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Explainer:-किसानों के लिए खुशखबरी,झांसी में फिलहाल टला खाद संकट

झांसी और बुंदेलखंड में खाद की समस्या झेल रहे किसानों के लिए खुशखबरी है.कुछ हफ्ते तक पहले जहां झांसी और आस पास के इलाके ...अधिक पढ़ें

    झांसी और बुंदेलखंड में खाद की समस्या झेल रहे किसानों के लिए खुशखबरी है.कुछ हफ्ते तक पहले जहां झांसी और आस पास के इलाके में लंबी कतारें लगी हुई थी, तो वहीं दूसरी और आंदोलन भी चल रहे थे. विपक्षी पार्टियां लगातार सरकार को इस मुद्दे पर घेर रही थीं. 4 किसानों की मृत्यु हो जाने के बाद कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी भी इस मामले में किसानों का साथ देने ललितपुर और झांसी पहुंची थी.लेकिन, अब फिलहाल के लिए खाद का संकट टल चुका है. झांसी में कुल 4000 मेट्रिक टन स्टॉक में उपलब्ध हो गया है.पहली खेप में जहां 2500 टन प्राप्त हुई तो वहीं दूसरी खेप में भी पर्याप्त खाद जनपद को मिल चुकी है.

    अधिकतर फसलों की हो चुकी है बुवाई
    जिले में खाद संकट कम होने का एक कारण यह भी है कि अधिकांश किसानों की मटर, चना आदि दलहनी फसलों की बुवाई हो चुकी है.अब केवल गेहूं की बुवाई होनी बाकी है.जिले में 3,40,509 हेक्टेयर में रबी फसलों की बुवाई होती है.इसमें से करीब आधी जमीन असिंचित है.इस बार पानी भी बहुत कम बरसा है, जिससे जमीन में नमी बहुत कम थी.पिछले दिनों हुई बारिश के कारण खेतों में नमी हो जाने से किसानों ने बिना पलेवा किए ही मटर, चना, मसूर और सरसों की बुवाई शुरू कर दी थी.रबी सीजन में सर्वाधिक 154068 हेक्टेयर में गेहूं बोया जाता है. तिलहनी फसलों में सर्वाधिक राई/ सरसों की बुवाई दस हजार हेक्टेयर, अलसी लगभग 1300 हेक्टेयर, तोरिया 12 सौ से अधिक हेक्टेयर और दलहनी फसलों में सर्वाधिक मटर 85518 हेक्टेयर, चना साठ हजार से अधिक हेक्टेयर में और मसूर लगभग 18 हजार हेक्टेयर में बोने का लक्ष्य था. बुवाई लगभग पूरी हो गई है.अब किसान गेहूं की बुवाई करेंगे और गेहूं की बुवाई नवंबर में पूरी होगी.

    किसानों ने शुरू कर दिया है भंडारण
    लेकिन एक बार खाद के लिए परेशान हो चुके किसान अब कोई भी परेशानी उठाना नहीं चाहते और इसीलिए उन्होंने खाद का भंडारण शुरू कर दिया है. जैसे की कहा जाता है कि दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंक कर पीता है और इसीलिए किसान पर्याप्त मात्रा में खाद का भंडारण कर लेना चाहते हैं ताकि उन्हें आगे कोई असुविधा का सामना न करना पड़े.
    (रिर्पोट – शाश्वत सिंह)

    Tags: Farmer Protest

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