कश्मीर में पालतू कुत्ते को बचाने में गई मेजर की जान, झांसी में अंतिम दर्शन को उमड़ा हुजूम
Jhansi News in Hindi

कश्मीर में पालतू कुत्ते को बचाने में गई मेजर की जान, झांसी में अंतिम दर्शन को उमड़ा हुजूम
झांसी में मेजर अंकित बुद्धराजा के अंतिम दर्शन को भारी भीड़ उमड़ी.

मेजर के अंतिम संस्कार में लोगो का हुजूम उमड़ पड़ा. जनप्रतिनिधियों से लेकर जिला प्रशासन के अधिकारी भी अंकित बुद्धराजा के अंतिम संस्कार में शामिल हुए.

  • Share this:
  • fb
  • twitter
  • linkedin
झांसी. कश्मीर (Kashmir) में पालतू कुत्ते की जान बचाने की खातिर अपनी जान गंवाने वाले मेजर अंकित बुद्धराजा (Major Ankit Budhiraja) की मां सुमन का एक मार्च को जन्मदिन था. वह अपनी मां को बड़ा उपहार देने की योजना बना रहे थे, लेकिन क्या पता था कि जन्मदिन के दिन मां को अपने जिगर के टुकड़े की मौत का समाचार सुनने को मिलेगा. मेजर अंकित का मंगलवार सुबह आठ बजे सैनिक सम्मान के साथ बिजौली मुक्तिधाम पर अंतिम संस्कार किया गया. मेजर के अंतिम संस्कार में लोगो का हुजूम उमड़ पड़ा. जनप्रतिनिधियों से लेकर जिला प्रशासन के अधिकारी भी अंकित बुद्धराजा के अंतिम संस्कार में शामिल हुए.

मेजर अंकित बीएचईएल से रिटायर अपने पिता विजय बुद्धराजा के साथ झांसी में प्रेम नगर थाना क्षेत्र स्थित राजगढ़ एल्डिको कॉलोनी के रहने वाले थे. वर्तमान में वह अपनी पत्नी और दो कुत्तों के साथ कश्मीर के गुलमर्ग में रह रहे थे. उत्तरी कश्मीर में बारामुला के गुलमर्ग में ऑफिसर हट में शनिवार मध्यरात्रि लगी आग में फंसे कुत्ते को बचाने के प्रयास में मेजर अंकित बुधराज की मौत हो गई. अंकित के दोस्त अवनीश ने बताया कि दो-तीन दिन पहले अंकित ने बताया था कि एक मार्च को उनकी मां का जन्मदिन है. मां को वह बड़ा उपहार देना चाहते हैं. इसकी वे योजना बना रहे थे लेकिन, होनी को कुछ और ही मंजूर था.

दोस्त ने बताया: बचपन से ही पशु-पक्षियों से था प्रेम
घटना की जानकारी होने पर दिन भर उनके घर लोगों का जमावड़ा बना रहा. लोग परिजनों को ढांढस बंधाते रहे. मां का रो-रो कर बुरा हाल रहा. आखिरी सांस तक पशुओं से प्रेम का रिश्ता निभाया. मेजर अंकित ने पशु-पक्षियों से बचपन से ही प्रेम था, जो जिंदगी की आखिरी सांस तक कायम रहा. अपने पालतू कुत्ते की जान बचाने की खातिर अपनी जान गंवाने वाले सेना के मेजर अंकित बुद्धराजा (32) के बचपन के दोस्त अवनीश कस्तवार ने बताया कि स्कूल के दिनों से ही अंकित को पशु-पक्षियों से विशेष लगाव था. गर्मी में पक्षियों के लिए पानी का इंतजाम करते थे, तो कुत्तों को बिस्किट खिलाना रोज का काम था. अक्सर अपना टिफिन भी गायों के हवाले कर देते थे.



इंटरमीडिएट के बाद वह सन् 2005 में सेना में भर्ती हो गए. लेकिन, यहां भी उनका पशु प्रेम कम नहीं हुआ. चार साल पहले उन्होंने दो कुत्ते पाले थे. कुत्तों को वह जान से ज्यादा चाहते थे. देर रात उनका पार्थिव शरीर झांसी लाया गया.



ये भी पढ़ें:

कोरोना वायरस फैलने की खबर से Noida में हड़कंप, स्कूल बंद, जानें पूरा मामला

फगुआ गीत गाकर पीएम मोदी से रिक्वेस्ट, न करें सोशल मीडिया छोड़ने का फैसला
First published: March 3, 2020, 12:25 PM IST
अगली ख़बर

फोटो

corona virus btn
corona virus btn
Loading