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झांसी:-जानिए कैसे बनी हिमांगी सखी विश्व की पहली किन्नर महामंडलेश्वर 

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महामंडलेश्वर हिमांगी सखी ने बताया कि उन्हें बचपन से ही भगवान कृष्ण के प्रति आकर्षण था.वह उनको अपना आराध्य मानती थीं.कृष्ण भक्ति की उनकी शुरुआत मुंबई के उनके घर के नजदीक बने इस्कॉन मंदिर से हुई.यहां उन्होंने भगवान कृष्ण के बारे में जाना.इसके बाद वह दिल्ली और वृंदावन गई

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    (रिपोर्ट – शाश्वत सिंह)

    झांसी:-भारत आस्था और धर्म का देश है.भागवत सुनना और सुनाना हमारी सनातन संस्कृति का हिस्सा रहा है.इसके सुनाने वाले कथा वाचक पूरी दुनिया में पूजे जाते हैं.पुरुष और महिला कथावाचक तो आपने कई देखे होंगे लेकिन किन्नर कथावाचक बहुत ही कम देखने को मिलती हैं.ऐसी ही एक किन्नर कथावाचक और भागवताचार्य हैं महामंडलेश्वर हिमांगी सखी.हिमांगी सखी विश्व की पहली किन्नर महामंडलेश्वर हैं.एक निजी कार्यक्रम में झांसी पहुंची महामंडलेश्वर हिमांगी सखी ने NEWS 18 LOCAL से खास बातचीत की.

    भगवान कृष्ण के प्रति था आकर्षण
    महामंडलेश्वर हिमांगी सखी ने बताया कि उन्हें बचपन से ही भगवान कृष्ण के प्रति आकर्षण था.वह उनको अपना आराध्य मानती थीं.कृष्ण भक्ति की उनकी शुरुआत मुंबई के उनके घर के नजदीक बने इस्कॉन मंदिर से हुई.यहां उन्होंने भगवान कृष्ण के बारे में जाना.इसके बाद वह दिल्ली और वृंदावन गईं.अपने प्रथम गुरु से भी उनकी मुलाकात वृंदावन में हुई थी.

    देश विदेश में करती हैं भागवत

    भागवत कथा सुनाने की उनकी शुरुआत मॉरीशस से हुई.उन्होंने वहां अंग्रेजी में भागवत सुनाई.इस्कॉन मंदिर समिति द्वारा उन्हें उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया और इसके बाद वह देश और विदेश में भागवत सुनाने के लिए जाती रहीं. स्पेन, बहरैन, सिंगापुर जैसे देशों के अलावा उन्होंने भारत के भी कई राज्यों में भागवत कथा का पाठ किया है.हिमांगी सखी को महामंडलेश्वर की उपाधि 2019 में दी गई थी.यह उपाधि उन्हें नेपाल के पशुपतिनाथ पीठ के द्वारा दी गई थी.प्रयागराज में हुए कुंभ के दौरान आचार्य महामंडलेश्वर गौरी शंकर महाराज ने उन्हें यह उपाधि दी थी.

    पांच भाषाओं में सुनाती हैं भागवत कथा
    महामंडलेश्वर हिमांगी सखी पांच भाषाओं में भागवत कथा सुनाती हैं.वह हिंदी, अंग्रेजी, पंजाबी, गुजराती तथा मराठी में भागवत कथा सुनाती हैं.उनका यह मानना है कि भागवत हर किसी को सुननी और समझनी चाहिए.भागवत सुनने की प्रक्रिया में भाषा बाधा ना बन सके इसलिए वह श्रोताओं की सुविधा अनुसार उनकी भाषा में ही भागवत सुनाती हैं.उन्होंने बताया कि उनके पिता गुजराती और मां पंजाबी थीं.महाराष्ट्र में उनका पालन पोषण हुआ.इसी कारण उन्हें पांचो भाषाएं आती हैं.

    झांसी में भागवत कथा करने की है इच्छा
    महामंडलेश्वर हिमांगी सखी ने कहा कि जल्द ही वह झांसी और बुंदेलखंड के लोगों के लिए भी भागवत कथा करेंगी.उन्होंने झांसी के समाजसेवी संदीप सरावगी को यह जिम्मेदारी सौंपी है कि वह इस भागवत सत्संग कार्यक्रम का आयोजन करें.उन्होंने कहा कि झांसी महारानी लक्ष्मी बाई जैसी वीरांगना की धरती है.बगल में लगे ओरछा में भगवान राम राजा के रूप में विराजमान हैं.इसलिए ऐसी पावन धरती पर भागवत करना उनका सौभाग्य है.

    किन्नर खुद को करें शिक्षित
    महामंडलेश्वर हिमांगी सखी ने किन्नर समुदाय के लोगों को संदेश देते हुए कहा कि वह पहले शिक्षा ग्रहण करें.शिक्षा से ही उन्हें समाज में सम्मान और पहचान मिलेगी.किन्नर खुद को आध्यात्मिक कार्यों में लगाएं तथा धर्म का प्रचार प्रसार करें.साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सरकार किन्नर समुदाय के लिए कई सकारात्मक कदम उठा रही है.किन्नरों को भी अब स्वावलंबी बनकर आगे बढ़ना चाहिए.

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