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बुंदेलखंड के इस कस्बे से हुई थी होली परंपरा की शुरूआत

ETV UP/Uttarakhand
Updated: February 26, 2018, 1:03 PM IST

होली के त्योहार को लेकर यहां के लोगों का कहना है कि एरच कस्बा होली का जन्मदाता है. यहां होली के त्योहार को मनाने के लिए एक महीने पहले से ही तैयारियों का दौर शुरू हो जाता है.

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देश में होली का त्योहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है.ऐसे में होली के त्योहार पर  के झांसी जनपद का गौरवशाली इतिहास रहा है.झांसी को होली का जन्मस्थली कहा जाता है. झांसी मुख्यालय से तकरीबन 66 किलोमीटर की दूरी पर एक कस्बा है एरच.

कहा जाता है कि एरच कस्बा कभी राजा हिरयाकश्यप की राजधानी हुआ करता था. विष्णू भक्त प्रहलाद मारने के लिए एक बार राजा हिरणयकश्यप ने भक्त प्रहलाद को एरच के एक पहाड़ से नदी में फेंका था.

तभी से एरच कस्ब में ये पहाड़ और मंदिर आज भी लोगों के लिए होली के दिनों में आकर्षण का केंद्र बने रहते है. होली की परंपरा की शुरूआत बुंदेलखंड के इसी कस्बे से हुई थी. जो आज पूरे देश में रंगों के त्योहार के रूप में मनाई जाती है.

पहाड़ पर बना मंदिर होली के दिनों में पूजा पाठ और होली का केंद्र बन जाता है. होली के त्योहार को लेकर यहां के लोगों का कहना है कि एरच कस्बा होली का जन्मदाता है. यहां होली के त्योहार को मनाने के लिए एक महीने पहले से ही तैयारियों का दौर शुरू हो जाता है.

होली का फाग पूरे बुंदेलखंड में जाना जाता है. होली फाग में जवाबी कीर्तन करना लोगों के लिए बड़ा ही दिलचस्प होता है. पूरे बंदेलखंड में इस त्योहार को मनाने की अपनी परंपरा है. ऐसे में बुदेलखंड को होली जन्मदाता कहा जाना वाकई में गौरवशाली कर देने वाली बात है.

(अश्वनी की रिपोर्ट)

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First published: February 26, 2018, 12:19 PM IST
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