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जड़ों की ओर लौटने को जमीन तलाश रहे कश्मीरी पंडित, धारा 370 हटने से बंधी है आस...
Kanpur News in Hindi

News18 Uttar Pradesh
Updated: February 5, 2020, 6:12 PM IST
जड़ों की ओर लौटने को जमीन तलाश रहे कश्मीरी पंडित, धारा 370 हटने से बंधी है आस...
'पनून कश्मीर' के राष्ट्रीय संयोजक अग्निशेखर ने कानपुर कश्मीरी पंडित सभा के सदस्यों से की मुलाक़ात

कवि, लेखक और विचारक 'पनून कश्मीर' (Panoon Kashmir) के राष्ट्रीय संयोजक अग्निशेखर का कहना है कि दरअसल यह एक राष्ट्रीय मुद्दा है जो सिर्फ कश्मीरी पंडितों तक सीमित नहीं है.

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कानपुर. 90 के दशक मे कश्मीर (Kashmir) में हुए कत्लेआम का दर्द आज भी कश्मीरी पंडितों (Kashmiri Pandit) में देखा जा सकता है. केंद्र सरकार द्वारा धारा 370 हटाने व कश्मीर के विकास को नई दिशा देने के प्रयासों से विस्थापित हो चुके कश्मीरी पंडितों में फिर से घर वापसी की आस जगी है. यही वजह है कि कश्मीरी पंडित एक बार फिर से वापस अपनी जड़ों की ओर लौटने के लिए जमीन तलाश रहे हैं. इनका संगठन जगह-जगह जाकर इनकी राय ले रहा है और फिर से स्थापित होने की तैयारी कर रहा है.

प्रतिनिधि मंडल ले रहा है राय
घर वापसी की तैयारी को लेकर देशभर में कश्मीरी पंडितों का प्रतिनिधि मंडल शहर-शहर जा कर विस्थापित हुए कश्मीरी पंडितों से उनकी राय ले रहा है. इसी क्रम में कानपुर पहुंचे कश्मीर के विस्थापित कवि, लेखक और विचारक 'पनून कश्मीर' के राष्ट्रीय संयोजक अग्निशेखर कानपुर भी आए जहां उन्होंने कानपुर कश्मीरी पंडित सभा के बैनर तले कश्मीरी पंडितों के साथ गोष्ठी की और देश-विदेश में बिखरे कश्मीरी पंडितों को एक जुट करने पर चर्चा की. लेखक अग्निशेखर का कहना है कि कश्मीर को उनके मूल निवासी हिंदुओ से विहीन करना संभव है तो विस्थापित कश्मीरी पंडितों के लिये चंडीगढ़ सरीखा एक विशाल गृह राज्य बनाना संभव क्यों नहीं ? उनका कहना है कि दरअसल यह एक राष्ट्रीय मुद्दा है जो सिर्फ कश्मीरी पंडितों तक सीमित नहीं है.

सरकार से मांग

अग्निशेखर का कहना है कि इसको लेकर वह लगातार सरकार से मांग कर रहे हैं और अपना प्रस्ताव भी रखा है कि यदि कश्मीरी पंडित कश्मीर मे रहने जाते हैं तो उनके भविष्य को लेकर सरकार की क्या योजना है, उनकी जो जमीने वहां पर चली गयी हैं उनको लेकर सरकार क्या आश्वासन दे रही है. इसके जवाब सरकार से मिलने के बाद ही वहां पर स्थापित हो सकते हैं. क्योंकि नब्बे के दशक का जो मंजर था वह आज भी उनके जेहन में ताजा है. इस मौके पर कश्मीरी पंडित महासभा के पदाधिकारी डाक्टर मट्टू, पवन कौल समेत अन्य पदाधिकारी शामिल हुए.

कश्मीरी पंडित डॉ. प्रदीप मट्टू का कहना है कि यदि उन्हें सुरक्षा दी जाये और व्यापार भी तो वह वहां पर दुबारा बसने के लिये तैयार है. वहीं उद्यमी रवी रैना का कहना है कि केंद्र सरकार ने धारा-370 हटा कर एक बहुत बड़ा कदम उठाया है जिसका वह स्वागत करते हैं. मगर वहां पर दुबारा स्थापित होने के लिये सरकार को समुचित सुरक्षा व्यवस्था के भी पुख्ता इंतजाम करने होंगे. तभी वह और उन जैसे लाखों परिवार फिर से वहां वापस जाकर बसने पर विचार करेगें.

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First published: February 5, 2020, 6:12 PM IST
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