न्यूज़18-इप्सॉस एग्ज़िट पोल 2019 : डिंपल को मिल रहा है सपा बसपा गठबंधन का फायदा?
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न्यूज़18-इप्सॉस एग्ज़िट पोल 2019 : डिंपल को मिल रहा है सपा बसपा गठबंधन का फायदा?
डिंपल को मिल रहा है सपा बसपा गठबंधन का फायदा?

लोकसभा चुनावों में वोटिंग का दौर समाप्त होने के बाद जो अनुमान सामने आ रहे हैं, उनके मुताबिक उत्तर प्रदेश में इत्रनगरी के नाम से मशहूर कन्नौज लोकसभा सीट पर कौन आगे है और कौन पीछे? पढ़ें अनुमान और पूरा गणित.

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कन्नौज लोकसभा सीट समाजवादी पार्टी की सेफ सीट मानी जाती है और एक बार फिर सपा प्रमुख अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव यहां मुख्य प्रत्याशी हैं. सपा बसपा गठबंधन के बाद यहां उनके सामने केवल बीजेपी उम्मीदवार सुब्रत पाठक की चुनौती है जो पिछले चुनाव में बहुत कम वोटों से डिंपल के हाथों हारे थे. मतदान संपन्न होने के बाद न्यूज़18-इप्सॉस के एग्ज़िट पोल पर आधारित अनुमान के मुताबिक डिंपल यादव मुश्किल में हैं क्योंकि इस सीट पर कड़ा मुकाबला है और पोल के मुताबिक यहां किसी भी प्रत्याशी को स्पष्ट बहुमत मिलता नहीं दिख रहा.

इस बार है डिंपल की कड़ी परीक्षा
इत्र के लिए मशहूर उत्तर प्रदेश की कन्‍नौज लोकसभा सीट 2019 के चुनाव में चर्चित सीटों में शुमार है. समाजवादी पार्टी ने एक बार फिर इस सीट से यादव परिवार की बहू डिंपल यादव काे मैदान में उतारा है. पहले इस सीट पर डिंपल के चाचा ससुर शिवपाल सिंह यादव ने अपनी पार्टी प्र‍गतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) की ओर से सुनील कुमार राठौर को मैदान में उतारा था. हालांकि, फिर उन्‍होंने अपना प्रत्‍याशी वापस ले लिया. वहीं, डिंपल यादव के मुकाबले बीजेपी के सुब्रत पाठक फिर ताल ठोक रहे हैं. सुब्रत लगातार तीसरी बार कन्‍नौज से बीजेपी के उम्‍मीदवार हैं.

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की पत्‍नी और 2014 की सांसद डिंपल के सामने इस बार चुनौती कड़ी हो सकती है. इसकी मुख्‍य वजह है 2014 के चुनावों में उनका बेहद कम अंतर से जीतना. फिर भी, सात बार से समाजवादी पार्टी के खाते में आती रही यह लोकसभा सीट सपा उम्‍मीदवार के लिए सुरक्षित सीट मानी जाती है. यहां बीजेपी ने सिर्फ एक बार अपना परचम लहराया है. 1996 में बीजेपी के चंद्रभूषण सिंह ने यहां जीत दर्ज की थी.
मार्जिन कम था लेकिन इस बार बदले हैं समीकरण


पिछले चुनाव में सपा से उम्‍मीदवार डिंपल यादव ने बीजेपी के सुब्रत पाठक को हराकर जीत हासिल की थी. इस दौरान जहां डिंपल को 4,89,164 वोट मिले. वहीं मोदी लहर के बावजूद बीजेपी के सुब्रत पाठक को 4,69,257 वोट मिले. चूंकि पिछली हार में वोटों का अंतर सिर्फ 19 हजार 907 का था, लिहाज़ा बीजेपी को यहां 2019 में उम्‍मीदें नज़र आ रही हैं.

2014 लोकसभा चुनाव में बसपा के निर्मल तिवारी तीसरे स्‍थान पर रहे थे. निर्मल तिवारी को 2014 के लोकसभा चुनाव में 1,27,785 वोट मिले थे. लेकिन इस बार समीकरण थोड़े बदले हैं, कन्नौज से बीजेपी कैंडिडेट सुब्रत पाठक ने बसपा के वोटरों में सेंध लगाने के लिए निर्मल तिवारी को बीजेपी की सदस्यता दिलाई है. कन्नौज में निर्मल तिवारी की ब्राह्मण वोटरों और बसपा के वोटरों में अच्छी पकड़ है. बीजेपी की नज़र बसपा वोटरों पर है.

लेकिन इस बार चुनाव में एक खास बात और है, जो सपा प्रत्याशी डिंपल यादव को फायदा पहुंचा सकती है. वह यह है कि यूपी में सपा-बसपा का गठबंधन हो चुका है. इस बार मैदान में बसपा का प्रत्याशी मैदान में नहीं है. लिहाज़ा बसपा का वोट भी डिंपल यादव के खाते में जा सकता है. पिछली बार आम आदमी पार्टी ने भी अपना उम्‍मीदवार उतारा था, जिसे निर्दलीय प्रत्‍याशी से भी कम वोट मिले थे.

पांच विधानसभा वाली ये सीट सपा के लिए सेफ!
कन्नौज लोकसभा सीट में 5 विधानसभा सीटें आती हैं. जिसमें कन्नौज की सदर विधानसभा, छीबरामऊ विधानसभा और तिर्वा विधानसभा है. इसके साथ ही जनपद कानपुर देहात की रसूलाबाद विधानसभा और जनपद औरैया की बिधुना विधानसभा सीटें भी कन्नौज लोकसभा सीट में शामिल हैं. क्षेत्रफल की दृष्टि से यह बहुत बड़ा इलाका है. इसकी भगौलिक स्थिति भी विषम परिस्थितियों वाली है. 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने कानपुर बुंदेलखंड की 10 लोकसभा सीटों में से 09 सीटों पर जीत दर्ज की थी. लेकिन, बीजेपी के हाथ में कन्नौज सीट नहीं आई थी.

डिंपल यादव का सियासी सफर
राजनीति के मैदान में डिंपल यादव पहला चुनाव हार गई थीं. बाद में, उनके पति अखिलेश यादव ने कन्नौज लोकसभा सीट उनके लिए खाली कर दी थी. कन्नौज सीट की बात करें तो डिंपल यादव यहां से निर्विरोध जीत दर्ज कर चुकी हैं. 2009 में पहली बार डिंपल यादव ने फिरोज़ाबाद सीट से उपचुनाव में हिस्सा लिया और उन्हें राजबब्बर के हाथों हार का सामना करना पड़ा. दरअसल उनके पति अखिलेश यादव ने 2009 के चुनाव में दो सीटों कन्नौज और फिरोज़ाबाद सीट से चुनाव लड़ा था और दोनों ही सीटों पर जीत दर्ज की थी.

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