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झांसी में बना रघुनाथ राव का महल झेल रहा पुरातत्व विभाग की अनदेखी का दंश

झांसी में बना रघुनाथ राव का महल झेल रहा पुरातत्व विभाग की अनदेखी का दंश

रघुनाथ

रघुनाथ राव का महल

रघुनाथ राव का महल जहां कभी संगीत गूंजता था, हाथी-घोड़ों के रखरखाव के इंतजाम थे, सुंदर बावड़ी लोगों का मन मोहती थी, वह आज बदहाली का शिकार हो चला है. शहर के नई बस्ती में 18वीं शताब्दी में निर्मित हाथी खाना और रघुनाथ राव महल दुर्दशा के शिकार हो गया हैं.

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    झांसी में बने किले का इतिहास से तो हर कोई वाकिफ है और इसे संभालने, सजाने और सवारने की पूरी कोशिश की जाती रहती है. लेकिन, किले के आसपास भी ऐसे ऐतिहासिक महत्व के स्मारक हैं जो पुरातत्व विभाग की नजरअंदाजी का शिकार बने हुए हैं. ऐसी ही एक जगह है रघुनाथ राव का महल.यह महल जहां कभी संगीत गूंजता था, हाथी-घोड़ों के रखरखाव के इंतजाम थे, सुंदर बावड़ी लोगों का मन मोहती थी, वह आज बदहाली का शिकार हो चला है. शहर के नई बस्ती में 18वीं शताब्दी में निर्मित हाथी खाना और रघुनाथ राव महल दुर्दशा के शिकार हो गया हैं. 18वीं शताब्दी में बने हाथी खाना और रघुनाथ महल का अपना भी अलग महत्व हैै. विशाल क्षेत्र में फैले हाथीखाना में हाथियों और घोड़ों को रखा जाता था.साथ ही, यहां बने रघुनाथ महल में विशाल नाट्यशाला में रास रंग का संगम होता था.

    <b>फैला हुआ है अतिक्रमण</b>
    आज यह स्मारक बदहाली झेल रहा है.पुरातत्व विभाग के नियमों की माने तो किसी भी संरक्षित स्मारक के आसपास 200 मीटर तक कोई निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता.लेकिन आलम यह है कि महल की दीवारों के बगल में ही घर और बस्ती बना दी गई है और प्रशासन कुछ नहीं कर सका.पुरातत्व विभाग ने भी स्मारक को सहेजने के लिए तमाम प्रस्ताव तैयार किए, लेकिन आज तक इन पर कोई भी अमल नहीं हो सका है.

    <b>एक हिस्से में बना है पार्क, बाकी के लिए बन रही योजना</b>
    हालांकि फिलहाल स्मार्ट सिटी परियोजना के अंतर्गत इस महल के एक हिस्से में नगर निगम द्वारा एक पार्क का निर्माण कराया जा रहा है. इस पार्क के जल्द ही शुरू होने की संभावना है.पार्क में बच्चों के लिए झूले और बुजुर्गों के लिए बैठने की उचित व्यवस्था की जाएगी. इसके साथ ही इस पार्क में युवाओं को आकर्षित करने के लिए भी कई काम किए जा रहे हैं.लेकिन जब आप महल के दूसरे हिस्से में जाएंगे तो वहां अभी भी गंदगी पसरी हुई मिलेगी.कूड़े का अंबार, उसमें घूमते हुए आवारा पशु, शराब की टूटी बोतलें इस बात की साफ गवाही देती हैं कि अभी इस स्मारक में काम करने की बहुत आवश्यकता है.पुरातत्व विभाग के के अनुसार नगर निगम को दूसरे हिस्से की साफ सफाई और रखरखाव की जिम्मेदारी भी दे दी गई है जल्द ही काम शुरू हो जाने की संभावना है.

    (रिपोर्ट – शाश्वत सिंह)

    Tags: झांसी

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