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नाम के पहले अक्षर से सरनेम, गली और बिजनेस तक सेम...जानें पीयूष जैन और पुष्पराज जैन की पूरी कुंडली

Piyush Jain and Pushparaj Jain (फाइल फोटो)

Piyush Jain and Pushparaj Jain (फाइल फोटो)

Piyush Jain News: कन्नौज के इत्र व्यापारी पीयूष जैन (Piyush Jain) के घर से करोड़ों रुपये बरामद हुए हैं. कुबेर कांड की इ ...अधिक पढ़ें

कानपुर: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh News) में कन्नौज के इत्र व्यापारी पीयूष जैन (Piyush Jain News) के घर से करोड़ों रुपये बरामद हुए हैं. कुबेर कांड (Piyush jain IT Raid) की इस घटना के बाद दो नामों की चर्चा है. दोनों के नाम का पहला अक्षर पी (P) है और दोनों का सरनेम भी एक ही है- जैन. इतना ही नहीं, दोनों में इतनी समानताएं हैं कि दोनों कन्नौज (Kannauj News) के उसी मुहल्ले के रहने वाले पड़ोसी हैं, जिसे जैन गली के नाम से जाना जाता है. संयोग इतना कि दोनों ही इत्र का व्यापार करते हैं और यूपी चुनाव से पहले अब दोनों का नाम उछल गया है.

मंगलवार को पीएम मोदी (PM Modi) ने पीयूष जैन (Piyush Jain Raid) के घर हुई छापेमारी का परोक्ष रूप से जिक्र किया, जिसमें 194 करोड़ रुपये से अधिक नकद बरामद हुए हैं और समाजवादी पार्टी पर सत्ता में अपने कार्यकाल के दौरान पूरे यूपी में ‘भ्रष्टाचार का इत्र’ छिड़कने का आरोप लगाया. वहीं, अखिलेश यादव ने कहा कि केंद्रीय एजेंसियों ने गलत जैन के घर छापेमारी की है, जिसका संबंध भाजपा से है. उन्होंने कहा कि सपा के जैन, पुष्पराज ‘पम्पी’ जैन हैं, जो एक एमएलसी हैं, जिनका लेटेस्ट इत्र उन्होंने पिछले महीने लॉन्च किया था, जिसे ‘समाजवादी इत्र’ कहा गया था.

इस तरह से देखा जाए इस कांड के केंद्र में दो व्यक्ति हैं, जो समान जड़ों से बंधे हैं मगर अलग-अलग कहानियों के साथ. सूत्रों की मानें तो एक ओर जहां 50 वर्षीय पीयूष जैन एक बहुत ही सादा या यूं कहें कि लो-प्रोफाइल बिजनेसमैन है, जो एक सामान्य जीवन शैली में रहता है. उसके बारे में कहा जाता है कि वह अभी भी स्कूटर पर चलता है. पीयूष जैन के घर से सोना और कैश बरामद होने के बाद और कर चोरी के आरोप में उसे कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. वहीं दूसरी ओर, 60 वर्षीय पुष्पराज जैन को कन्नौज में ‘परोपकारी’ और राजनेता कहा जाता है. उनके पास एक पेट्रोल पंप और कोल्ड स्टोरेज यूनिट है. वह कृषि से भी कमाई करते हैं और उनके पास मुंबई में भी घर और दफ्तर हैं.

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कानपुर मेट्रो रेल परियोजना का उद्घाटन करने के बाद एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने पीयूष जैन पर छापे का उल्लेख किया और कहा कि उन्होंने (सपा) ने 2017 से पहले पूरे यूपी में भ्रष्टाचार की इत्र बिखेर दी थी, जो सभी के सामने है, मगर अब वे अपना मुंह बंद रखे हुए हैं और क्रेडिट लेने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं. नोटों का पहाड़, जिसे पूरे देश ने देखा है, यही उनकी उपलब्धि और हकीकत है.

