ANALYSIS: पीएम मोदी की रैली से कितना बदलेगा कन्नौज का वोट गणित?
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ANALYSIS: पीएम मोदी की रैली से कितना बदलेगा कन्नौज का वोट गणित?
फाइल फोटो

कन्नौज सीट 1989 से मुलायम सिंह यादव का गढ़ रही है. साल 1998 में सिर्फ एक बार बीजेपी के चन्द्रभूषण सिंह इस अभेद्य किले को भेद पाए थे.

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कन्नौज की सीट बीजेपी और गठबंधन दोनों दल के लिए कितनी मायने रखती है इस बात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि बीएसपी सुप्रीमो मायावती और एसपी अध्यक्ष अखिलेश यादव की रैली के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कन्नौज जा रहे हैं. बीजेपी के सूत्रों का मानना है कि यादव परिवार के इस किले को तोड़ना मुश्किल नहीं है और इसके पीछा वो 2014 के चुनाव परिणाम को गणित को देख रहे हैं. दरअसल, साल 2014 में बीजेपी ने यादव परिवार के इस किले की दीवार को दरका दिया था. यादव परिवार की बहू डिंपल यादव की जीत का अंतर सिर्फ 19907 वोटों का था.

यही वजह है कि बीजेपी 2019 के लोकसभा चुनाव में इस कम अंतर को ही अपनी ताकत मान रही है और उसे उम्मीद है कि पीएम की रैली के बहाने उस अंतर को पाटा जा सकता है. 18 लाख के करीब वोटरों वाली इस सीट पर करीब ढाई लाख यादव और करीब 5 लाख मुस्लिम वोटर हैं. यानि जातीय वोट गणित में करीब साढ़े सात लाख वोटर डिंपल यादव के पाले में दिख रहे हैं, जबकि ब्राह्मण और राजपूत मिलाकर साढ़े चार लाख वोटर होते हैं.

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ऐसे में बीजेपी ने इस सीट की चक्रव्यू रचना में पिछले चुनाव में तीसरे नंबर पर रहे निर्मल तिवारी को अपने पाले में कर लिया है. निर्मल तिवारी को पिछले चुनाव में एक लाख 27 हजार से ज्यादा वोट मिले थे. बीजेपी की कोशिश इस सीट पर यादव वोटों में सेध लगाने के साथ-साथ अन्य पिछड़े वोटों को अपने पाले में करने की है. हालांकि, शिवपाल यादव द्वारा यहां से उम्मीदवार न खड़ा करने के फैसले ने बीजेपी की राह मुश्किल कर दी है लेकिन बीजेपी इस सीट को किसी कीमत पर जीतने की कोशिश में है.
बात कन्नौज की करें तो यह सीट भी 1989 से मुलायम सिंह यादव का गढ़ रही है. साल 1998 में सिर्फ एक बार बीजेपी के चन्द्रभूषण सिंह इस अभेद्य किले को भेद पाए थे. पहले ये सीट जनता दल और फिर समाजवादी पार्टी के पाले में रही. इस सीट से मुलायम परिवार के तीनों चेहरे मुलायम सिंह यादव , अखिलेश यादव और डिंपल यादव भी चुनाव लड़ चुके हैं. इस सीट ने किसी को निराश नहीं किया है. इस सीट ने डिंपल को तो उप चुनाव में निर्विरोध जीताकर लोकसभा भेजा. इस सीट पर पहले तीन चुनाव एसपी अध्यक्ष अखिलेश यादव जीते और बाद में उनकी पत्नी डिंपल यादव यहां से सांसद रहीं.

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