Analysis: क्या बीजेपी का ये मास्टर प्लान कन्नौज में दे पाएगा डिंपल यादव को चुनौती?

कन्नौज की सीट 1989 से मुलायम सिंह यादव का गढ़ रही है. 1998 में सिर्फ एक बार बीजेपी के चंद्रभूषण सिंह इस अभेद्य किले को भेद पाए हैं.

Anil Rai | News18 Uttar Pradesh
Updated: April 16, 2019, 11:47 AM IST
Analysis: क्या बीजेपी का ये मास्टर प्लान कन्नौज में दे पाएगा डिंपल यादव को चुनौती?
फाइल फोटो
Anil Rai
Anil Rai | News18 Uttar Pradesh
Updated: April 16, 2019, 11:47 AM IST
2014 लोकसभा चुनावों में बीजेपी जिन सात किलों को भेद नहीं पाई थी, उसमें इत्र नगरी कन्नौज भी है. इस सीट की पहचान अब डिंपल यादव से होती है. पहले चर्चा थी कि समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव इस सीट से चुनाव लड़ेंगे, लेकिन डिंपल यादव राजनीति से संन्यास लेने को तैयार नहीं थीं.

बात करें कन्नौज के राजनीतिक इतिहास की, तो ये सीट भी 1989 से मुलायम सिंह यादव का गढ़ रही है. 1998 में सिर्फ एक बार बीजेपी के चंद्रभूषण सिंह इस अभेद्य किले को भेद पाए हैं. पहले ये सीट जनता दल और फिर समाजवादी पार्टी के पाले में रही. इस सीट से मुलायम परिवार के तीनों चेहरे चुनाव लड़ चुके हैं. जिनमें मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव और डिंपल यादव शामिल हैं. इस सीट ने यादव परिवार में किसी को निराश नहीं किया तो डिंपल को उप चुनाव में निर्विरोध जिताकर लोकसभा भेजा. इस सीट से अपने पहले तीन चुनाव एसपी अध्यक्ष अखिलेश यादव जीते और बाद में उनकी पत्नी डिंपल यादव यहां से सांसद रहीं.



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2014 में बीजेपी इस किले को पूरी ताकत लगाने के बाद भी भेद नहीं पाई थी, लेकिन मोदी लहर ने किले की दीवार को दरका जरूर दिया था. 2014 में इस सीट पर डिंपल यादव की जीत का अंतर सिर्फ 19907 वोटों का रह गया था. बीजेपी 2019 के लोकसभा चुनाव में इस कम अंतर को ही अपनी ताकत मान रही है. 18 लाख के करीब वोटरों वाली इस सीट पर लगभग ढाई लाख यादव और करीब 5 लाख मुस्लिम वोटर हैं. यानी जातीय वोट गणित में करीब साढ़े सात लाख वोटर डिंपल यादव के पाले में दिख रहे हैं, जबकि ब्राह्मण और राजपूत मिलाकर साढ़े चार लाख वोटर हैं.

बीजेपी ने इस सीट की चक्रव्यूह रचना में पिछले चुनाव में तीसरे नंबर पर रहे निर्मल तिवारी को अपने पाले में कर लिया है. निर्मल तिवारी को पिछले चुनाव में एक लाख 27 हजार से ज्यादा वोट मिले थे. बीजेपी की कोशिश इस सीट पर यादव वोटों में सेध लगाने के साथ-साथ अन्य पिछड़े वोटों को अपने पाले में करने की है. हालांकि शिवपाल यादव के इस सीट से उम्मीदवार न खड़ा करने के फैसले ने बीजेपी की राह मुश्किल कर दी है.

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बीजेपी इस सीट को किसी कीमत पर जीतने की कोशिश में है. इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस सीट के लिए अभी से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली की तैयारियां शुरू हो गई हैं. ये दोनों नेता 27 अप्रैल को कन्नौज में रैली करेंगे.
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