ब्लैक फंगस पीड़ित की पत्नी की गुहार- जान बचा लो साहब, नहीं खरीद सकती रोज 12000 का इंजेक्शन

ब्लैक फंगस का महंगा इलाज मरीजों के तीमारदारों के लिए चुनौती बन गया है.

ब्लैक फंगस का महंगा इलाज मरीजों के तीमारदारों के लिए चुनौती बन गया है.

Kanpur News: प्राइवेट नौकरी करने वाले विजय गौतम को 13 मई को हैलट अस्पातल में ब्लैक फंगस (Black Fungus) की पुष्टि हुई थी. डॉक्टरों ने पत्नी दीपिका को बताया कि विजय की एक आंख निकालनी पड़ सकती है. दीपिका पिछले कई दिनों से रोज 12 हजार रुपए का एंटी फंगल इंजेक्शन और मंहगी दवाइयां खरीद रही हैं.

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कानपुर. उत्तर प्रदेश के कानपुर (Kanpur) में कोरोना संक्रमण (COVID-19) के बाद अब ब्लैक फंगस (Black Fungus) का कहर देखने को मिल रहा है. ब्लैक फंगस से पीड़ितों के तीमारदारों के सामने महंगा इलाज एक बड़ी समस्या है. हैलट अस्पताल में भर्ती पति के इलाज के लिए एक महिला ने मंडलायुक्त से गुहार लगाई है. महिला ने मंडलायुक्त कार्यालय पहुंचकर पत्र सौंपा और हैलट अस्पताल में समुचित इलाज न मिलने की शिकायत की. महिला का कहना है कि वह 12 हजार की कीमत का एंटी फंगल इंजेक्शन अब और नहीं खरीद सकती है. मंहगी दवाएं खरीदने को रुपए नहीं हैं. अब सहयोगियों ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं, ऐसे में उसे अस्पताल से एंटी फंगल इंजेक्शन उपलब्ध कराया जाए.

दरअसल, प्राइवेट नौकरी करने वाले विजय गौतम को 13 मई को हैलट अस्पातल मे भर्ती कराया गया था. जांच के बाद ब्लैक फंगस की पुष्टि हुई और डॉक्टरों ने उसकी पत्नी दीपिका को बताया कि विजय की एक आंख निकालनी पड़ सकती है. दीपिका के मुताबिक वह पिछले कई दिनों से रोज 12 हजार रुपए का एंटी फंगल इंजेक्शन और मंहगी दवाइयां खरीद रही हैं. वह पड़ोसियों और पति के साथियों की आर्थिक मदद से इंजेक्शन और दवाएं खरीद रही थी. दीपिका का कहना है कि उसके मददगारों की भी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है.

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'मेडिकल कॉलेज नहीं दे रहा इंजेक्शन'
दीपिका ने बताया कि अब 12 हजार के इंजेक्शन के लिए 50 हजार रुपए तक मांगे जा रहे हैं. इधर मार्केट में इंजेक्शन की किल्लत है. वहीं, शासन ने जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज को 100 इंजेक्शन उपलब्ध कराए हैं. मेडिकल कॉलेज प्रिन्सिपल का कहना है कि जरूरत के मुताबिक ब्लैक फंगस पीड़ित को इंजेक्शन उपलब्ध कराए जाएंगे. मेडिकल कॉलेज को इंजेक्शन मिलने के बाद भी विजय को इस स्टॉक से इंजेक्शन नहीं मिल रहा है.

मंडलायुक्त को सौंपे पत्र में दीपिका ने कहा कि इस बारे में मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल से बात करने पर उन्होंने कहा कि विजय की कोविड पॉजिटिव की रिपोर्ट नहीं है, इसलिए उसे यह इंजेक्शन नहीं मिल सकते. जबकि उसके पति को मई के पहले हफ्ते में कोविड पॉजिटिव होने की वजह से एडमिट किया गया था. उनका ऑक्सीजन लेवल काफी कम था. इस दौरान डॉक्टरों ने उसका आरटीपीसीआर टेस्ट नहीं कराया. अब ब्लैक फंगस की पुष्टि के बाद डॉक्टरों ने कहा कि उनकी एक आंख निकाली जा सकती है.

अन्‍य अंगों में संक्रमण फैलने की आशंका



दीपिका का कहना है कि यदि समय से सही इलाज नहीं हुआ तो संक्रमण शरीर के अन्य अंगों में भी फैल सकता है. दीपिका ने पति कि जिन्दगी बचाने के लिए मंडलायुक्त से गुहार लगायी है. वहीं, मेडिकल कॉलेज के प्रिन्सिपल आरबी कमल का कहना है कि शासनादेश के मुताबिक ही एंटी फंगल इंजेक्शन का आवंटन किया जा सकता है.

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