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फ्रिज के पानी को मात देता है इस गांव का मटका
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Updated: April 6, 2018, 11:19 PM IST

इस गांव में मटकों को बनाने वाले लोगों का कहना है कि इस गांव की मिट्टी के बने मटकें कभी चिटकते नहीं हैं. इस गांव की मिट्टी को वरदान मिला है. इन मटकों का पानी फ्रीज के पानी को टक्कर देता है.

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  • Last Updated: April 6, 2018, 11:19 PM IST
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बुंदेलखड में प्रचंड गर्मी लोगों के लिए परेशानी का सबसे बड़ा सबब बनती है. आसमान से सूरज जब आग उगलता है. ऐसे में लोगों को गर्मी से बचने के लिए ठंडे पानी का सहारा लेना पड़ता है. झांसी में मुख्यालय से सात किलोमीटर की दूरी पर स्थित है गांव कोछाभार. इस गांव को मटको वाले गांव के नाम से भी जाना जाता है.

इस गांव में मटकों को बनाने वाले लोगों का कहना है कि इस गांव की मिट्टी के बने मटकें कभी चिटकते नहीं हैं. इस गांव की मिट्टी को वरदान मिला है. इन मटकों का पानी फ्रिज के पानी को टक्कर देता है.

वहीं मटका बनाने वाले ग्रामीणों का ये भी कहना है कि पानी को ठंडा करने के संसाधन जैसे-जैसे बढ़ रहे है, मटकों का चलन कम होने लगा है. ऐसे में इस काम को करने वाले कारीगर आज परेशानी के दौर से गुजर रहे हैं. कभी एक ऐसा भी दौर था जब इस गांव के बने मटकों की डिमांड देश के कोने-कोने में थी. पर दूसरे मिट्टी के बर्तनों की तरफ आजकर लोग मटके का पानी से फ्रिज का पानी पीने लगे हैं.



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First published: April 6, 2018, 11:19 PM IST
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