30 साल त​क मिटाता रहा सबूत, पढ़ें कैसे 7 दिन में खत्म हो गया गैंगस्टर विकास दुबे का खेल
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30 साल त​क मिटाता रहा सबूत, पढ़ें कैसे 7 दिन में खत्म हो गया गैंगस्टर विकास दुबे का खेल
गैंगस्टर विकास दुबे को उज्जैन से गुरुवार को गिरफ्तार किया गया था.(ANI)

यूपी एसटीएफ की टीम विकास दुबे (Vikas Dubey) को जब मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) से कानपुर (Kanpur) लेकर आ रही थी तभी जिस गाड़ी में विकास दुबे बैठा था उसका एक्सीडेंट हो गया. हादसे का फायदा उठाकर विकास दुबे ने भागने की कोशिश की और इसी दौरान वह मारा गया.

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  • Last Updated: July 10, 2020, 12:13 PM IST
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कानपुर. कानपुर (Kanpur) में आठ पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद से फरार चल रहे पांच लाख के इनामी गैंगस्टर विकास दुबे (Vikas Dubey) को आज सुबह एनकांउटर (encounter) में मार गिराया गया. बता दें कि यूपी एसटीएम की टीम विकास दुबे को जब मध्य प्रदेश से कानपुर लेकर आ रही थी तभी जिस गाड़ी में विकास दुबे बैठा था उसका एक्सीडेंट हो गया. पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक हादसे का फायदा उठाकर विकास दुबे ने भागने की कोशिश की और इसी दौरान वह एनकाउंटर में मारा गया.

कानपुर के एसएसपी दिनेश कुमार प्रभु ने बताया कि एसटीएफ की गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हुई थी. इस दौरान आरोपी विकास दुबे ने कार में सवार पुलिसकर्मी की पिस्टल छीनकर फायरिंग करते हुए भागने की कोशिश की. इसी बीच एसटीएफ की दूसरी गाड़ियां वहां पहुंच गईं और पुलिस की जवाबी फायरिंग में विकास दुबे को गोली लगी. उधर, पता चला है कि 4 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, इनमें एक इंस्पेक्टर, एक एएसआई और दो सिपाही शामिल हैं.

आइए जानते हैं विकास दुबे के सात दिन की कहानी



  • कब पुलिस के रडार में आया विकास दुबे

    उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक हफ्ते पहले हिस्ट्रीशीटर अपराधी विकास दुबे को पकड़ने गई पुलिस टीम पर विकास दुबे और उसके साथियों ने हमला कर दिया था. इस घटना में 8 पुलिस कर्मी शहीद हो गए थे जबकि 7 घायल हो गए थे. इस घटना ने उत्तर प्रदेश को हिलाकर रख दिया था. हिस्ट्रीशीटर के खिलाफ जान से मारने की कोशिश की एक एफआईआर पर पुलिस की सख्ती के बाद जिस तरह से पुलिसकर्मियों को मौत के घाट उतारा गया तब से ही विकास दुबे पुलिस के रडार में आ गया था.


  • पुलिस के हाथ कैसे लगा गैंगस्टर विकास दुबे

    यूपी के मोस्ट वॉन्टेड अपराधी विकास दुबे को उज्जैन में गिरफ्तार किया गया था. बताया जा रहा है कि महाकाल मंदिर परिसर में पहुंच कर विकास चिल्ला-चिल्लाकर ख़ुद को विकास दुबे बता रहा था. उसे फौरन मंदिर परिसर में तैनात सुरक्षा गार्ड ने पकड़ लिया और पुलिस को इसकी सूचना दी थी. जिसके बाद महाकाल थाना पुलिस मौके पर पहुंची और उसे गिरफ्तार कर लिया. बता दें कि पुलिस ने जब शख्‍स को पकड़ा तो चिल्‍लाने लगा- मैं विकास दुबे हूं कानपुर वाला.


  • मीडिया को कैसे नहीं लग सकी भनक

    जब यूपी की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम कानपुर शूटआउट के मुख्य आरोपी को मध्य प्रदेश से लेकर चली, तभी से मीडिया की गाड़ियां उसे फॉलो कर रही थीं. कानपुर तक भी मीडिया की गाड़ियां पीछे थीं. लेकिन एक जगह पर करीब एक किलोमीटर पहले तक मीडिया की गाड़ियों को रोक दिया गया और चेकिंग की जा रही थी. इसके तुरंत बाद एसटीएफ के काफिले में शामिल गाड़ी के पलटने की खबर आई.


  • विकास दुबे का कैसे हो गया एनकाउंटर

    शुक्रवार सुबह जब यूपी एसटीएफ की टीम विकास दुबे को उज्‍जैन से ला रही थी तभी उसके काफिले की कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई है. इस दौरान आरोपी विकास दुबे ने कार में सवार पुलिसकर्मी की पिस्टल छीनकर फायरिंग करते हुए भागने की कोशिश की. इसी बीच एसटीएफ की दूसरी गाड़ियां वहां पहुंच गईं और पुलिस की जवाबी फायरिंग में विकास दुबे को गोली लगी.


  • विकास दुबे का शव अभी कहां रखा गया है

    विकास दुबे के शव को मुठभेड़ के बाद हैलट अस्‍पताल में रखा गया है. एसएसपी और अस्‍पताल के डॉक्‍टरों ने विकास दुबे के मारे जाने की पुष्टि की है. कानपुर के आईजी मोहित अग्रवाल ने भी गैंगस्‍टर विकास दुबे के मारे जाने की पुष्टि कर दी है.


  • इस पूरे एनकाउंटर पर पुलिस की क्या है थ्योरी

    एसएसपी दिनेश कुमार ने बताया कि विकास दुबे को ला रहे काफिले के पीछे कुछ गाड़ियां लगी हुई थीं. यह लगातार पुलिस के काफिले को फॉलो कर रही थीं. जिसकी वजह से गाड़ी तेज़ भगाने की कोशिश की गई. बारिश तेज़ थी इसलिए गाड़ी पलट गई. एसएसपी के मुताबिक, इस मौके का फायदा उठाकर विकास दुबे भागने की कोशिश में था. हमारे एसटीएफ जवान इस गाड़ी को पीछे से फॉलो कर रहे थे. उन्होंने कॉम्बिंग की. फायरिंग हुई और सेल्फ डिफेंस में विकास दुबे पर गोली चलाई गई, जिससे वह मारा गया.


  • बीजेपी नेता की हत्या के बाद सुर्खियों में आया था

    साल 2001 में विकास दुबे ने बीजेपी के सीनियर नेता संतोष शुक्ला की शिवली पुलिस स्टेशन के अंदर हत्या कर दी. उन दिनों केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे. कहा जाता है कि हरिकिशन श्रीवास्तव और संतोष शुक्ला के बीच राजनीतिक लड़ाई के चलते उसने ये मर्डर किया. पुलिस स्टेशन में हत्या को अंजाम देने के बाद भी पुलिस उसे वहां गिरफ्तार नहीं कर सकी. आखिरकार उसने कोर्ट में सरेंडर किया.
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