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Loksabha Election 2019: कैराना के बारे में क्या ये खास बात जानते हैं आप?

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: April 18, 2019, 9:55 AM IST
Loksabha Election 2019: कैराना के बारे में क्या ये खास बात जानते हैं आप?
कभी कैराना में था संगीत का किराना घराना!

कैराना कस्बा कभी शास्त्रीय संगीत की खयाल गायकी का महत्‍वपूर्ण केंद्र रहा है. संगीत के इस घराने का पलायन हो चुका है

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  • Last Updated: April 18, 2019, 9:55 AM IST
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उत्तर प्रदेश की जिन आठ लोकसभा सीटों पर आज वोट डाले जा रहे हैं उनमें कैराना भी शामिल है, जो लंबे समय से राजनीति बहस का केंद्र बना हुआ है. कभी कथित तौर पर मुस्लिमों की वजह से हिंदुओं के पलायन को लेकर तो कभी पश्चिम में बीजेपी के विजय रथ पर विपक्ष की जीत को लेकर. जिस कैराना को आप धार्मिक आधार पर हुए पलायन के लिए जानते हैं वह शास्त्रीय संगीत की खयाल गायकी का महत्‍वपूर्ण केंद्र रहा है. साल 2016 में कैराना से तत्कालीन बीजेपी सांसद हुकुम सिंह ने हिंदुओं के पलायन का मुद्दा उठाया था.

लेकिन संगीत के किराना घराने के पलायन का मुद्दा किसी भी चुनाव में नहीं उठा. अब इससे जुड़ा कोई भी संगीतकार यहां नहीं रहता. कस्‍बे के लोग कहते हैं कि सुरीले आवाज के जन्‍मदाता कैराना की नकारात्‍मक छवि सिर्फ नेताओं की वजह से हुई है. यूपी के विधानसभा चुनाव से पहले न्‍यूज 18 हिंदी डॉटकॉम ने इस घराने की एक आवाज उस्ताद मश्कूर अली खां से बात की थी, जो कोलकाता में रहते हैं. (ये भी पढ़ें: क्या अहीर रेजीमेंट के जरिए सपा से खिसकते यादव वोट बैंक बचा रहे हैं अखिलेश? )

kairana2     कैराना कस्बा (file photo)


जब हमने बातचीत की तो मश्कूर अली खां ने कहा, "यह सुनकर दुख होता है कि नेताओं ने इसे विख्‍यात करने की जगह कुख्‍यात बना दिया. यहां तो हिंदू-मुस्‍लिम साथ रहते हैं." घराने के लोग यहां से दूसरी जगह क्‍यों चले गए?, इस सवाल के जवाब में वह कहते हैं कि "कैराना में गाने-बजाने का माहौल नहीं था इसलिए हमारा पूरा परिवार कैराना से चला गया. मैं कभी-कभी आता रहता हूं यहां, जैसी इस कस्‍बे की छवि बनाई गई है वैसा कुछ नहीं है. कैराना छोड़कर जो लोग जा रहे हैं उनमें से अधिकांश लोगों की वजह रोजगार है."

यूपी के शामली जिले के इस कस्‍बे के लोग शास्‍त्रीय संगीत के घराने के संस्‍थापक उस्ताद अब्दुल करीम खान  (1872-1937) और उनके परिजनों को समझ नहीं पाए और पूरा घराना पलायन कर पश्‍चिम बंगाल चला गया. मश्कूर अली खां कहते हैं कि किराना घराना ने न सिर्फ भीमसेन जोशी बल्कि गंगूबाई हंगल, सवाई गंधर्व, सुरेश बाबू माने, रोशन आरा बेगम, बेगम अख्‍तर और हीराबाई बादोडकर जैसे बड़े शास्त्रीय संगीतकार दिए हैं. मोहम्‍मद रफी ने इसी घराने के गायक अब्‍दुल वहीद खान से गायकी सीखी थी.

bhimsen joshi rafi         किराना घराना ने दिए जो फनकार!
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कैराना घराने और यहां के सियासतदानों पर ‘अलमास-ए-कैराना’ नामक किताब लिखने वाले रियासत अली ‘ताबिश’ कैरानवीं कहते हैं कि इस कस्‍बे ने हमेशा मोहब्‍बत का पैगाम दिया है. नेताओं ने इसे माहौल को बिगाड़ने की कोशिश की. आज तक यहां हिंदू-मुस्‍लिम फसाद नहीं हुआ. लोग कैराना घराने के फन को समझ नहीं सके इसलिए इससे जुड़े लोग दूसरे जगह चले गए.

यहां से पलायन तो हिंदू-मुस्‍लिम दोनों का हुआ है, लेकिन उसकी वजह धार्मिक तनाव कभी नहीं रहा. कैरानवीं कहते हैं कि गायक मन्ना डे जब किसी काम से कैराना पहुंचे थे तो इसकी सीमा में घुसने से पहले सम्मान में उन्होंने अपने जूते उतारकर हाथ में रख लिए थे. लेकिन सियासत ने कभी इसे वह सम्‍मान नहीं दिया, जिसका यह कस्‍बा हकदार है.

kairana3       कैराना कस्बा (file photo)


यह था पलायन विवाद

पलायन के विवाद की शुरुआत जून 2016 में तब हुई थी जब यहां से बीजेपी सासंद हुकुम सिंह 346 हिंदू परिवारों की सूची सौंपते हुए यह आरोप लगाया कि कैराना को कश्मीर बनाने की कोशिश की जा रही है. हुकुम सिंह ने कहा था कि यहां हिंदुओं को धमकाया जा रहा है, जिससे हिंदू परिवार बड़ी संख्या में पलायन कर रहे हैं.

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First published: April 11, 2019, 11:30 AM IST
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