डिंपल यादव के खिलाफ कन्नौज का ‘स्मृति ईरानी’ है ये बीजेपी प्रत्याशी

File Photo
File Photo

जिस तरह से स्मृति ईरानी अमेठी में राहुल गांधी के खिलाफ लगातार दो बार से ताल ठोक रही हैं, ठीक उसी तरह कन्नौज से बीजेपी प्रत्याशी सुब्रत पाठक तीसरी बार मैदान में हैं और अब तक उन्हें भी जीत नहीं मिली है.

  • Share this:
लोकसभा चुनाव 2019 के लिए चौथे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होना है. इसके लिए प्रचार का शोर शनिवार शाम पांच बजे थम गया. इस चरण में उत्तर प्रदेश की 13 सीटों पर मतदान होगा. इसमें से एक सीट काफी महत्वपूर्ण है. इस सीट पर जीत हासिल करने के लिए गठबंधन के अलावा बीजेपी ने भी अपनी पूरी ताकत लगा दी है. यह कोई और सीट नहीं बल्कि कन्नौज की है.

समाजवादी पार्टी प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव कन्नौज से मैदान में हैं. डिंपल एसपी, बीएसपी और आरएलडी गठबंधन की संयुक्त उम्मीदवार हैं. डिंपल के खिलाफ बीजेपी ने जिसे मैदान में उतारा है उन्हें कन्नौज का स्मृति ईरानी भी कह सकते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि जिस तरह से स्मृति ईरानी अमेठी में राहुल गांधी के खिलाफ लगातार दो बार से ताल ठोक रही हैं, ठीक उसी तरह कन्नौज से बीजेपी प्रत्याशी सुब्रत पाठक तीसरी बार मैदान में हैं और अब तक उन्हें भी जीत नहीं मिली है.

अमेठी में राहुल गांधी के खिलाफ स्मृति ईरानी 2014 लोकसभा चुनाव में बीजेपी की उम्मीदवार थीं. हालांकि उन्हें जीत नहीं मिली थी. अब इस बार भी वो अमेठी में राहुल को चुनौती दे रही हैं. इसी तरह सुब्रत पाठक भी 2009 में अखिलेश यादव को कन्नौज से चुनौती दिए, लेकिन जीत नसीब नहीं हुई. 2014 में डिंपल यादव को कड़ी चुनौती देने के बाद भी वे 19 हजार वोटों से हार गए. इसके बाद भी बीजेपी शीर्ष नेतृत्व का भरोसा उनपर बना रहा और पार्टी ने 2019 में एक बार फिर उन्हें डिंपल के खिलाफ उतारने का फैसला किया.



सुब्रत पाठक भी स्मृति ईरानी की तरह ही एक खास सीट पर एक ही परिवार के पीछे लगे हुए हैं.
क्या रहा है कन्नौज सीट का इतिहास
बात करें कन्नौज के राजनीतिक इतिहास की, तो ये सीट 1989 से मुलायम सिंह यादव का गढ़ रही है. 1998 में सिर्फ एक बार बीजेपी के चंद्रभूषण सिंह को यहां से जीत मिली थी. पहले ये सीट जनता दल और फिर समाजवादी पार्टी के पाले में रही. इस सीट से मुलायम परिवार के तीनों चेहरे चुनाव लड़ चुके हैं. जिनमें मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव और डिंपल यादव शामिल हैं. इस सीट ने यादव परिवार में किसी को निराश नहीं किया तो डिंपल को उप चुनाव में निर्विरोध जिताकर लोकसभा भेजा. इस सीट से अपने पहले तीन चुनाव एसपी अध्यक्ष अखिलेश यादव जीते और बाद में उनकी पत्नी डिंपल यादव यहां से सांसद रहीं.

कन्नौज लोकसभा क्षेत्र का जातीय गणित
18 लाख के करीब वोटरों वाली इस सीट पर लगभग ढाई लाख यादव और करीब 5 लाख मुस्लिम वोटर हैं. यानी जातीय वोट गणित में करीब साढ़े सात लाख वोटर डिंपल यादव के पाले में दिख रहे हैं, जबकि ब्राह्मण और राजपूत मिलाकर साढ़े चार लाख वोटर हैं.

इस बार सीट से जीतने के लिए बीजेपी किस तरह अपनी ताकत लगा रही है, इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि यहां पर खुद प्रधानमंत्री मोदी और योगी आदित्यनाथ रैली कर चुके हैं. इसके साथ ही गठबंधन ने भी अपना पूरा दम लगा दिया है. गठबंधन की संयुक्त रैली भी डिंपल के पक्ष में हुई जिसमें मायावती भी मौजूद थीं. इसके अलावा प्रचार के आखिरी दिन अखिलेश और डिंपल ने खुद रोड शो भी किया.

यह भी पढ़ें- Analysis: क्या बीजेपी का ये मास्टर प्लान कन्नौज में दे पाएगा डिंपल यादव को चुनौती?

यह भी पढ़ें- नेता जी देते रह गए भाषण, उनको लिए बगैर ही उड़ गया हेलीकॉप्टर

एक क्लिक और खबरें खुद चलकर आएगी आपके पास, सब्सक्राइब करें न्यूज़18 हिंदी  WhatsApp अपडेट्स
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज