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लेदर के बाद अब कानपुर में मंदिर के फूलों से बनाया जा रहा अनोखा मैटेरियल, नाम होगा फ्लेदर

फूलों

फूलों से तैयार किया गया फ्लेदर

इंटरनेशनल मार्केट में फूलों से बने फ्लेदर की डिमांड बहुत अधिक है. शहर के उद्यमी अंकित अग्रवाल ने आईआईटी कानपुर की मदद से फ्लेदर तैयार किया है. इस फ्लेदर से बने बैग, पर्स, जैकेट, जूते और बेल्ट यूरोपियन मार्केट में धूम मचा रहे है.

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    मंदिरों में चढ़ाए गए फूलों को इकट्ठा करके और उनकी प्रोसेसिंग कर के एक ऐसा मटेरियल तैयार किया है जो लेदर का बहुत अच्छा विकल्प है. इसे फ्लेदर नाम दिया गया है. इंटरनेशनल मार्केट में फूलों से बने फ्लेदर की डिमांड बहुत अधिक है. शहर के उद्यमी अंकित अग्रवाल ने आईआईटी कानपुर की मदद से फ्लेदर तैयार किया है. इस फ्लेदर से बने बैग, पर्स, जैकेट, जूते और बेल्ट यूरोपियन मार्केट में धूम मचा रहे है.

    मंदिर में चढ़ाए गए फूलों से हज़ारों लोगों के दो रहे रोजगार
    Phool कंपनी के फाउंडर अंकित ने बताया कि वह मंदिरों में चढ़ाए गए फूलों को इकट्ठा करते है और उनकी प्रोसेसिंग करके एक ऐसा मटेरियल तैयार किया है जो चमड़े को टक्कर दे रहा है. उन्होंने बताया कि आईआईटी के छात्र-छात्राओं की टीम के साथ मिलकर हमने स्टार्टअप स्थापित किया. फिर दो साल तक आइआइटी कानपुर की अत्याधुनिक प्रयोगशाला में कई प्रयोग करने के बाद यह फ्लेदर बनाया गया. इसमें आईआईटी कानपुर से केमिकल इंजीयनरिंग की पढ़ाई करने वाले नचिकेता अहम भूमिका निभाई.
    IIT कानपुर की मदद से तैयार किया मैटेरियल
    अंकित ने बताया कि आईआईटी कानपुर की मदद से उन्होंने फूल स्टार्टअप स्थापित किया और इनोवेशन में जुट गए. उन्होंने दो सालों तक कड़ी मेहनत के साथ ही अत्याधुनिक लैब में कई रिसर्च करने के बाद फूलों से बैक्टेरिया को विकसित कर फ्लेदर बनाने में सफलता हासिल की. उन्होंने बताया कि रिसर्च के दौरान आईआईटी के स्टार्टअप इंक्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर के प्रभारी प्रो. अमिताभ बंदोपाध्याय ने भी काफी मदद की. उनके डायरेक्शन के बिना यह कर पाना बहुत ही मुश्किल था.
    वीगन लवर्स की पहली पसंद बना
    अंकित का कहना है कि यूरोप में ज़्यादातर लोग आज कल वीगन डाइट फॉलो करते है. यह लोग चमड़ा पहनना भी पसंद नहीं करते. इसी लिए हमारे प्रोडेक्ट की डिमांड जर्मनी, फ्रांस, इटली, बेल्जियम जैसे देश में है. अंकित ने बताया कि मथुरा व वृंदावन के पास भी एक यूनिट खोलने की उनकी योजना थी. मगर कोरोना के चलते यह नहीं हो सका. फिलहाल, फ्लेदर बनाने के लिए मथुरा व वृंदावन के फूलों का भी उपयोग किया जा रहा है. इन फूलों को कानपुर स्थित औद्योगिक इकाई लाकर उत्पादन प्रक्रिया की जाती है.

    न्यूज 18 लोकल के लिए आलोक तिवारी की रिपोर्ट

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