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यूपी के इस गांव में आज भी दलित महिलाएं सिर पर ढो रहीं हैं दूसरों का मैला

यूपी के इस गांव में आज भी दलित महिलाएं सिर पर ढो रहीं हैं दूसरों का मैला

कन्नौज के इस गांव में आज भी दलित महिलाएं दूसरे के घरों में मैला उठाने का काम कर रही हैं

कन्नौज के इस गांव में आज भी दलित महिलाएं दूसरे के घरों में मैला उठाने का काम कर रही हैं

कन्नौज जिले में दलित महिलाएं आज भी दो जून की रोटी के लिए अपने हाथों से दूसरे के मैले को साफ़ करती हैं.

वैसे तो भारत 21वीं सदी का सबसे तेज गति से विकसित होने वाले देशों में सुमार हो चुका है, लेकिन उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में हाथ से मैला ढोने की कुप्रथा बदस्तूर जारी है. सुप्रीम कोर्ट की सख्त पाबंदी के बावजूद समाज का एक तबका मज़बूरी में मैला ढोने को विवश है. ऐसा ही एक गांव कन्नौज जिले में है, जहां की दलित महिलाएं दो जून की रोटी के लिए अपने हाथों से दूसरे के मैले को साफ़ करती हैं. चौंकाने वाली बात यह है कि जिला प्रशासन इस बात से बेखबर है.

कन्नौज की तिर्वा तहसील का अगौस गांव वैसे तो सवर्ण बाहुल्य है, लेकिन यहां कुछ दलित परिवार भी रहते हैं. रोजगार का कोई साधन न होने की वजह से इन दलित परिवारों की महिलाएं दूसरों के घरों का मैला साफ़ कर अपना जीवन यापन कर रही हैं. ऐसा नहीं है कि समाज के जागरूक लोगों ने इनकी दुर्दशा की बात जिला प्रशासन तक न पहुंचाई हो, लेकिन इस अमानवीय कुप्रथा को रोकने के लिए आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया.

समाज को बांटने वाली इस कुप्रथा को रोकने के लिए अभी तक कोई सामने नहीं आया है. ईटीवी/न्यूज़18 ने अब इसके खिलाफ आवाज उठाई है.

इन दलितों के पास रोजी रोटी का कोई साधन न होने से  ये मैला ढोने को मजबूर हैं.  हाथों से दूसरे घरों का मल उठाकर ये दलित महिलाएं टोकरी में भरकर  गांव के बाहर ले जाती हैं.

मैला ढोने वाली महिला रामबेटी ने कहा, “ मैला न ढोयें तो क्या करें, बच्चों का पेट कैसे पालें, उनको कैसे पढाएं, बेटियों की शादी कैसे करें. मज़बूरी में ही ये काम करना पड़ता है.”

यहां चौंकाने वाली बात यह है कि अगौस में चल रही मैला ढुलवाने की परंपरा से कन्नौज  प्रशासन पूरी तरह अनजान है. जबकि आस-पास के कई गांवों में मशहूर है कि अगौस के दलित प्रशासनिक लापरवाही के चलते आज भी मैला उठाते हैं. इस बात की जानकारी कई बार गांव के कुछ सभ्य लोगों ने अफसरों तक भी पहुंचाई, लेकिन किसी अफसर ने समाज को बांटने वाली इस कुप्रथा को खत्म करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया.

इस बाबत जब ईटीवी/न्यूज़18 की टीम ने कन्नौज के जिलाधिकारी जगदीश प्रसाद से बात की तो उन्होंने कहा कि यह बात उन्हें हमारे माध्यम से पता चली है. डीएम ने कहा की तत्काल इसकी जांच करवाकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. जो भी दलित हैं उनके पुनर्वास की भी व्यवस्था होगी.

अगौस गांव में चल रही इस परम्परा से एक बात तो तय है कि समाज में आज भी दलितों के प्रति सोच पूरी तरह से बदली नहीं. यह सभ्य समाज के मुंह पर एक तमाचा भी है. देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुले में शौच न करने की अपील करते हैं. प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ 2018 तक प्रदेश को खुले में शौच से मुक्त करने की बात करते हैं, लेकिन सिर पर मैला ढोने की परंपरा का आज भी होना यह दर्शाता है कि प्रशासन और अधिकारी इस मुद्दे को लेकर संवेदनशील नहीं हैं.

Tags: कन्नौज

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