बुंदेलखंड में बिन बरसे जा रहे हैं बादल, सूखे की आशंका से डरे किसान

बुंदेलखंड में पिछले कुछ वर्षों पूर्व आए भयानक सूखे के जख्म ठीक से भर भी नहीं पाए थे कि बारिश की कमी एक बार फिर से बैचेनी बढ़ा रही है. आंकड़े बताते हैं कि दस वर्षो के बाद इस बार बारिश सबसे कम हो रही है.

abhay shrimali | News18 Uttar Pradesh
Updated: August 2, 2018, 12:51 PM IST
बुंदेलखंड में बिन बरसे जा रहे हैं बादल, सूखे की आशंका से डरे किसान
कम बारिश की वजह से किसानों के लिए फसल बचाना भारी पड़ सकता है.
abhay shrimali | News18 Uttar Pradesh
Updated: August 2, 2018, 12:51 PM IST
'कारे मेघा, कारे मेघा पानी तो बरसाओ, बिजली की तलवार नहीं बूंदों के बाण चलाओ.' हिंदी फिल्म लगान के गीत की यह पक्तियां बुंदेलखंड पर खूब चरितार्थ हो रही हैं. यहां रोज बदरा छाते हैं और बिजली भी चमकती है, लेकिन कुछ ही पल में बारिश यहां से दूर चली जाती है. इन वजहों से बुंदेलखंड की धरती आज भी प्यासी बनी हुई है.

बुंदेलखंड में पिछले कुछ वर्षों पूर्व आए भयानक सूखे के जख्म ठीक से भर भी नहीं पाए थे कि बारिश की कमी एक बार फिर से बैचेनी बढ़ा रही है. आंकड़े बताते हैं कि दस वर्षो के बाद इस बार बारिश सबसे कम हो रही है. स्थिति यह है कि अभी तक दो घंटे भी ठीक से बारिश नहीं हुई है. नदी, तालाब और बांध सूखे पड़े हैं. हालांकि कुछ बांधों में पानी बढ़ा भी है, लेकिन यह मध्य प्रदेश में हुई बारिश का नतीजा है.

ललितपुर जिले में बारिश की कमी के चलते जल स्तर काफी नीचे है. यही कारण है कि शहर हो या गांव सभी जगह पेयजल संकट की स्थिति बनी हुई है. कुछ किसानों ने मौसम का रुख देखते हुए खेतों में उड़द की बुबाई कर दी थी, लेकिन दिन में चटक धूप और बारिश की कमी के कारण ऐसे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें दिख रही है. जुलाई माह में हुई हल्की बारिश में जो ताल-तलैया भरे थे, वह भी अब सूखने की कगार पर हैं. अगस्त के माह में मई, जून जैसी गर्मी पड़ रही है. यही कारण है कि लोग बारिश की उम्मीद में पूजन, अर्चन और तरह-तरह के तंत्र-मंत्र और टोने-टोटके करने में जुटे हैं.

न्यूज़ 18 की टीम ने खेतों पर पहुंचकर कुछ किसानों से बातचीत की. उन्होंने बताया कि किसानों और उनके परिवारों के सारे अरमान बारिश पर टिके हैं. बारिश अगर अच्छी हुई तो ठीक है और अगर ऐसा नहीं हुआ तो किसानों के समक्ष भुखमरी की समस्या आन खड़ी होगी. कुछ किसानों ने खेतों को बटिया (किराए) पर लेकर खेती की है, ऐसे किसान पूरी तरह से बर्बाद हो जाएंगे. बारिश न होने और दिन में चटक धूप खिलने से उड़द की फसल को भारी नुकसान बताया जा रहा है.

इस मामले को लेकर अपर जिलाधिकारी योगेंद्र बहादुर सिंह से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि जुलाई माह में पिछले वर्ष की तुलना में अधिक बारिश हुई है. अभी अगस्त माह भी शेष है. उम्मीद है कि मानसून बुंदेलखंड के लोगों को निराश नहीं करेगा. बहरहाल मौसम विभाग ने बुंदेलखंड में भारी बारिश की भविष्यवाणी की थी, लेकिन यह नेताओं के भाषण की तरह खोखली साबित हो रही है.
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