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जानिए आखिर क्यों झांसी की सदर सीट से ब्राह्मण प्रत्याशी के ही सिर क्यों सजता है जीत का सेहरा,19 में से 15 विधायक रह चुक?

जानिए आखिर क्यों झांसी की सदर सीट से ब्राह्मण प्रत्याशी के ही सिर क्यों सजता है जीत का सेहरा,19 में से 15 विधायक रह चुक?

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झांसी की सबसे प्रतिष्ठित सीट मानी जाने वाली सदर विधानसभा पर लंबे समय से ब्राह्मण प्रत्याशियों का दबदबा रहा है.ब्राह्मण वोट अधिक होने

    झांसी की सबसे प्रतिष्ठित सीट मानी जाने वाली सदर विधानसभा पर लंबे समय से ब्राह्मण प्रत्याशियों का दबदबा रहा है.ब्राह्मण वोट अधिक होने के चलते यहां पर अक्सर ब्राह्मण उम्मीदवार को ही विजय मिली है.पार्टी चाहे कोई भी रही हो या उम्मीदवार निर्दलीय का ही क्यों न रहा हो लेकिन ब्राह्मण उम्मीदवार को ही यहां की जनता ने आशीर्वाद देकर अपना नेता चुना है.1951 में पहली बार कांग्रेस पार्टी के आत्माराम गोविंद खैर ने झांसी विधानसभा का प्रतिनिधित्व किया था.उस समय झांसी की सदर विधानसभा सीट का नाम झांसी ईस्ट हुआ करता था.1957 में एक बार फिर कांग्रेस का जादू चला और आत्मा राम गोविंद खेर को ही विधायक चुना गया.1962 में निर्दलीय लखपत राम शर्मा विधायक चुने गए थे.लेकिन 1967 में कांग्रेस ने वापसी करते हुए जीत हासिल की.1974 में कांग्रेस के उम्मीदवार बाबूलाल तिवारी को विधायक चुना गया.1977 में जनता पार्टी की सूर्यमुखी शर्मा ने कांग्रेस के मेघराज कुशवाहा को हराया था.1980 में राजेन्द्र अग्निहोत्री ने भाजपा से जीत हासिल की थी.उसके बाद 1985 में कांग्रेस से ओपी रिछारिया जीत कर मंत्री बने थे.

    रविंद्र शुक्ल लगातार 4 बार हुए विजयी
    1989 में भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस को शिकस्त देते हुए फिर से बाजी मारी और रविंद्र शुक्ला जीते.जीत का क्रम जारी रखते हुए 1991 में फिर से रविंद्र शुक्ल विजयी हुए.1993 में तीसरी बार रविंद्र शुक्ला भारतीय जनता पार्टी का परचम लहराने में सफल रहे.रविंद्र शुक्ल ने बीजेपी की जीत का चौथी बार भी क्रम जारी रखा और 1996 में फिर से जीत हासिल की.इस बार उन्हें शिक्षा मंत्री भी बनाया गया था.2002 में राष्ट्रीय पार्टियों को मात देते हुए बहुजन समाज पार्टी से रमेश शर्मा ने जीत हासिल की और उन्होंने रविंद्र शुक्ला को हरा दिया.

    यह विधायक रहे अपवाद
    1969 में भारतीय क्रांति दल के जगमोहन वर्मा को यहां से विजय प्राप्त हुई. 2004 के उप चुनाव में प्रदीप जैन आदित्य ने कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में विजय प्राप्त की और बसपा के बृजकिशोर व्यास उर्फ भुल्लन महाराज को शिकस्त का सामना करना पड़ा. इसके बाद 2007 में हुए विधानसभा चुनाव में एक बार फिर प्रदीप जैन ने जीत दर्ज की और उनसे हारने वाले फिर रमेश शर्मा थे.जोकि बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार रहे. प्रदीप जैन 2009 तक विधायक रहे लेकिन 2009 में उन्हें लोकसभा उम्मीदवार बनाया गया और वह कांग्रेस से सांसद बन गए. जिसके चलते 2009 में फिर उपचुनाव हुआ.इस बार बीएसपी से कैलाश साहू ने बाजी मारी और अपने निकटतम प्रतिद्वंदी निर्दलीय उम्मीदवार बृजेंद्र व्यास उर्फ डमडम महाराज को शिकस्त दी.

    2012 से रवि शर्मा हैं विधायक
    उसके बाद 2012 भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार रवि शर्मा ने उस समय विजय हासिल की जब बुंदेलखंड की 19 विधानसभाओं में एकमात्र सीट भाजपा जीत सकी थी.हारने वाले बसपा के सीताराम कुशवाहा रहे. 2017 में भारतीय जनता पार्टी के रवि शर्मा ने जीत का अंतर कई गुना बढ़ा दिया और एक बार फिर बसपा के सीताराम कुशवाहा को करारी शिकस्त दी.इस प्रकार अब तक दोनों उपचुनाव को मिलाकर झांसी सदर विधानसभा सीट के लिए कुल 19 बार चुनाव हुए हैं. इनमें से 15 बार ब्राह्मण उम्मीदवारों को ही जीत मिली है.जबकि एक बार जगमोहन वर्मा,2 बार प्रदीप जैन आदित्य व एक बार कैलाश साहू जीते थे.2022 में सदर विधानसभा सीट की जनता किसको चुनती है.यह देखना दिलचस्प होगा.

    (रिपोर्ट – शाश्वत सिंह)

    Tags: Uttar Pradesh Assembly Elections, झांसी

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