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Exclusive: युवा IAS आंद्रा वामसी के जज्बे और मैनेजमेंट से झांसी में अब तक नहीं घुस पाया कोरोनावायरस

Exclusive: युवा IAS आंद्रा वामसी के जज्बे और मैनेजमेंट से झांसी में अब तक नहीं घुस पाया कोरोनावायरस

झांसी के जिलाधिकारी आंद्रा वामसी अधिकारियों के साथ बैठक में

झांसी के जिलाधिकारी आंद्रा वामसी अधिकारियों के साथ बैठक में

हालांकि 25 अप्रैल को जालौन में पहला मामला सामने आने के बाद आसपास के सभी जिलों में अफसरों के कान खड़े हो गए हैं.

झांसी. जहां एक ओर उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के तकरीबन 60 जिले कोरोनावायरस (Coronavirus) की चपेट में हैं, ऐसे में बुंदेलखंड (Bundelkhand) का झांसी (Jhansi) जिला अभी तक इस वायरस से अछूता है. इसके पीछे युवा आईएएस (IAS) और जिलाधिकारी आंद्रा वामसी (DM Andra Wamsi) की रणनीति काफी कारगर रही है. हालांकि 25 अप्रैल को जालौन में पहला मामला सामने आने के बाद आसपास के सभी जिलों में अफसरों के कान खड़े हो गए हैं. मंडल का मुख्यालय झांसी है, ऐसे में अब और सतर्कता बरतने की जरुरत है. कोरोना की घुसपैठ को लेकर आगे की रणनीति और लॉकडाउन की समस्याओं से कैसे निजात पायी जाये, इसपर झांसी के जिलाधिकारी आंद्रा वामसी ने न्यूज़ 18 से खुलकर बात की.

Q. अभी तक झांसी में कोई भी कोराना का केस नहीं आया है. ऐसे में कौन से स्टेप लिये जा रहे हैं जिससे भविष्य में कोई और केस सामने न आ सके ?

जिलाधिकारी- हाउस टू हाउस मैपिंग कराने से इसमें बहुत मदद मिली. लगभग 20 लाख की जनसंख्या वाले झांसी जिले में 12 मार्च के बाद जो भी विदेश से आया और 23 मार्च के बाद जो भी देश के भीतर से झांसी में आया, उन सभी लोगों तक पहुंचा गया.

Q. ऐसे लोगों की पहचान कैसे की गयी और संदिग्धों की जांच कैसे की?

जिलाधिकारी- ये एक बड़ी चुनौती थी. नगर निगम, नगर पंचायत, सिविल डिफेंस, चौकीदार, लेखपाल, आंगनबाड़ी, आशा, एएनएम के जरिये इसे अंजाम दिया गया. घर घर जाकर ऐसे लोगों की पहचान की गयी. झांसी में बहुत टाउनशिप भी है और दो कैण्टोनमनेण्ट भी है. रेलवे का भी बड़ा जाल है. ऐसे में गांव से लेकर शहर और कस्बों तक लॉकडाउन के बाद बाहर से आये 21 हजार लोगों तक पहुंचा गया. इसमें से 62 लोग विदेश से आये मिले. इसके अलावा जो भी संदिग्घ मिले उनकी जांच की गयी. सर्विलांस पर ज्यादा फोकस किया गया. बॉर्डर जिला होने के कारण जो भी झांसी में आये उन्हें क्वारंटीन किया गया. क्वारंटीन शहर से बाहर होने के कारण भी लाभ मिला. जो भी बाहर से आया पहले उसे क्वारंटीन किया गया.

Q. आज की तारीख तक कितने लोगों का सर्विलांस किया जा चुका है?

जिलाधिकारी- देखिये बाहर से झांसी में आये 21 हजार लोगों की पहले ही पहचान कर ली गयी थी और उन्होंने 14 दिनों का क्वारंटीन पीरिय़ड भी खत्म कर लिया है. 62 विदेशियों को भी जांच पड़ताल के बाद छोड़ दिया गया था.

Q. केस नहीं आये तो इसका मतलब ये नहीं कि मामले सामने नहीं आयेंगे. ऐसे में ज्यादा से ज्यादा जांच के लिए क्या किया जा रहा है?

जिलाधिकारी- अब तक 700 से ज्यादा लोगों की जांच की जा चुकी है. बुन्देलखण्ड के साथ एक विशेष लाभ भी है. लॉकडाउन का पालन करने में प्रकृति भी यहां सहयोग करती है क्योंकि सुबह 11 से शाम पांच बजे तक तेज गर्मी के कारण वैसे ही लोग घरों में रहते हैं. जांच के लिए एक लैब पहले से चल रही थी. अब दूसरी लैब भी तैयार कर ली गयी है. संदेह के दायरे में आने वाले किसी भी व्यक्ति की तुरंत जांच की जाती है. हर रोज 120 से 150 तक जांचें की जा रही हैं.

