Home /News /uttar-pradesh /

कन्‍नौज लोकसभा सीट: 2014 में बेहद कम अंतर से जीती थीं डिंपल, इस बार बचा पाएंगी अपना गढ़?

कन्‍नौज लोकसभा सीट: 2014 में बेहद कम अंतर से जीती थीं डिंपल, इस बार बचा पाएंगी अपना गढ़?

डिंपल यादव (फाइल फोटो)

डिंपल यादव (फाइल फोटो)

कन्नौज में सपा की डिंपल यादव के सामने बीजेपी के सुब्रत पाठक एक बार फिर ताल ठोक रहे हैं. सुब्रत लगातार तीसरी बार कन्‍नौज से बीजेपी के उम्‍मीदवार हैं. 2014 के आम चुनाव में डिंपल यादव को बहुत कम वोटों से जीत मिली थी.

    इत्र के लिए मशहूर उत्तर प्रदेश की कन्‍नौज लोकसभा सीट 2019 के चुनाव में एक बार फिर से चर्चा में है. समाजवादी पार्टी ने एक बार फिर इस सीट से यादव परिवार की बहू डिंपल यादव काे मैदान में उतारा है. पहले इस सीट पर डिंपल के चाचा ससुर शिवपाल सिंह यादव ने अपनी पार्टी प्र‍गतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) की ओर से सुनील कुमार राठौर को मैदान में उतारा था. हालांकि किन्‍हीं कारणों से फिर उन्‍होंने अपना प्रत्‍याशी वापस ले लिया. हालांकि डिंपल यादव के सामने बीजेपी के सुब्रत पाठक एक बार फिर ताल ठोक रहे हैं. सुब्रत लगातार तीसरी बार कन्‍नौज से बीजेपी के उम्‍मीदवार हैं.

    सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की पत्‍नी और 2014 की सांसद डिंपल के सामने इस बार कड़ी चुनौती हो सकती है. इसकी मुख्‍य वजह है 2014 के चुनावों में उनका बेहद कम अंतर से जीतना. हालांकि 7 बार से समाजवादी पार्टी के खाते में आती रही यह लोकसभा सीट सपा उम्‍मीदवार के लिए सुरक्षित सीट भी मानी जाती है. यहां बीजेपी ने सिर्फ एक बार ही अपना परचम लहराया है. 1996 में बीजेपी के चंद्रभूषण सिंह ने यहां जीत दर्ज की थी.

    डिंपल यादव पूनम सिन्‍हा के साथ
    डिंपल यादव पूनम सिन्‍हा के साथ


    2014 का लोकसभा चुनाव
    पिछले चुनाव में सपा से उम्‍मीदवार डिंपल यादव ने बीजेपी के सुब्रत पाठक को हराकर विजय हासिल की थी. इस दौरान जहां डिंपल को 4,89,164 वोट मिले. वहीं मोदी लहर के बावजूद बीजेपी के सुब्रत पाठक को 4,69,257 वोट मिले. चूंकि पिछली हार में वोटों का अंतर सिर्फ 19 हजार 907 वोट था, लिहाजा बीजेपी को यहां 2019 में उम्‍मीदें नजर आ रही हैं.

    2014 लोकसभा चुनाव में बसपा के निर्मल तिवारी तीसरे स्‍थान पर रहे थे. निर्मल तिवारी को 2014 के लोकसभा चुनाव में 1,27,785 वोट मिले थे. लेकिन इस बार समीकरण थोड़े बदले से हैं, कन्नौज से बीजेपी कैंडिडेट सुब्रत पाठक ने बसपा के वोटरों में सेंध लगाने के लिए निर्मल तिवारी को बीजेपी की सदस्यता दिलाई है. कन्नौज में निर्मल तिवारी की ब्राह्मण वोटरों और बसपा के वोटरों में अच्छी पकड़ है. बीजेपी की नजर बसपा वोटरों पर है.

    लेकिन इस बार चुनाव में एक खास बात है, जो सपा प्रत्याशी डिंपल यादव को फायदा पहुंचा सकती है. वह यह है कि यूपी में सपा-बसपा का गठबंधन हो चुका है. इस बार मैदान में बसपा का प्रत्याशी मैदान में नहीं है. लिहाजा बसपा का वोट भी डिंपल यादव के खाते में जा सकता है. पिछली बार आम आदमी पार्टी ने भी अपना उम्‍मीदवार उतारा था, जिसे निर्दलीय प्रत्‍याशी से भी कम वोट मिले थे.

    अखिलेश यादव और डिंपल यादव
    अखिलेश यादव और डिंपल यादव


    पांच विधानसभा सीट हैं शामिल
    कन्नौज लोकसभा सीट में 5 विधानसभा सीटें आती हैं. जिसमें कन्नौज की सदर विधानसभा, छीबरामऊ विधानसभा और तिर्वा विधानसभा है. इसके साथ ही जनपद कानपुर देहात की रसूलाबाद विधानसभा और जनपद औरैया की बिधुना विधानसभा सीटें भी कन्नौज लोकसभा सीट में शामिल हैं. क्षेत्रफल की दृष्टि से यह बहुत बड़ा इलाका है. इसकी भगौलिक स्थिति भी विषम परिस्थितियों वाली है. 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने कानपुर बुंदेलखंड की 10 लोकसभा सीटों में से 09 सीटों पर जीत दर्ज की थी. लेकिन बीजेपी के हाथ में कन्नौज सीट नहीं आई थी.

    ऐसा रहा है डिंपल यादव का सियासी सफर
    राजनीति के मैदान में डिंपल यादव पहला चुनाव हार गईं थी. लेकिन बाद में उनके पति अखिलेश यादव ने अपने द्वारा जीती गई कन्नौज लोकसभा सीट उनके लिए खाली कर दी थी. कन्नौज सीट की बात करें तो डिंपल यादव यहां से निर्विरोध जीत दर्ज कर चुकी हैं. 2009 में पहली बार डिंपल यादव ने फिरोजाबाद सीट से उपचुनाव में हिस्सा लिया और उन्हें राजबब्बर के हाथों हार का सामना करना पड़ा. दरअसल उनके पति अखिलेश यादव ने 2009 के चुनाव में दो सीटों कन्नौज और फिरोजाबाद सीट से चुनाव लड़ा था और दोनों ही सीटों पर जीत दर्ज की थी.

    Tags: Dimple yadav, Kannauj S24p42, Lok Sabha Election 2019, Lok Sabha Key Constituency

    विज्ञापन

    राशिभविष्य

    मेष

    वृषभ

    मिथुन

    कर्क

    सिंह

    कन्या

    तुला

    वृश्चिक

    धनु

    मकर

    कुंभ

    मीन

    प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
    और भी पढ़ें
    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर