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लक्ष्मीबाई के जन्मदिन पर PM मोदी शुरू करेंगे जलसा पर्व की परंपरा, नगाड़ा-रमतूला से होगा स्वागत

लक्ष्मीबाई के जन्मदिन पर PM मोदी शुरू करेंगे जलसा पर्व की परंपरा, नगाड़ा-रमतूला से होगा स्वागत

झांसी में 19 नवम्बर को महारानी लक्ष्मीबाई का जन्मदिन मनाने की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं.

झांसी में 19 नवम्बर को महारानी लक्ष्मीबाई का जन्मदिन मनाने की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं.

Maharani Laxmibai birthday: झांसी में 19 नवम्बर को झांसी की महारानी लक्ष्मीबाई का जन्मदिन मनाने की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं. महारानी के जन्मदिन को जलसा पर्व के तौर पर मनाया जाएगा. इसे ऐतिहासिक रूप देने के लिये झांसी के किले के बाहर और आसपास युद्ध स्तर पर तैयारियां चल रही हैं. लक्ष्मीबाई के जन्मदिन को जलसा पर्व की नई परम्परा की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी करेंगे. इसके लिए किले पर पुरानी परम्पराओं की झांकियां भी लगाई जा रही हैं.

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झांसी. झांसी में 19 नवम्बर को झांसी की महारानी लक्ष्मीबाई (Maharani Laxmibai) का जन्मदिन मनाने की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं. महारानी के जन्मदिन (birthday) को जलसा पर्व (Jalsa festival )के तौर पर मनाया जाएगा. इसे ऐतिहासिक रूप देने के लिये झांसी के किले के बाहर और आसपास युद्ध स्तर पर तैयारियों का दौर जारी है.
झांसी की महारानी लक्ष्मीबाई के जन्मदिन पर जलसा पर्व की नई परम्परा की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी करेंगे. इसके लिए किले पर पुरानी परम्पराओं की झांकियां भी लगाई जा रही हैं.

रमतूला और नगाड़ा से होगा प्रधानमंत्री का किले में स्वागत
झांसी दौरे पर प्रधानमंत्री का स्वागत महारानी लक्ष्मीबाई के किले पर बुन्देलखण्ड की प्राचीन वाद्य परम्परा रणतुला उर्फ रमतूला और नगाड़ा से होगा. रमतूला की बड़ी आकर्षक झांकी ऐतिहासिक किले की मुख्य सड़क के पास लगाई जा रही है. रमतूले की भव्य झांकी को देखने के बाद ही प्रधानमंत्री किले के अंदर प्रवेश करेंगे. इस रमतूले और नगाड़े को लगाने के लिए दिन रात काम चल रहा है. प्रधानमंत्री के आगमन को लेकर लोगों में काफी उत्साह है और उनके आने की तैयारियों को लेकर जोरों शोरों से काम चल रहा है. वहीं प्रशासन व पुलिस महकमे के अधिकारी भी तैयारियों व सुरक्षा को लेकर योजनाएं बना रहे हैं.

किले के बाहर लगाया जा रहा बुंदेली परम्परा का गेट
पूरे जलसा पर्व को आकर्षक बनाया जा रहा है. बुंदेली परंपरा का गेट भी तैयार किया जा रहा है. किले के बाहर लगाई जा रही रमतूला और नगाड़े की झांकी को देखने के लिए लोगों की भीड़ किले के पास जुट रही है. रमतूला और नगाड़ा युद्ध की शुरुआत होने से लेकर युद्ध खत्म होने तक बजाया जाता रहा है. साथ ही वाद्य यंत्रों का इस्तेमाल मांगलिक कार्यों में भी किया जाता है. प्राचीन काल से चलती आ रही ये परंपरा आज भी कायम है.

Tags: Jalsa festival tradition, Jhansi news, Narendra Modi Jhansi tour, UP news

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