नियुक्ति घोटाला : जिला सहकारी बैंक में चतुर्थ श्रेणी में हुईं 34 नियुक्तियां रद्द करने की सिफारिश
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नियुक्ति घोटाला : जिला सहकारी बैंक में चतुर्थ श्रेणी में हुईं 34 नियुक्तियां रद्द करने की सिफारिश
बैंक की नियुक्ति में भाई-भतीजावाद (प्रतीकात्मक तस्वीर)

जांच रिपोर्ट में बताया गया कि 3 जनवरी 2017 को सफल 34 अभ्यर्थियों की सूची कानपुर भेजी गई और अगले दिन 23 अभ्यर्थियों ने ज्वाइन कर लिया, जबकि इन्हें पत्र द्वारा सूचना दी जानी थी. रिपोर्ट में 5 अभ्यर्थियों की निदेशकों से रिश्तेदारी भी बताई गई है.

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कानपुर. जिला सहकारी बैंक (District Cooperative Bank) में चतुर्थ श्रेणी में भर्ती किए गए 34 कर्मचारियों की नियुक्ति (appointment) में गड़बड़ी मिलने के बाद उनकी सेवा समाप्ति के लिए सेवा मंडल को पत्र भेजा गया है. इनमें 5 कर्मचारी निदेशकों के बेटा-बेटी और भतीजे हैं. बैंक में अनुसूचित जाति (SC) में दो सगी बहनों के अलावा उनकी सगी भाभी की नियुक्ति भी हुई थी. कुल 20 पद सामान्य वर्ग के थे, लेकिन सिर्फ एक ही सामान्य अभ्यर्थी को मौका मिला.

34 लोगों की की गई थी नियुक्ति

जिला सहकारी बैंक में चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की भर्ती का अधिकार बैंक प्रबंधन के पास है. वर्ष 2016 में बैंक ने सेवा मंडल से चतुर्थ श्रेणी के 36 पदों की अनुमति लेकर 30 अक्टूबर को विज्ञापन निकाला था. इसमें 20 पद सामान्य वर्ग (General), 3 अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), 12 अनुसूचित जाति (SC), 1 अनुसूचित जनजाति (ST) की नियुक्ति होनी थी. सामान्य वर्ग के 316, अन्य पिछड़ा वर्ग के 250, अनुसूचित जाति के 244, अनुसूचित जनजाति के 6 आवेदन आए थे. जांच के बाद 742 के साक्षात्कार किए गए. इनमें से 36 का चयन हुआ. सेवा मंडल ने चयनित 36 लोगों में 34 की नियुक्ति की स्वीकृति दे दी.



निदेशकों के रिश्तेदारों की भर्ती हुई
2 वर्ष पूर्व की गई इन नियुक्तियों में धांधली की शिकायत मुख्यमंत्री से हुई. इसके बाद जांच का निर्देश दिया गया. इसकी जांच तत्कालीन सहायक आयुक्त व सहायक निदेशक ने की. उन्होंने जांच में शिकायतों को सही पाया. सेवा मंडल की ओर से कराई गई दोबारा जांच में भी वही गड़बड़ियां सामने आई थीं. सहायक आयुक्त एवं सहायक निदेशक की ओर से की गई जांच की रिपोर्ट अपर जिला सहकारी अधिकारी आरके कटियार ने तैयार की थी. उन्होंने जिक्र किया कि 3 जनवरी 2017 को सफल 34 अभ्यर्थियों की सूची कानपुर भेजी गई और अगले दिन 23 अभ्यर्थियों ने ज्वाइन कर लिया, जबकि इन्हें पत्र द्वारा सूचना दी जानी थी. उन्होंने अपनी रिपोर्ट में 5 अभ्यर्थियों की निदेशकों से रिश्तेदारी भी बताई. इसमें एक निदेशक की बेटी थी. आशीष कुमार, रवि प्रताप, अनिल गुप्ता निदेशकों के बेटे थे. अनुज सचान एक निदेशक के सगे भतीजे थे. दो बार जांच के बाद अब बैंक के चेयरमैन अरविंद ने सभी भर्तियों को पूरी तरह खत्म करने के लिए सेवा मंडल को पत्र लिखा है.
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