Q. जमात का कोई केस झांसी में सामने आया कि नहीं?

जिलाधिकारी- तब्लीगी मरकज से तो जुड़ा कोई नहीं मिला है. लेकिन, 30 लोग टिहरी गढ़वाल और दिल्ली की तरफ से आये थे जिनकी जांच निगेटिव पायी गयी.

Q. झांसी में अभी तक कोई केस सामने नहीं आया है. ऐसे में लोग पहले से ज्यादा फ्रीडम की उम्मीद कर रहे होंगे?

जिलाधिकारी- ज्यादा आजादी देना उचित नहीं है. कोरोना वायरस को फैलने से पहले ही उसे नियंत्रित कर दिया गया है. अब यदि थोड़ी भी आजादी बढ़ायी जायेगी तो पिछली सारी मेहनत बेकार जायेगी. इसलिए सोशल डिस्टेंसिंग जारी रहेगी. बन्दी जारी रहेगी.

Q. भीड़ तो मण्डियों में हो जाती होगी तो उसे कैसे नियंत्रित किया जा रहा है ?

जिलाधिकारी- ये एक बड़ी संमस्या थी. मण्डी में भीड़ ज्यादा हो जाती थी इसीलिए सबके लिए अलग-अलग समय निर्धारित कर दिये गये. सब्जी मण्डी का विस्तार 60 जगहों पर कर दिया गया. एक ठेला दूसरे से 500 मीटर की दूरी पर लगा दिखायी देगा. किसानों से कहा गया है वे रात में अपना माल मण्डी में लायें.

Q. रबी फसलों का सीजन है. ऐसे में किसानों से खरीद कैसे हो रही है?

जिलाधिकारी- गांव के लोग जितने अनुशासित हैं, उतने कोई नहीं. उनको जैसे कहा जाता है करते हैं. गेहूं की खरीद के लिए टोकन सिस्टम जारी किया गया है. राशन की दुकानों पर भी लोग उचित दूरी का पालन कर रहे हैं.

Q. झांसी में कोई केस सामने नहीं आया है लेकिन, कल को यदि ऐसा हुआ तो इसकी क्या तैयारी है?

जिलाधिकारी- ईश्वर की कृपा से अभी तक ऐसा नहीं हुआ है. झांसी में रेलवे का संचालन बड़े पैमाने पर है. रेलवे के ऐसे सभी कर्मचारियों को आम जनता से कट ऑफ किया जा चुका है. भीड़भाड़ वाले इलाके पहले से ही चिन्हित हैं. इस बात का अभी भी ख्याल रखा जा रहा है कि बाहरी लोगों का झांसी की जनता से कोई सम्पर्क न होने पाये.

Q. झांसी एक इण्डस्ट्रियल हब भी है. ऐसे में काम और बचाव के बीच कैसे सामंजस्य बैठाया जा रहा है?

जिलाधिकारी- झांसी में 60 इण्डस्ट्रीज को छूट दी गयी है लेकिन, शर्त ये है कि कर्मचारी उस इलाके से बाहर नहीं जायेंगे. ठिक वैसे ही जैसे रेलवे और सेना के लिए अपने ही इलाके में रहने के आदेश हैं.

Q. तीन मई के बाद यदि लॉकडाउन खुलता है तो एकाएक होने वाली भीड़ को कैसे नियंत्रित करेंगे?

जिलाधिकारी- झांसी के लिए आउटर रिंग रोड एक बहुत बड़ा एडवांटेज है. ध्यान इतना ही रखना है कि शहर के अंदर कोई न घुसे. बाहर हाईवे पर जितने भी इंजीनियरिंग कॉलेज है वहां आने जाने वालों को जमा किया जा सकता है लेकिन, शहर के भीतर नहीं. शहर के अंदर भीड़ सिर्फ रोडवेज की वजह से आ सकती है.  इसके लिए शहर की सीमा पर ही बसों को रोका जायेगा.

Q. दूसरे राज्यों से आये लोगों से संक्रमण न फैले इसके लिए क्या किया जा रहा है?

जिलाधिकारी- देखिये झांसी में औद्यौगिक इकाईयों के होने के कारण पलायन कम है. ज्यादातर लोगों को यहीं जिले में रोजगार मिला हुआ है. सिर्फ 21 हजार लोग बाहर से आये जो गांवों में हैं. उनतक हम पहले ही पहुंच गये हैं. पलायन कम होने से समस्यायें भी कम हैं.

आंद्रा वामसी का परिचय

आंध्रप्रदेश के प्रकासम जिले के रहने वाले आंद्रा वामसी 2011 बेच के IAS हैं. 35 साल के इस IAS को जिलाधिकारी के तौर पर 22 फरवरी को झांसी भेजा गया था. इससे पहले वे कुशीनगर के जिलाधिकारी रह चुके हैं.

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Tags: Coronavirus, Coronavirus in India, Jhansi news

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