सपा के नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी को पड़ा हार्ट अटैक, मेदांता शिफ्ट

बताया जा रहा है कि राम गोविंद चौधरी एमपी में पार्टी के लिए चुनाव प्रचार करने जा रहे थे. इस दौरान शनिवार को झांसी में रात्रि विश्राम के लिये रुके थे. तबीयत बिगड़ने की सूचना मिलते ही सपाइयों में हड़कंप मचा हुआ है.

Ashwani Mishra | News18 Uttar Pradesh
Updated: November 11, 2018, 1:41 PM IST
सपा के नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी को पड़ा हार्ट अटैक, मेदांता शिफ्ट
नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी
Ashwani Mishra | News18 Uttar Pradesh
Updated: November 11, 2018, 1:41 PM IST
झांसी में रविवार को समाजवादी पार्टी के नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी को अचानक तबीयत बिगड़ गई. बताया जा रहा है कि उन्होंने सीने में तेज दर्द की शिकायत की. आनन फानन में उन्हें इलाज के लिए राम राजा अस्पताल में भर्ती कराया गया था. जहां से उन्हें गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में शिफ्ट किया गया है. बताया जा रहा है कि राम गोविंद चौधरी को मेजर हार्ट अटैक पड़ा हैं. दरअसल राम गोविंद चौधरी एमपी में पार्टी के लिए चुनाव प्रचार करने जा रहे थे. इस दौरान शनिवार को झांसी में रात्रि विश्राम के लिये रुके थे. तबीयत बिगड़ने की सूचना मिलते ही सपाइयों में हड़कंप मचा हुआ है. सपा के वरिष्ठ नेताओं का अस्पताल पहुंचने का सिलसिला शुरू हो चुका है.

कौन हैं राम गोविंद चौधरी 

राम गोविंद चौधरी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से की थी और पहली बार वह 1977 में चिलकहर विधानसभा सीट से जीतकर आए थे. इस बार वह बलिया के बंसदीह सीट से जीतकर आए हैं. जयप्रकाश नारायण और चंद्रशेखर के साथ इनके पास काम करने का अनुभव है. आपात काल में राम गोविंद चौधरी 1977 में जेल भी गए थे. 1977 में राम गोविंद चौधरी, राजेंद्र चौधरी और राजनाथ सिंह पहली बार चुनकर आए थे. राम गोविंद चौधरी को उनके बागी और अख्खड़ स्वभाव के लिए जाना जाता है, ऐसे में उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती है तीन चौथाई बहुमत वाली भाजपा के सामने मजबूत विपक्ष के नेता की भूमिका निभाना. ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि वह कैसे इतने बड़े बहुमत के सामने अपनी उपयोगिता साबित कर पाते हैं.

आईसीयू में भर्ती राम गोविंद चौधरी


जेपी आंदोलन में गए जेल 1971-72 में बलिया के मुरली मनोहर टाउन महाविद्यालय से पढ़ाई के दौरान वह महामंत्री चुने गए और इसके बाद वह अध्यक्ष भी बने. छात्र राजनीति के बाद उन्होंने जेपी आंदोलन में अपनी भूमिका दी और छात्रों के लिए वह इस आंदोलन में कूद गए. 1975 में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और 19 महीने तक उन्हें जेल में रहना पड़ा. चंद्रशेखर को ही वह अपना राजनीतिक गुरु भी मानते हैं.

2002 में थामा मुलायम सिंह का हाथ लेकिन 2002 में जब वह समाजवादी जनता पार्टी से विधायक चुने गए तो उन्होंने मुलायम सिंह का दामन थामा और उनके साथ लंबे समय तक अपनी सियासी पारी को आगे बढ़ाया. बांसडीह से भी वह तीन बार विधायक रहे.

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