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यूपी के इन 5 गांवों ने किया चुनाव बहिष्कार, कहा- पानी नहीं तो वोट नहीं

पानी की किल्लत के चलते उत्तर प्रदेश के 5 गांवों का चुनाव बहिष्कार करने का फैसला
(प्रतीकात्मक तस्वीर)

पानी की किल्लत के चलते उत्तर प्रदेश के 5 गांवों का चुनाव बहिष्कार करने का फैसला (प्रतीकात्मक तस्वीर)

ललितपुर जिला, झांसी-ललितपुर सीट के तहत आता है, जहां आज यानी 29 अप्रैल को वोटिंग चल रहा है. बुंदेलखंड क्षेत्र के तहत आने वाला इलाका अक्सर सूखाग्रस्त रहता है.

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    उत्तर प्रदेश के झांसी-ललितपुर निर्वाचन क्षेत्र के पांच गांव के वोटरों ने अप्रैल 29 को हो रही वोटिंग का बहिष्कार किया है. पानी की किल्लत झेल रहे इन गांव के लोगों ने साफ़ कह दिया है कि वोट तभी मिलगा जब पानी मिल जाएगा.

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    लोगों की शिकायत है कि प्रशासन इस इलाके में मौजूद पानी के तमाम स्रोतों और इलाके के बांधों का सही से इस्तेमाल नहीं कर पाई हैं, जिससे इस जिले के पांच गांवों को साल दर साल भीषण पानी की किल्लत झेलनी पड़ती है. इस कारण कई परिवारों का यहां से आसपास के शहरों में पलायन भी हो चुका है.

    महेंद्र सिंह नाम के एक निवासी का कहना है, 'झांसी-ललितपुर निर्वाचन क्षेत्र में पड़ने वाले ललाउन, गुलेंदा, चकरा, कासा और राजपुर गांव के वोटरों ने अप्रैल 29 को हो रही वोटिंग का बहिष्कार करने का फैसला किया है.' इन पांच गांवों में करीब 5 हज़ार वोटर हैं. सिंह के मुताबिक अक्सर इन गांववालों को हैंड पंपों से एक बालटी पानी भरने के लिए रातभर जागना पड़ता है.

    ललितपुर जिला, झांसी-ललितपुर सीट के तहत आता है जहां आज यानी 29 अप्रैल को वोटिंग चल रहा है. बुंदेलखंड क्षेत्र के तहत आने वाला इलाका अक्सर सूखाग्रस्त रहता है. यहां की ज़मीन पत्थरीली होने के कारण ज़मीन में पानी का स्तर काफी कम है, जिससे भूजल का पुनर्भरण संभव नहीं हो पाता.

    उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के तहत चार संसदीय सीटें हैं, जिसमें झांसी-ललितपुर और 19 विधानसभा क्षेत्र पड़ते हैं. इस समय इन सभी सीटों पर बीजेपी का कब्ज़ा है. इसे विडंबना ही कहेंगे कि ललितपुर जिले से होकर गुज़रने वाली सात नदियों के पानी का उपयोग करने के लिए 13 बांध मौजूद हैं.

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    सरकार की ओर से 4 एकड़ ज़मीन दिए जाने के चलते इन गांवों में साहारिया आदिवासियों की बड़ी संख्या है. एक तरफ ये क्षेत्र पत्थरीला है, वहीं बाकी क्षेत्र में भी पानी की किल्लत के कारण ज़मीन का उपयोग कम ही हो पाता है जिससे इस समुदाय के लोगों का पलायन जारी है.

    जल संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाली स्वैच्छिक संस्था परमार्थ के शिव गोपाल का कहना है कि आसपास के जलस्रोतों के रिसाव से नमी पैदा होती है जिससे गर्मी के मौसम में रात के वक्त पानी का स्तर कुछ बढ़ जाता है. महिलाएं रात को पानी भरने के लिए कतारों में खड़ी होती हैं. शिव गोपाल मानते हैं कि  खराब प्लानिंग और योजनाओं के सही तरीके से कार्यान्वयन नहीं होने के चलते ये हालात पैदा हुए हैं. उनके मुताबिक इलाके में मौजूद जल स्रोतों और बांध के पानी का रुख उस इलाके में मौजूद पावर प्लाट की ओर मोड़ा जा रहा है. किसानों के हित नज़रअंदाज़ किए जाते हैं.

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    बता दें कि सोमवार को चौथे चरण में 9 राज्यों के 71 सीटों के लिए वोटिंग जारी है. उनमें बिहार की 5, जम्मू-कश्मीर की 1, झारखंड की 3, मध्य प्रदेश की 6, महाराष्ट्र की 17, ओडिशा की 6, राजस्थान की 13, उत्तर प्रदेश की 13 और पश्चिम बंगाल की 8 सीटें शामिल हैं. लोकसभा की 71 सीटों के लिए कुल 943 कैंडिडेट मैदान में हैं.

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