बिकरू कांड: SIT की अनुसंशा दरकिनार, दोषी पुलिसकर्मी पर कार्रवाई के बजाए की हुई पोस्टिंग

गैंगस्टर विकास दुबे. (फाइल फोटो)

गैंगस्टर विकास दुबे. (फाइल फोटो)

Kanur News: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के कानपुर (Kanpur) में पुलिस (Police) पर अब मनमानी करने के आरोप लगे हैं. कहा जा रहा है कि पुलिस के अधिकारी बिकरू कांड (Bikeru Case) में बहे खाकीधारियों के खून को भूल गए हैं.

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कानपुर. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के कानपुर (Kanpur) में पुलिस (Police) पर अब मनमानी करने के आरोप लगे हैं. कहा जा रहा है कि पुलिस के अधिकारी बिकरू कांड (Bikeru Case) में बहे खाकीधारियों के खून को भूल गए हैं. उन पुलिसवालों की शहादत को भुला दिया गया, जिन्होंने कानून की खातिर अपनी जान गंवा दी. अभी सात महीने ही बीते हैं और पुलिस के अधिकारियों ने उन  पुलिसवालों को मलाईदार जगहों पर पोस्ट करना शुरू कर दिया है, जो खाकी के गुनहगार हैं. डीआईजी कानपुर ने बिकरू कांड में दोषी पाए गए दरोगा की तैनाती भी कर दी है.

डीआईजी प्रीतिन्दर सिंह ने उस दरोगा को थाने में तैनात कर दिया जिसके लिए एसआईटी ने वृहद दंड की संस्तुति की है. इतना ही नही एसआईटी ने जिन्हें लघु दंड का दोषी बता अहम पदों से हटा कर उनकी जांच के आदेश दिए हैं, वह थानाप्रभारी बने बैठे हैं.  बिकरू कांड की जांच के लिए गठित एसआईटी की जांच में चौबेपुर में तैनात रहे दरोगा अजहर इशरत को विकास दुबे से मिली भगत का दोषी पाया गया. एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपी और शासन से रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को दी गयी, जहां से यह रिपोर्ट कानपुर में आलाधिकारियों को दी गयी और दोषी पुलिसकर्मियों पर जांच कर कार्रवाई के लिए कहा गया.

एसआईटी ने बनाई थी दो कैटेगरी

एसआईटी ने दोषी पुलिसकर्मियों की दो कैटेगिरी बनायी थी. एक कैटेगरी में उन पुलिसवालों को रखा गया, जिनका ज्यादा दोष था और उन्हें वृहद दंड दिए जाने की संस्तुति की गयी. दरोगा अजहर इशरत को पहली कैटेगरी में रखा गया और वृहद दंड दिए जाने की संस्तुति की गयी. दरोगा को दंड तो नही मिला अलबत्ता पुलिस लाइन से उसे अब साढ़ थाने में तैनाती दे दी गयी है. इतना ही नही कैटेगिरी दो में पहला नाम बजरिया थानाप्रभारी राममुर्ती यादव का है, जिन्हें उनके पद से अभी तक नहीं हटाया गया. जबकि इसी कैटेगिरी में लघु दंड दिए जाने की संस्तुति वाले लखनऊ के कृष्णा नगर थाने में तैनात इंस्पेक्टर को तत्काल हटा दिया गया था. पुलिस महानिदेशक कार्यालय से एसआईटी की कार्रवाई की संस्तुति वाला पत्र 9 नवम्बर को भेजा गया था. जिसके बाद अभी तक किसी पर कोई ठोस कार्रवाई नही की गयी. वहीं दोषियों को पोस्टिंग दी जा रही है, जो डीआईजी की कार्यशैली पर सवाल उठा रहा हैं.
डीआईजी ने दिए ये तर्क

डीआईजी प्रीतिन्दर सिंह का कहना है कि एसआईटी ने जिन पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई के लिए कहा है उनकी जांच जारी है. दरोगा अजहर इशरत की तैनाती पर वह गोलमोल जवाब देते नजर आए.  बता दें कि 2 जुलाई की रात बिकरू कांड में विकास दुबे के गिरफ्तारी के लिए पुलिस दबिश देने गयी थी, जहां विकास दुबे ने साथियो संग पुलिसवालों पर हमला बोल दिया. बदमाशों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर सीओ बिल्हौर सहित आठ पुलिसकर्मियों को मौत के घाट उतार दिया था. इस हमले में छह पुलिसकर्मी गम्भीर रुप से घायल हुए थे.

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