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वीरांगना लक्ष्मीबाई की झांसी में राजनीतिक रूप से उपेक्षित रहीं हैं महिलाएं 

वीरांगना लक्ष्मीबाई की झांसी में राजनीतिक रूप से उपेक्षित रहीं हैं महिलाएं 

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झांसी शहर जो कि वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई की कर्मभूमि था और महिला सशक्तिकरण का सबसे पुराना केंद्र है,उसी झांसी में महिलाएं राजनीत?

    झांसी शहर जो कि वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई की कर्मभूमि था और महिला सशक्तिकरण का सबसे पुराना केंद्र है,उसी झांसी में महिलाएं राजनीतिक रूप से उपेक्षित रहीं हैं.जी हां झांसी में आजादी के बाद से अब तक हुए विधानसभा चुनावों में सिर्फ 28 महिलाओं ने ही चुनाव लड़ा है.इसके कई कारण रहे.एक तरफ जहां राजनीतिक पार्टियों ने महिलाओं पर कम दांव लगाए तो वही जनता ने भी उन्हें वोट देने में कंजूसी की.बात अगर राजनीतिक पार्टियों की करें तो सबसे ज्यादा कांग्रेस ने ही महिलाओं को टिकट दिए.इसके बाद समाजवादी पार्टी ने दो बार और भारतीय जनता पार्टी में एक बार महिला प्रत्याशी को चुनाव लड़ने का मौका दिया.

    इन महिलाओं को मिला था टिकट
    जनसंघ ने 1962 में सरोज कुमारी को झांसी से टिकट दिया था,लेकिन वह तीसरे नंबर पर रहीं.1969 में भारतीय क्रांति दल ने फूला देवी तथा बबीना से मजदूर परिषद ने सरस्वती देवी को मैदान में उतारा था, दोनों को हार का सामना करना पड़ा.1974 में नेशनल कांग्रेस आर्गेनाइजेशन ने झांसी से सूर्यमुखी को प्रत्याशी बनाया था,लेकिन वह जीत नहीं पाई. 1977 में जनसंघ ने सूर्यमुखी को झांसी से फिर मौका दिया, इस बार उन्होंने जीत हासिल की.1980 में जनता पार्टी सेक्यूलर ने खेमकुमारी को प्रत्याशी बनाया लेकिन वह जीत हासिल नहीं कर सकीं.

    1991 से 2007 तक किसी महिला ने नहीं जीता चुनाव
    1991 में पांच महिलाएं चुनावी मैदान में उतरी थीं लेकिन किसी को भी जीत का स्वाद चखने को नहीं मिला.1993 में लक्ष्मी देवी राजपूत को गरौठा से टिकट मिला.1996 में बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा ने निर्मला को टिकट दिया. 2002 में कलावती शारदा श्रीवास और सविता सोलंकी मैदान में उतरी. 2007 में भाजपा से सरोज अग्निहोत्री और अपना दल से रेखा पटेल ने चुनाव लड़ा. इन सभी चुनावों में कोई भी जीत हासिल नहीं कर सका.

    आखिरी बार रश्मि आर्य ने हासिल की जीत
    आखरी बार 2012 में समाजवादी पार्टी ने मऊरानीपुर से रश्मि आर्य को प्रत्याशी बनाया था.उन्होंने जीत भी हासिल की.उनके अलावा खड़ी हुई सभी महिला प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा था.2017 में भी 5 महिला प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा लेकिन जीत हासिल नहीं कर सकीं.

    (रिपोर्ट – शाश्वत सिंह
    )

    Tags: Uttar Pradesh Assembly Elections

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