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झांसी में नगर कीर्तन के साथ शुरू हुए गुरू नानक जयंती के कार्यक्रम,बच्चों के रण कौशल से सभी हुए निहाल

झांसी में नगर कीर्तन के साथ शुरू हुए गुरू नानक जयंती के कार्यक्रम,बच्चों के रण कौशल से सभी हुए निहाल

झांसी

झांसी में शुरू हुए गुरुनानक जयंती के कार्यक्रम, निकाला गया नगर कीर्तन

झांसी में गुरुनानक पर्व के कार्यक्रम शुरू हो चुके हैं.इसकी शुरुआत एक नगर कीर्तन के माध्यम से की गई. इस नगर कीर्तन का आयोजन गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा सीपरी बाजार झांसी, श्री गुरु नानक दरबार झोकन बाग, श्री गुरु सिंह सभा नगरा बाजार झांसी, रामगढ़िया गुरुद्वारा नगरा झांसी संयुक्त रूप से आयोजित की गई.

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    झांसी में गुरुनानक पर्व के कार्यक्रम शुरू हो चुके हैं.इसकी शुरुआत एक नगर कीर्तन के माध्यम से की गई. इस नगर कीर्तन का आयोजन गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा सीपरी बाजार झांसी, श्री गुरु नानक दरबार झोकन बाग, श्री गुरु सिंह सभा नगरा बाजार झांसी, रामगढ़िया गुरुद्वारा नगरा झांसी संयुक्त रूप से आयोजित की गई. यह नगर कीर्तन गुरुद्वारा गुरु नानक दरबार झोकन बाग से प्रारंभ हुआ. इसमें निशान्ची, घुड़सवार सबसे आगे चल रहे थे पीछे श्री गुरु नानक खालसा खालसा इंटर कॉलेज के छात्र एवं बैंड मनमोहक अंदाज में शब्द कीर्तन गायन कर रहा थे.इसके पश्चात स्त्री सत्संग प्रभात फेरी जत्था शब्द कीर्तन गायन कर रहा था तथा गुरु ग्रंथ साहब जी महाराज की सवारी के समक्ष पंज प्यारे चल रहे थे.

    बच्चों ने दिखाया रण कौशल
    इस नगर कीर्तन में शामिल लोगों ने जिनमें अधिकतर बच्चे थे अपने रण कौशल भी दिखाए.रण कौशल द्वारा श्री गुरु नानक द्वारा दी गई युद्ध कौशल की विद्या के आधार पर सृजित किया गया था.इस कार्यक्रम में विभिन्न विभिन्न समय काल में अलग-अलग अस्त्र शस्त्रों से सुसज्जित होता रहा है. यहां 400 वर्ष पूर्व की ड्रेस कोड में जहां कटारे थी, कृपाण थी तो वहीं कालांतर में यह तोपों व बंदूके में बदल गई और अलग-अलग शस्त्रों से लैस होकर यह अपना प्रदर्शन करते रहते हैं.

    क्यों मनाई जाती है गुरुनानक जयंती
    कार्तिक मास की अमावस्या को दिवाली मनाई जाती है और उसके पंद्रह दिनों बाद यानी कि कार्तिक की पूर्णिमा के दिन गुरु नानक जयंती मनाई जाती है. सिख धर्म के पहले गुरु, गुरु नानक देव जी का जन्म 1469 ई. को हुआ था. गुरु नानक देव का जन्म भोई की तलवंडी जिसे राय भोई दी तलवंडी भी कहते हैं, स्थान पर हुआ था. हालांकि ये जगह अब पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में मौजूद ननकाना साहिब में है. गुरुनानक देव सिख समुदाय के पहले गुरु भी औैर इस धर्म के संस्थापक भी.उन्हें नानक देव, बाबा नानक और नानकशाह के नाम से भी जाना जाता है. उनकी शादी 16 साल की आयु में सुलक्खनी नाम की युवती से शादी हुई और उनके दो बेटे श्रीचंद और लखमीदास हुए. 1539 ई. में पाकिस्‍तान एरिया करतारपुर में उनकी मृत्यु हुई.

    (रिपोर्ट – शाश्वत सिंह)

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