैसे ही रात होती है, ये आसपास के खेतों से होते हुए यूपी की सीमा में प्रवेश कर जाते हैं. इसके बाद जिला प्रशासन को इन्हें क्वारंटाइन करना पड़ता है.

सोशल डिस्टेंसिंग का नहीं हो पा रहा पालन

प्रवासी मजदूर कंटेनर, ट्रक, मैजिक, लोडर गाड़ी और बाइक से अपने घरों के लिए वापस आ रहे हैं. गाड़ियों में वे अधिक संख्या में बैठ रहे हैं और उन्हें छिपाने के लिए ऊपर से तिरपाल या किसी अन्य वस्तु से ढंक दिया जाता है. जिसके चलते सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो पा रहा है और इतनी गर्मी में इस तरह से सफर करना उनके स्वास्थ्य के लिए घातक हो सकता है.

मजदूर बोले नहीं मिल रहा था खाना

सिद्धार्थनगर के रहने वाले रामकृपाल मुंबई में दैनिक मजदूरी करने गए थे. आपबीती सुनाते हुए कहते हैं कि वहां हमें भूखा रहना पड़ रहा था. हमने लॉकडाउन से पहले जो थोड़ा बहुत रुपया कमाया था, उसी से सामान खरीदकर अपना पेट भरते थे. हम वहां बहुत परेशान थे. इसके बाद हमें अपने गांव की एक गाड़ी मिल गई. हम सब ने मिलकर इसमें डीजल डलवाया और अपने गांव के लिए निकल आए. रामकृपाल का कहना है कि महाराष्ट्र से लेकर मध्य प्रदेश तक पुलिस ने हमें देखा और आगे जाने दिया. वही सिद्धार्थनगर के ही रहने वाले इमरान और उसके तमाम साथी अपनी बाइक से 5 दिन का सफर करके यूपी बॉर्डर पर पहुंचे. कई मजदूर अपने परिवार के साथ सफर पूरा कर रहे हैं. उनके साथ छोटे-छोटे बच्चे भी इस परेशानी का सामना कर रहे हैं.

मदद करने वाले आए कोरोना की चपेट में

यूपी-एमपी बॉर्डर पर जिला प्रशासन ने कड़ा पहरा बैठा रखा है. जनपद पुलिस, पीएससी, एनसीसी, एरियल सर्विस के अलावा एक जॉइंट आईएएस निगरानी कर रहे हैं. वही बुंदेलखंड में कोरोना की जबरदस्त दस्तक के मामले में जानकारों की माने तो पूरे बुंदेलखंड में कोई भी केस बाहरी नही है. तकरीबन सभी मामले जिलों से जुड़े है. इसको लेकर अनुमान लगाया जा रहा है कि बुंदेलखंड से निकलने वाले लाखों की तादात में प्रवासी मजदूरों, कामगारों, अन्य वर्ग के लोगों के उमड़े हुजूम के चलते कोरोना का संक्रमण बुंदेलखंड में फैला. झांसी, जालौन, बांदा, महोबा, चित्रकूट, हमीरपुर और ललितपुर जिले से निकलने वाले मजदूरों को स्थानीय लोगों ने खाना खिलाया, पानी दिया, फल बाटें. इसी वजह से बुंदेलखंड के लोग कोरोना संक्रमण की चपेट में आ गए. वही प्रशासनिक अफसर भी अचानक बढ़े कोरोना संक्रमण के मामलों से हैरान है. झांसी में एक कोरोना पॉजिटिव की मौत भी हो गई.

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