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झांसी के खटीकयाने की महाकाली की महिमा है अपरम्पार,जहां आज भी चढ़ती है बकरों की बलि

झांसी के खटीकयाने की महाकाली की महिमा है अपरम्पार,जहां आज भी चढ़ती है बकरों की बलि

खटीकयाने

खटीकयाने की मां काली

झांसी के कोतवाली क्षेत्र के खटकियाना मोहल्ले में स्थापित महाकाली का मंदिर प्राचीन मंदिरों में से एक है. यहां देश के कई जगहों से भक्त माता के दर्शन के लिए आते हैं. इस मंदिर की स्थापना लगभग 350 से 400 वर्ष पहले हुई थी. मां काली के दरबार में आज भी बकरों की बलि चढ़ाने की प्रथा है. 

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    झांसी के कोतवाली क्षेत्र के खटकियाना मोहल्ले में स्थापित महाकाली का मंदिर प्राचीन मंदिरों में से एक है. यहां देश के कई जगहों से भक्त माता के दर्शन के लिए आते हैं. इस मंदिर की स्थापना लगभग 350 से 400 वर्ष पहले हुई थी. उस समय खटीक समाज के लोग यहां पर व्यापार के करने आते थे. उनमें से एक व्यक्ति को मां काली ने सपने में दर्शन दिए और मंदिर की स्थापना करने को कहा था. इस बात खटीक समाज के लोगों ने यहां मंदिर का निर्माण करवाया था. खटीक समाज के लोग यहां आज भी नवरात्रों में मां काली की प्रतिमा को पूरे 9 दिन के लिए स्थापित करते हैं. इन नौ दिनों में देवी के अलग-अलग प्रकार के श्रृंगार किए जाते हैं. सप्तमी यानी मां कालरात्रि के दिन एक भव्य आरती का आयोजन किया जाता है जिसमें लगभग 1लाख से अधिक लोग हिस्सा लेने आते हैं.

    800 से अधिक बकरों कि दी जाती है बलि
    नवरात्रि के आखिरी दिन मां काली के दरबार में आज भी बकरों की बलि चढ़ाने की प्रथा है. ऐसा कहा जाता है कि 800 से अधिक बलि चढ़ाने पर ही मां काली प्रसन्न होती हैं और मनोकामनाएं पूरी करती हैं.भक्त अपनी श्रद्धा और मन्नत अनुसार यहां बलि के लिए बकरे ले कर आते हैं. उनकी पूजा करने के बाद उन्हें मां काली को अर्पित कर दिया जाता है. बाद में इन्हें पका कर प्रसाद के रूप में वितरित कर दिया जाता है  मंदिर के मुख्य पुजारी यह बताते हैं इस बलि से मां काली प्रश्न होकर अपने भक्तों की मुरादे पूरी करती है.

    (रिपोर्ट – शाश्वत सिंह)

    Tags: झांसी

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