वहीं, उन्नाव में अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने दावा किया कि भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का असली निशाना पुष्पराज जैन थे. यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस आरोप के बारे में पूछे जाने पर कि छापे में बरामद पैसा सपा और पार्टी के लिए इत्र बनाने वाले एक व्यापारी से जुड़ा था, उन्होंने कहा कि इससे बड़ा झूठ कुछ नहीं है. अखिलेश यादव ने कहा कि यह हमारे एमएलसी पुष्पराज जैन थे, जिन्होंने हमारे लिए परफ्यूम बनाया था. उन्होंने (भाजपा) मीडिया के माध्यम से विज्ञापन दिया कि जिस पर छापा मारा गया, वह व्यक्ति सपा का है. दोपहर तक जागरूक पत्रकार समझ गए कि छापेमारी करने वाले का एसपी से कोई लेना-देना नहीं है. फिर, उन्होंने अपने बयान भी बदल दिए. सुबह सुर्खियों में रहा कि ‘सपा के इत्र कारोबारी पर छापा. आपको यह सोचना चाहिए कि छापा गलत जगह पर, यानी उनके ही व्यक्ति के खिलाफ किया गया था. आपको उनकी कॉल डिटेल निकालनी चाहिए और आपको बीजेपी के लोगों के नाम मिल जाएंगे.

छापे में मिले नकदी जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वे पुष्पराज जैन पर छापा मारना चाहते थे, लेकिन गलती से पीयूष जैन के घर छापा मार दिया. यह डिजिटल इंडिया की गलती की तरह लग रहा था. गौरतलब है कि जीएसटी अधिकारियों की मानें तो पीयूष जैन के घर से छापेमारी के दौरान अब तक 194 करोड़ रुपए और 23 किलो सोना बरामद किया गया है. पीयूष जैन के कानपुर और कन्नौज स्थित घरों से छापेमारी के दौरान ये बरामद किए गए हैं.

इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से बताया कि पीयूष और उसका छोटा भाई अंबरीश, जैन गली में अपने माता-पिता के घर से पारिवारिक व्यवसाय चलाते थे. करीब दो दशक पहले पीयूष जैन दो बेटों सहित अपने परिवार के साथ कानपुर चला गया और अपने आवास से एक नया इत्र व्यवसाय खोला. कुछ साल बाद अंबरीश भी अपने परिवार के साथ कानपुर शिफ्ट हो गया. कन्नौज परफ्यूम एसोसिएशन के अध्यक्ष पवन त्रिवेदी ने कहा कि हम पीयूष जैन और उनके परिवार को जानते हैं. परिवार में किसी ने कभी कोई चुनाव नहीं लड़ा था, हमें नहीं पता कि उन्हें इतनी बड़ी रकम कहां से मिली.

उन्होंने आगे कहा कि कानपुर शिफ्ट होने के बाद भी पीयूष जैन और अंबरीश ने कभी कन्नौज में अपना बिजनेस बंद नहीं किया. वे दोनों लगातार कन्नौज आते-जाते थे. हमें पता चला कि पीयूष ने पान मसाला निर्माताओं को कच्चे माल की आपूर्ति करने के लिए कानपुर में एक नया व्यवसाय भी शुरू किया है.
वहीं, पुष्पराज जैन को 2016 में इटावा-फर्रुखाबाद से एमएलसी के रूप में चुना गया था. वह प्रगति अरोमा ऑयल डिस्टिलर्स प्राइवेट लिमिटेड के सह-मालिक हैं. उनके इस बिजनेस की शुरुआत उनके पिता सवैललाल जैन ने 1950 में ने शुरू की थी. पुष्पराज और उनके तीन भाई कन्नौज में व्यवसाय चलाते हैं और एक ही घर में रहते हैं. एमएलसी पुष्पराज का मुंबई में एक घर और एक कार्यालय है, जहां से मुख्य रूप से मध्य पूर्व में लगभग 12 देशों को निर्यात का सौदा होता है. उनके तीन भाइयों में से दो मुंबई ऑफिस में काम करते हैं जबकि तीसरा उनके साथ कन्नौज में मैन्युफैक्चरिंग सेट-अप पर काम करता है.

2016 में उनके चुनावी हलफनामे के अनुसार, पुष्पराज और उनके परिवार के पास 37.15 करोड़ रुपये की चल संपत्ति और 10.10 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति है. उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और उन्होंने कन्नौज के स्वरूप नारायण इंटरमीडिएट कॉलेज में कक्षा 12 तक पढ़ाई की है. छापेमारी शुरू होने के बाद बीते शुक्रवार को द इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए पुष्पराज ने कहा था कि मेरा पीयूष जैन से कोई लेना-देना नहीं है. आम बात यह है कि पीयूष जैन मेरे जैसे ही समुदाय से हैं. अगर उसके खिलाफ छापेमारी की गई है तो वह खुद इससे निपटेगा.

Tags: Kannauj news, Kanpur news, Uttar pradesh news

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